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#पूजन विधि माँ कुष्मांडा
पूजन विधि - ঐনী ক্রুষ্সাত্ভা प्रिय पुष्प रँग के पुष्प लाल মন্স देवी 7#: कूष्माण्डायै সাথনা सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।  शुभदास्तु मे II दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ళTTా वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम् | सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम् । भास्वर भानु निभाम् अनाहत स्थिताम् चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पद्म, सुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम् II पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल, मण्डिताम् । प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्। कोमलाङ्गी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम् II स्तोत्रम् दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्। जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम् ।। जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्। जगतमाता चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम् I। त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्। परमानन्दमयी, कूष्माण्डे WUTHTHIగT Il कवचम् हंसरै में शिर पातु भवनाशिनीम् । कूष्माण्डे हसलकरीं नेत्रेच , हसरौश्च ललाटकम् II कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम दिग्विदिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजम् सर्वदावतु " आरती सुखदानी  मुझ पर दया करो महारानी कष्माण्डा जय जग पिङ्गला ज्वालामुखी निराली शाकम्बरी माँ भोली भाली Il लाखों नाम निराले तेरे भक्त कई मतवाले तेरे II भीमा पर्वत पर है डेरा स्वीकारो प्रणाम ये मेरा I। हो जगदम्बे | सुख पहुँचाती हो माँ अम्बे II  মুননী  सबकी तेरे दर्शन का मैं प्यासा | पूर्ण कर दो मेरी आशा माँ के मन में ममता भारी| क्यों ना सुनेगी अरज हमारी II तेरे दर पर किया है डेरा | दूर करो माँ संकट मेरा II  | मेरे तुम मेरे कारज पूरे कर दो भण्डारे भर दो ।। तेरा दास तुझे ही ध्याये भक्त तेरे दर शीश झुकाये ঐনী ক্রুষ্সাত্ভা प्रिय पुष्प रँग के पुष्प लाल মন্স देवी 7#: कूष्माण्डायै সাথনা सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।  शुभदास्तु मे II दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ళTTా वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम् | सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम् । भास्वर भानु निभाम् अनाहत स्थिताम् चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्। कमण्डलु, चाप, बाण, पद्म, सुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम् II पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्। मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल, मण्डिताम् । प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्। कोमलाङ्गी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम् II स्तोत्रम् दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्। जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम् ।। जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्। जगतमाता चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम् I। त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्। परमानन्दमयी, कूष्माण्डे WUTHTHIగT Il कवचम् हंसरै में शिर पातु भवनाशिनीम् । कूष्माण्डे हसलकरीं नेत्रेच , हसरौश्च ललाटकम् II कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम दिग्विदिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजम् सर्वदावतु " आरती सुखदानी  मुझ पर दया करो महारानी कष्माण्डा जय जग पिङ्गला ज्वालामुखी निराली शाकम्बरी माँ भोली भाली Il लाखों नाम निराले तेरे भक्त कई मतवाले तेरे II भीमा पर्वत पर है डेरा स्वीकारो प्रणाम ये मेरा I। हो जगदम्बे | सुख पहुँचाती हो माँ अम्बे II  মুননী  सबकी तेरे दर्शन का मैं प्यासा | पूर्ण कर दो मेरी आशा माँ के मन में ममता भारी| क्यों ना सुनेगी अरज हमारी II तेरे दर पर किया है डेरा | दूर करो माँ संकट मेरा II  | मेरे तुम मेरे कारज पूरे कर दो भण्डारे भर दो ।। तेरा दास तुझे ही ध्याये भक्त तेरे दर शीश झुकाये - ShareChat