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चौपाई राम चरित्र मानस #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "चौपाई" नहिं दरिद्र सम दुःख जग माहीं | संत मिलन सम सुख जग नाहीं Il पर उपकार बचन मन काया। संत सहज सुभाउ खगराया ।I भावार्थः इस जगत में दरिद्रता के समान दूसरा कोई दुःख नहीं है, तथा संतों के मिलने के समान जगत् में कोई और सुख नहीं है। और हे पक्षीराज! मन, वचन और शरीर से दूसरों का भला करना संतों का सहज स्वभाव है। (रामचरितमानस) Motivational Videos App Want . "चौपाई" नहिं दरिद्र सम दुःख जग माहीं | संत मिलन सम सुख जग नाहीं Il पर उपकार बचन मन काया। संत सहज सुभाउ खगराया ।I भावार्थः इस जगत में दरिद्रता के समान दूसरा कोई दुःख नहीं है, तथा संतों के मिलने के समान जगत् में कोई और सुख नहीं है। और हे पक्षीराज! मन, वचन और शरीर से दूसरों का भला करना संतों का सहज स्वभाव है। (रामचरितमानस) Motivational Videos App Want . - ShareChat