Mukesh Sharma
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मंत्री, हरियाणा प्रदेश, मिशन मोदी सेना
#🤗बरसाना की लड्डू होली 🎨
🤗बरसाना की लड्डू होली 🎨 - बससाना धाम की [ಳ प्रसिद्ध लठ्ठमार होली की सभी को शुभकामनाऐं॰ शर्मा मुकेश सदस्य, हरियाणा प्रदेश कार्यकारिणी मिशन मोदी अगेन पीएम २०१९ सचिव, हरियाणा प्रदेश, राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ बससाना धाम की [ಳ प्रसिद्ध लठ्ठमार होली की सभी को शुभकामनाऐं॰ शर्मा मुकेश सदस्य, हरियाणा प्रदेश कार्यकारिणी मिशन मोदी अगेन पीएम २०१९ सचिव, हरियाणा प्रदेश, राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ - ShareChat
#🤗बरसाना की लड्डू होली 🎨 श्री रंगीली राधा रानी एवं रसिक शिरोमणि की जय हो, जय हो जय हो... बरसाना धाम की विश्व प्रसिद्ध "लठ्ठमार होली" की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाऐं..... बरसाना और नंदगांव की मशहूर लठ्ठमार होली में लड्डू और टेसू के फूलों से बने रंग से होली खेलने के बाद उत्संवी माहौल में लठ्ठ बरसाती गोपियां और उन्हें अपनी ढाल पर रोकते हुरियारों की छटा देखते ही बनती है.. बरसाना और नंदगांव में राधा-कृष्ण की लीला कण-कण में समायी हुई है। इसलिए आज भी यहां के लोग हर पर्व-त्यौहार पर उनके समान लीलाएं कर उनकी याद तरोताजा करते हैं। फाल्गुन शुक्ल नवमी के दिन बरसाना की हर युवती गोपी और नंदगांव का हर युवक किशन-कन्हैया बन जाता है और सब मिल कर खेलते हैं लठ्ठमार होली। इसे देखने न केवल देश, बल्कि विदेश से भी लोग प्रतिवर्ष यहां आते हैं। इस होली का आकर्षण रंग-अबीर एवं नृत्य-संगीत के अलावा, लाठियों से होली खेलना भी इसकी विशिष्टता है। बरसाना की गोपियां श्रीजी मंदिर के गोस्वामी घरों की स्त्रियां और नंदगांव के हुरियारे लठ्ठमार होली खेलने के लिए रंगीली गली के चौक पर एकत्रित होते हैं। उनके हाथों में मेहंदी, पांवों में महावर और आंखों में कटीला काजल हुआ करता है। हार, हमेल, हथफूल, कर्णफूल आदि अनेकानेक आभूषण उनके अंग-प्रत्यंग की शोभा बढ़ाते हैं। इसके अलावा, उनके हाथों में लंबी-लंबी लाठियां और सिर पर लंबे-लंबे घूंघट होते हैं। ये गोपिकाएं अपने-अपने घूंघटों की ओट में नंदगांव के हुरियारों पर उछल-उछल कर अपनी-अपनी लाठियों से बड़े ही प्रेमपूर्ण प्रहार करती हैं। इन प्रहारों को नंदगांव के हुरियारे अपनी-अपनी ढालों पर रोकते हैं। नंदगांव के हुरियारों को बरसाना की गोपिकाओं की लाठियां इतनी अच्छी लगती हैं कि जब-जब उनका जोश ठंडा पड़ता है, तब-तब नंदगांव के हुरियारे श्रृंगार रस की कड़ियां गा-गाकर उन्हें उकसाते हैं। इस होली के खत्म होने के बाद बरसाना की गोपिकाएं अपनी लाठियों को दर्शकों के माथे पर टिका-टिकाकर उनसे इनाम मांगती हैं।
"चारपाई – हमारी सबसे सस्ती, सरल और वैज्ञानिक खोज!" कमर दर्द, सर्वाइकल, पीठ की परेशानियाँ… इन सबका इलाज हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले ढूंढ लिया था — चारपाई। --- 🌿 सोचिए! अगर हमारे पूर्वज लकड़ी को चीरकर डबल बेड बना सकते थे, तो उन्होंने रस्सी से बुनने वाली खाट क्यों बनाई? क्योंकि ये सिर्फ बिस्तर नहीं — स्वास्थ्य, विज्ञान और समझदारी की कला थी। --- 🩺 जब हम सोते हैं, खासकर खाने के बाद, तो पेट को पाचन के लिए ज़्यादा खून चाहिए होता है। चारपाई की हल्की सी झोल, शरीर को वही आराम देती है, जो किसी महंगे ऑर्थोपेडिक बेड से भी नहीं मिलता। --- 👶🏻 पालना भी पहले कपड़े की झोल का होता था, अब उसे भी लकड़ी में बदलकर बच्चों की पीठ बिगाड़ दी। चारपाई पर सोने से ✅ कमर दर्द नहीं होता ✅ पीठ सीधी रहती है ✅ शरीर को पूरा येक्युप्रेशर मिलता है! --- 🛏️ डबल बेड भारी होता है, नीचे अंधेरा, धूल, कीटाणु, बैक्टीरिया की फैक्ट्री! रोज़ाना उठाकर साफ नहीं कर सकते। 🌞 लेकिन चारपाई ? रोज़ खड़ी करो, नीचे झाड़ू लगाओ, धूप लगाओ — प्राकृतिक कीटनाशक का इलाज भी हो गया। --- 🩹 डॉक्टर अगर किसी को Bed Rest लिखे, और वो अंग्रेजी बेड (डबल बैड, दिवान)पर लेट जाए — 2 दिन में Bed Sores (कमर मे फुंसियां, घाव) शुरू हो जाते हैं। लेकिन चारपाई? 💨 हवा आर-पार होती है, ❌ कोई घाव नहीं, ✅ सिर्फ आराम। --- 🔥 गर्मियों में मोटा गद्दा = गर्मी + AC लेकिन चारपाई = ठंडी हवा नीचे से भी, AC की जरूरत भी कम। --- 💸 और अब सुनिए असली बात — विदेशों में ये देसी चारपाई 1 लाख रुपए में बिक रही है! अमेरिकन कंपनियां इसे “Handcrafted Ayurvedic Cot” के नाम से बेच रही हैं। और हम? 👉 अपनी ही विरासत को छोड़कर 👉 महंगे, बीमारियों से भरे आधुनिक बेड पर लेटे हैं। --- 🙌 चारपाई सिर्फ चार लकड़ी के पाए नहीं… ये विज्ञान, परंपरा और सादगी की विरासत है। जिसे हमारे पूर्वजों ने अनुभव से बनाया, और आज हम बिना सोचे छोड़ते जा रहे हैं। --- 🚩 जय श्री राम | #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार