ShareChat
click to see wallet page
search
#📓 हिंदी साहित्य #📖 कविता और कोट्स✒️ #✍️ साहित्य एवं शायरी
📓 हिंदी साहित्य - 'धीरे-्धीरे' मुझे सख़्त नफ़रत है इस शब्द से। धीरे-्धीरे ही घुन लगता है अनाज मर जाता है, धीरे-्धीरे ही दीमकें सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सब-कुछ चाट जाती हैं साहस डर जाता है। धीरे-धीरे ही विश्वास खो जाता है सकंल्प सो जाता है। PAGE 'धीरे-्धीरे' मुझे सख़्त नफ़रत है इस शब्द से। धीरे-्धीरे ही घुन लगता है अनाज मर जाता है, धीरे-्धीरे ही दीमकें सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सब-कुछ चाट जाती हैं साहस डर जाता है। धीरे-धीरे ही विश्वास खो जाता है सकंल्प सो जाता है। PAGE - ShareChat