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#📚कविता-कहानी संग्रह #जय माँ भारती जय माता दी हिंदी कविता: #बारूद का ढेर बारूद के ढेर पर बैठी है ये दुनिया , ना जाने किस गुमान में ऐंठी है ये दुनिया,,,, रक्त रंजीत कर धरा लाशों की लगा रही ढेर है, वक्त तेरा भी आयेगा इसमें ना तनिख देर है,,, आज जो लोगों को मार रहे है कल वो भी मरेंगे, तब ना इन्हें जमी मिलेगी ना इन्हें जन्नत मिलेगी,,,, जैसे इनके कर्म होंगे वैसे ही इन्हें कही तारीफ तो कही खूब जिल्लत मिलेगी,,, जमी थी सदा जमी पर वो जमी पर ही रहेगी, तेरी मेरी और हम सब की दास्तां ये कहेगी,,,, इसलिए कहता हु ना बना इंसान तो ना बन अब शैतान तू अब छोड़ दे झूठा गुमान तू,,,,, ये काया है माटी बस माटी रह जाएगी तेरी मेरे कर्मों की कहानी रह जाएगी,,,,, कवि;रमेश हरीशंकर तिवारी ( रसिक भारती ) #मुम्बईकर