Mukesh Sharma
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मंत्री, हरियाणा प्रदेश, मिशन मोदी सेना
#👫 हमारी ज़िन्दगी #🙏सुविचार📿 #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी #☝अनमोल ज्ञान
👫 हमारी ज़िन्दगी - यह संसार परिवर्तनशील है। यहां कुछभी स्थाई नहीं है। जीवन में कभी अच्छी N0 SALE परिस्थितियां आती हैं और कभी बुरी। जैसी भी हों, वे बदलेंगी अवश्य। ऐसा मानकर जीवन जिएं ` तो आप कभी तनाव ग्रस्त नहीं होंगे। स्सुविचार ওতো ক্ষা १३ मार्च स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org यह संसार परिवर्तनशील है। यहां कुछभी स्थाई नहीं है। जीवन में कभी अच्छी N0 SALE परिस्थितियां आती हैं और कभी बुरी। जैसी भी हों, वे बदलेंगी अवश्य। ऐसा मानकर जीवन जिएं ` तो आप कभी तनाव ग्रस्त नहीं होंगे। स्सुविचार ওতো ক্ষা १३ मार्च स्वामी विवेकानंद परिव्राजक निदेशक, दर्शन योग महाविद्यालय https lldarshanyog org - ShareChat
#☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी #☝अनमोल ज्ञान #🙏सुविचार📿 #👫 हमारी ज़िन्दगी
☝ मेरे विचार - "घोंसला छोटा हो सकता है, पर मौनबाप का होसला आसमान से बड़ा होता है।" शुभ प्रभात "घोंसला छोटा हो सकता है, पर मौनबाप का होसला आसमान से बड़ा होता है।" शुभ प्रभात - ShareChat
1️⃣3️⃣❗0️⃣3️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣ *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️* *!!धर्य और संयम!!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ प्राचीन समय की बात है। एक घने जंगल के किनारे एक तालाब था। उस तालाब के पास एक हंस और एक कछुआ रहते थे। दोनों में गहरी मित्रता थी। वे रोज़ साथ बैठकर बातें करते, भोजन खोजते और जीवन के अनुभव साझा करते थे। समय के साथ उनकी मित्रता और भी मजबूत हो गई। एक वर्ष उस क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ गया। तालाब का पानी दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा था। हंसों को चिंता होने लगी कि यदि पानी पूरी तरह सूख गया तो उनके मित्र कछुए का जीवन संकट में पड़ जाएगा, क्योंकि वह पानी के बिना अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता था। एक दिन दोनों हंसों ने कछुए से कहा, “मित्र, हमने पास के जंगल में एक बड़ा और गहरा तालाब देखा है। वहाँ बहुत पानी है और तुम्हारा जीवन सुरक्षित रहेगा। हम चाहते हैं कि तुम्हें वहाँ पहुँचा दें।” कछुआ यह सुनकर खुश तो हुआ, लेकिन उसने पूछा, “पर मैं वहाँ तक कैसे पहुँचूँगा? मैं तो उड़ नहीं सकता।” हंसों ने थोड़ी देर विचार किया और एक उपाय निकाला। उन्होंने एक मजबूत लकड़ी की डंडी लाकर कछुए से कहा, “तुम इस डंडी को अपने मुँह से मजबूती से पकड़ लेना। हम दोनों इसे अपने-अपने सिरों से चोंच में पकड़कर उड़ेंगे और तुम्हें सुरक्षित उस तालाब तक पहुँचा देंगे। लेकिन एक बात का ध्यान रखना—उड़ते समय तुम बिल्कुल भी मुँह मत खोलना।” कछुए ने उनकी बात मान ली। दोनों हंस डंडी को पकड़कर उड़ने लगे और कछुआ बीच में लटक गया। जब वे आकाश में उड़ रहे थे, तब नीचे के गाँव के लोगों ने यह विचित्र दृश्य देखा। लोग आश्चर्य से चिल्लाने लगे, हँसने लगे और तरह-तरह की बातें करने लगे। उनकी बातें सुनकर कछुए को गुस्सा आ गया। वह खुद को रोक नहीं पाया और बोलने के लिए जैसे ही मुँह खोला, डंडी उसके मुँह से छूट गई। अगले ही क्षण वह ऊँचाई से नीचे गिर पड़ा। हंसों ने दुखी होकर कहा, “काश, हमारा मित्र थोड़ा धैर्य और संयम रखता तो आज सुरक्षित नए तालाब तक पहुँच जाता।” यह कहानी हमें सिखाती है कि कई बार हमारी छोटी-सी असावधानी या क्रोध हमारे लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। बुद्धिमान वही है जो कठिन समय में भी संयम बनाए रखे और अच्छे मित्रों की सलाह को ध्यान से माने। *शिक्षा 👉* समय पर धैर्य और संयम रखना ही सच्ची बुद्धिमानी है। *सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।* *जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।* ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार #☝अनमोल ज्ञान #🙏सुविचार📿 #👫 हमारी ज़िन्दगी
शादी की वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर पति-पत्नी साथ में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे। संसार की दृष्टि में वो एक आदर्श युगल था। प्रेम भी बहुत था दोनों में लेकिन कुछ समय से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि संबंधों पर समय की धूल जम रही है। शिकायतें धीरे-धीरे बढ़ रही थीं। बातें करते-करते अचानक पत्नी ने एक प्रस्ताव रखा कि मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना होता है लेकिन हमारे पास समय ही नहीं होता एक-दूसरे के लिए। इसलिए मैं दो डायरियाँ ले आती हूँ और हमारी जो भी शिकायत हो हम पूरा साल अपनी-अपनी डायरी में लिखेंगे। अगले साल इसी दिन हम एक-दूसरे की डायरी पढ़ेंगे ताकि हमें पता चल सके कि हममें कौन सी कमियां हैं जिससे कि उसका पुनरावर्तन ना हो सके। पति भी सहमत हो गया कि विचार तो अच्छा है। डायरियाँ आ गईं और देखते ही देखते साल बीत गया। अगले साल फिर विवाह की वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर दोनों साथ बैठे। एक-दूसरे की डायरियाँ लीं। पहले आप, पहले आप की मनुहार हुई। आखिर में महिला प्रथम की परिपाटी के आधार पर पत्नी की लिखी डायरी पति ने पढ़नी शुरू की। पहला पन्ना...... दूसरा पन्ना........ तीसरा पन्ना ..... आज शादी की वर्षगांठ पर मुझे ढंग का तोहफा नहीं दिया। .......आज होटल में खाना खिलाने का वादा करके भी नहीं ले गए। .......आज मेरे फेवरेट हीरो की पिक्चर दिखाने के लिए कहा तो जवाब मिला बहुत थक गया हूँ ........ आज मेरे मायके वाले आए तो उनसे ढंग से बात नहीं की .......... आज बरसों बाद मेरे लिए साड़ी लाए भी तो पुराने डिजाइन की ऐसी अनेक रोज़ की छोटी-छोटी फरियादें लिखी हुई थीं। पढ़कर पति की आँखों में आँसू आ गए। पूरा पढ़कर पति ने कहा कि मुझे पता ही नहीं था मेरी गल्तियों का। मैं ध्यान रखूँगा कि आगे से इनकी पुनरावृत्ति ना हो। अब पत्नी ने पति की डायरी खोली पहला पन्ना……… कोरा दूसरा पन्ना……… कोरा तीसरा पन्ना ……… कोरा अब दो-चार पन्ने साथ में पलटे वो भी कोरे फिर 50-100 पन्ने साथ में पलटे तो वो भी कोरे पत्नी ने कहा कि मुझे पता था कि तुम मेरी इतनी सी इच्छा भी पूरी नहीं कर सकोगे। मैंने पूरा साल इतनी मेहनत से तुम्हारी सारी कमियां लिखीं ताकि तुम उन्हें सुधार सको। और तुमसे इतना भी नहीं हुआ। पति मुस्कुराया और कहा मैंने सब कुछ अंतिम पृष्ठ पर लिख दिया है। पत्नी ने उत्सुकता से अंतिम पृष्ठ खोला। उसमें लिखा था मैं तुम्हारे मुँह पर तुम्हारी जितनी भी शिकायत कर लूँ लेकिन तुमने जो मेरे और मेरे परिवार के लिए त्याग किए हैं और इतने वर्षों में जो असीमित प्रेम दिया है उसके सामने मैं इस डायरी में लिख सकूँ ऐसी कोई कमी मुझे तुममें दिखाई ही नहीं दी। ऐसा नहीं है कि तुममें कोई कमी नहीं है लेकिन तुम्हारा प्रेम, तुम्हारा समर्पण, तुम्हारा त्याग उन सब कमियों से ऊपर है। मेरी अनगिनत अक्षम्य भूलों के बाद भी तुमने जीवन के प्रत्येक चरण में छाया बनकर मेरा साथ निभाया है। अब अपनी ही छाया में कोई दोष कैसे दिखाई दे मुझे। अब रोने की बारी पत्नी की थी। उसने पति के हाथ से अपनी डायरी लेकर दोनों डायरियाँ अग्नि में स्वाहा कर दीं और साथ में सारे गिले-शिकवे भी। फिर से उनका जीवन एक नवपरिणीत युगल की भाँति प्रेम से महक उठा। दोस्तो, ये एक काल्पनिक कहानी है। पति की जगह पत्नी भी हो सकती है और पत्नी की जगह पति भी। सीखना केवल ये है कि जब जवानी का सूर्य अस्ताचल की ओर प्रयाण शुरू कर दे तब हम एक-दूसरे की कमियां या गल्तियां ढूँढने की बजाए अगर ये याद करें हमारे साथी ने हमारे लिए कितना त्याग किया है, उसने हमें कितना प्रेम दिया है, कैसे पग-पग पर हमारा साथ दिया है तो निश्चित ही जीवन में प्रेम फिर से पल्लवित हो जाएगा। बस थोड़ा सा सोचने की देर है ………… #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार #👫 हमारी ज़िन्दगी
_*🌷रात्रि चिंतन🌷*_ _*जब ईश्वर के फैसलों पर यकीन होने लगे, तब मन जिद करना छोड़ देता है। कमरा कितना भी खूबसूरत हो अगर छत से पानी टपकता रहे तो हम बरामदे में ही बेहतर हैं। स्वाभिमान को ठेस पहुँचे वहाँ न प्रेम है, न शानो शौकत।अगर किसी से अपनी अहमियत जाननी है तो एक बार उसे गुस्सा दिलाकर देखो, हमारे लिए उसके दिल में क्या है सब उसके जुबान पर आ जायेगा।*_ _*संसार हमें भागना सिखाएगा, हमें ठहरना सीख लेना होगा, वही काम आएगा। जन्म जन्म से हम भाग तो रहे हैं, इस बार ठहर कर भी देखना है। जिंदगी जीना और जिंदा रहने में काफ़ी फर्क है, जिंदा रहना एक "जरूरत" है और जिंदगी जीना एक "कला" है।*_ _*॥ जय श्री राधे कृष्ण ॥*_ _*🌺🌷शुभ रात्रि🌷🌺*_ #☝अनमोल ज्ञान #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार #👫 हमारी ज़िन्दगी #🙏सुविचार📿