#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारती जय माता दी
हिन्दी कविता: #नया अध्याय
समय आगया बड़ा बेढंगा
नाली में बहती है गंगा,
छोटी छोटी बात के ऊपर
सब एक दूजे से कर लेते है पंगा,,,,
नव युवा को भान नहीं है
भले बुरे का ज्ञान नहीं है,
कब क्या कहना कैसे कहना
इन विषयों का ध्यान नहीं है,,,
माता पिता भाई बन्धु और
गुरु जनों के मनका तनिक भी
भाव ना जाने,
किस रिश्ते का इस समाज
में है कितना प्रभाव ना जाने,,,,
अजब गजब ये पीढ़ी आज की
जो छोटी छोटी बातों पर तुरंत
रुष्ठ हो जाती है,
बिना विचारे कुछ भी कहती
और कुछ भी कर जाती है,,,,,
अब अंत में यही कहूंगा
आओ हम सब मिलकर यारो
इस नव पीढ़ी को सहन सिलता
शैय्यम सहजता का एक नया
अध्याय पढ़ाएंगे भले बुरे का
पूर्ण रूप से हम इन्हें आभाष कराए,,,,,
कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी
( रसिक भारती ) #मुम्बईकर

