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followme - मुझे पता है मेरे thoughts हर किसी को instantly पसंद नहीं आएंगे, और आज के fast scroll वाले time में बड़़े messages पर लोग जल्दी move on भी हो जाते हैं। लेकिन सच ये है कि जब हम -ஈசிகிhelp सुनते को खिलाना, सच बोलना करना, साथ खड़े रहना, भूखे त " महसूस होता अंदर कहीं न कहीं एक deep sukoon La है। पहले resources कम थे, फिर भी " अतिथि देवो भव" सिर्फ शब्द नहीं, lifestyle थाः लोग गरीब को खिलाकर खाते थे, जानवरों तक का ध्यान रखते थे। आज सुविधाएँ बढ़ गई हैं पर वो simple और pure सोच धीरे ्धीरे background में खोती जा रही है। आखिर हर इंसान को end में peace ही चाहिए, और वो outside validation से नहीं, अंदर के भाव से आता है। इसलिए चाहे माहौल कितना भी modern, busy distracting क्यों न हो, अगर रोज़ सिर्फ १० मिनट भी धर्म या या self-reflection की कोई किताब पढ लो, तो अंदर एक quiet strength बनती है - वही strength मुश्किल समय में संभालती है, mind को stable रखती है और इंसान को अंदर से सा़फ और मजबूत बनाती है। और सच कहूँ तो मुझे किसी से कोई लेना ्देना नहीं कि कौन follow करता है और कौन नहीं। मेरे लिए success numbers से नहीं, alignment से मापी जाती है। अगर मैं अपनी सोच के हिसाब से पूरी life जी पाऊँ, तो मुझे ७७० यकीन लेकिन सच ये भी है कि मैं है कि मेरा कalyan हो जाएगा ' खुद अभी उसे पूरी तरह जी नहीं पाता। फिर भी कोशिश जारी है। क्योंकि मेरे लिए जीत ये नहीं कि दुनिया मुझे समझे, बल्कि ये है कि मैं अपनी ही नजरों में सच्चा रह सकूँ। बाकी दुनिया अंदर की clarity ही असली जीत है। যসত্ী যা না যমত্ী   मुझे पता है मेरे thoughts हर किसी को instantly पसंद नहीं आएंगे, और आज के fast scroll वाले time में बड़़े messages पर लोग जल्दी move on भी हो जाते हैं। लेकिन सच ये है कि जब हम -ஈசிகிhelp सुनते को खिलाना, सच बोलना करना, साथ खड़े रहना, भूखे त महसूस होता अंदर कहीं न कहीं एक deep sukoon La है। पहले resources कम थे, फिर भी " अतिथि देवो भव" सिर्फ शब्द नहीं, lifestyle थाः लोग गरीब को खिलाकर खाते थे, जानवरों तक का ध्यान रखते थे। आज सुविधाएँ बढ़ गई हैं पर वो simple और pure सोच धीरे ्धीरे background में खोती जा रही है। आखिर हर इंसान को end में peace ही चाहिए, और वो outside validation से नहीं, अंदर के भाव से आता है। इसलिए चाहे माहौल कितना भी modern, busy distracting क्यों न हो, अगर रोज़ सिर्फ १० मिनट भी धर्म या या self-reflection की कोई किताब पढ लो, तो अंदर एक quiet strength बनती है - वही strength मुश्किल समय में संभालती है, mind को stable रखती है और इंसान को अंदर से सा़फ और मजबूत बनाती है। और सच कहूँ तो मुझे किसी से कोई लेना ्देना नहीं कि कौन follow करता है और कौन नहीं। मेरे लिए success numbers से नहीं, alignment से मापी जाती है। अगर मैं अपनी सोच के हिसाब से पूरी life जी पाऊँ, तो मुझे ७७० यकीन लेकिन सच ये भी है कि मैं है कि मेरा कalyan हो जाएगा ' खुद अभी उसे पूरी तरह जी नहीं पाता। फिर भी कोशिश जारी है। क्योंकि मेरे लिए जीत ये नहीं कि दुनिया मुझे समझे, बल्कि ये है कि मैं अपनी ही नजरों में सच्चा रह सकूँ। बाकी दुनिया अंदर की clarity ही असली जीत है। যসত্ী যা না যমত্ী - ShareChat