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*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*
*!! ईमानदार लकड़हारा!!*
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किसी गाँव के पास घना जंगल था। उसी गाँव में एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज़ जंगल में जाकर लकड़ियाँ काटता और बाजार में बेचकर अपने परिवार का गुज़ारा करता था। उसके पास बस एक ही लोहे की कुल्हाड़ी थी, वही उसकी रोज़ी-रोटी का सहारा थी।
एक दिन वह जंगल में नदी के किनारे पेड़ काट रहा था। अचानक उसका हाथ फिसल गया और उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। नदी गहरी थी और पानी तेज़ बह रहा था। लकड़हारा बहुत घबरा गया। वह नदी किनारे बैठकर दुखी मन से रोने लगा।
तभी वहाँ एक देवदूत प्रकट हुए और बोले, “तुम क्यों रो रहे हो?”
लकड़हारे ने विनम्रता से कहा, “मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है। वही मेरे परिवार के पालन-पोषण का साधन थी। अब मैं क्या करूँ?”
देवदूत नदी में गए और थोड़ी देर बाद एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर बाहर आए। उन्होंने पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?”
लकड़हारे ने तुरंत सिर हिलाकर कहा, “नहीं, यह मेरी नहीं है। मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की थी।”
देवदूत फिर नदी में गए और इस बार चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आए। उन्होंने पूछा, “क्या यह तुम्हारी है?”
लकड़हारे ने फिर ईमानदारी से कहा, “नहीं, यह भी मेरी नहीं है।”
तीसरी बार देवदूत नदी में गए और इस बार लोहे की वही पुरानी कुल्हाड़ी लेकर आए। लकड़हारा खुशी से बोला, “हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है।”
लकड़हारे की ईमानदारी देखकर देवदूत बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, “तुमने लालच नहीं किया और सच बोलने का साहस दिखाया। इसलिए इनाम के रूप में मैं तुम्हें ये तीनों कुल्हाड़ियाँ देता हूँ।”
लकड़हारा बहुत खुश हुआ। उसने देवदूत को धन्यवाद दिया और मन-ही-मन निश्चय किया कि जीवन में कभी भी ईमानदारी का रास्ता नहीं छोड़ेगा।
*✨ शिक्षा 👉*
यह कहानी हमें सिखाती है कि ईमानदारी और सत्य हमेशा अंत में फल देते हैं। कभी-कभी सच बोलना कठिन लगता है, लेकिन जो व्यक्ति लालच से दूर रहकर सच्चाई का साथ देता है, उसके जीवन में सम्मान, विश्वास और सफलता अवश्य आती है।
ईमानदारी वह धन है, जो एक बार मिल जाए तो पूरी दुनिया का विश्वास दिला देता है।
*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी


