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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - साहित्य सृजन संस्थान -पंजी. बिसवा सीतापुर [ ಕ್ತಹಟಗಿ सृजन पुस्तकालय    हिंदी साहित्य को समर्पित आंदोलन নিমবী-মীনাসুম _F_--7 মতিলে ক্রী নলাহা मंजिल की तलाश में हम चलते चले गए। जिन्दगी का हर सफर निकलते चले गए। जो मिला याना मिला कोई आसरा यहां फिर भी हम हर आस से मिलते चले गए। खिल रहे थे जिससे मन के फूल फिर| हम उसी के साथ में खिलते चले गए। कोई तो मंजर मिलेगा फिर हमें यहां | कस्तियों से पार उतरते चले गए। मांझी को यूं हाथ में पकड़ा है इस कदर| बीच जलधारा में भी तरते चले गए। दरिया है यहां सागर सेभी गहरी | যু লা हम तो उस गहराई में उतरते चले गए। वो मिले यान मिले कुछ भी तो गम नही। हम उसी अहसास में जीते चले गए। सोनम सिंह चौहान सीतापुर शिवरा, रामपुर कलां  साहित्य सृजन संस्थान -पंजी. बिसवा सीतापुर [ ಕ್ತಹಟಗಿ सृजन पुस्तकालय    हिंदी साहित्य को समर्पित आंदोलन নিমবী-মীনাসুম _F_--7 মতিলে ক্রী নলাহা मंजिल की तलाश में हम चलते चले गए। जिन्दगी का हर सफर निकलते चले गए। जो मिला याना मिला कोई आसरा यहां फिर भी हम हर आस से मिलते चले गए। खिल रहे थे जिससे मन के फूल फिर| हम उसी के साथ में खिलते चले गए। कोई तो मंजर मिलेगा फिर हमें यहां | कस्तियों से पार उतरते चले गए। मांझी को यूं हाथ में पकड़ा है इस कदर| बीच जलधारा में भी तरते चले गए। दरिया है यहां सागर सेभी गहरी | যু লা हम तो उस गहराई में उतरते चले गए। वो मिले यान मिले कुछ भी तो गम नही। हम उसी अहसास में जीते चले गए। सोनम सिंह चौहान सीतापुर शिवरा, रामपुर कलां - ShareChat