#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारती जय माता दी
हिंदी कविता: #राजनीति का असली रूप
राजनीति का यारो यह असली स्वरूप है यह बाहर से जितनी सुन्दर है यह भीतर से उतनी ही कुरूप है यही इस राजनीति का असली रूप है,,,,,2
यहां अच्छे और सच्चे कार्यकर्ताओं का होता बड़ा ही दोहन है,
जो पूर्ण समर्पित वर्षों से लगा हुआ है वही यहां पर ठगा हुआ है,,,,,2
जो विरोधी दल से आते है
वही खास बन जाते है मान मर्यादा और इज्जत वो सब से ज्यादा पाते है बात बात हर बात पर वही पूछे जाते है,,,,,,,2
राजनीति का यारो,,,,,,
वंशवाद की यारो यहां सभी को
लगी बड़ी बीमारी है,
अपने अंश वंश के खातिर
करते यहां सभी करते बड़ी तैयारी है,
हैजा प्लेग से ज्यादा यारो ये खतरनाक बीमारी है,,,,,2
कार्यकर्ताओं को यारो ये देते
झूठा प्रलोभन है,
आस का दिया उनके मन में जलाकर उनका खूब करते दोहन है
ये राजनीति का असली रूप है,,,,,,,2
जब जब चुनाव आता है
तब तब ये कार्यकर्ताओं को
खूब भरमाते है
कभी साथ में बैठ कर खाए खाना कभी कंधे पर हाथ धर कदम से कदम साथ बढ़ाते है बन कर उनका हितैषी वो अपनापन जताते हैं,,,2
बात बात हर बात पर
ये भाई बंधु बन जाते है,
पर जैसे ही चुनाव ये जीत जाते है वैसेही ये अपना असली रंग दिखाते है जो कल तक था सब से खास उसको ही सब से पहले भूल जाते है,,,,,,2
ये राजनीति का असली रूप है
ये बाहर से बड़ी सुन्दर है पर भीतर से बड़ी कुरूप है यह कोई बकवास नहीं मै राजनीतिक समाज का अनुभव कहता हु जो देख जो पढ़ा और जो महसूस किया वही सत्य कविता में लिखता हु यह राजनीति का असली रूप है,,,,,,,,,,,2
कवि: रमेश हरीशंकर तिवारी
( रसिक भारती ) #मुम्बईकर