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🌹🌹🌹🌹 *सत्संग*🌹🌹🌹🌹 सत्संग = सत्+संग जहाँ सत् का अर्थ सत्य है व संग का अर्थ संगति/साथ है । गर्भस्तुति में ईश्वर को सत्य से संबोधित किया गया है । अर्थात वह माध्यम जो हमें ईश्वर/परमपिता परमेश्वर का संग कराने में सक्षम है वह सत्संग है । सत्संग की बहुत महिमा है कहा एक पल के सत्संग को मोक्ष से भी श्रेष्ठ बताया गया है *तात स्वर्ग अपवर्ग सुख धरिय तुला एक अंग । तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग ।।* जीवन में संगति का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है बिना अच्छी संगति के व्यक्ति भले कितना ज्ञानी हो लेकिन अनुभव व विनम्रता विद्वत्ता में पीछे ही रहेगा। बिना भगवद् कृपा के सत्संग भी संभव नहीं है *बिनु सत्संग विवेक न होई।* *रामकृपा बिनु सुलभ न सोई ।।* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी