wbeauty
ShareChat
click to see wallet page
@241107786
241107786
wbeauty
@241107786
हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 19-02-26 श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती गुरुवार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन श्री रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती मनाई जाती है।श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। , इन्होनें : इन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त है, जो समाधि की अंतिम अवस्था है। हैं कि श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती क्यों मनाई जाती है? यह महोत्सव न केवल क्या आप जानते उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति है, बल्कि प्रेम और एकता का भी प्रतीक है। 1836 # క3II ' में गहन  श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म, सत्य सिखाए हैं। था, इन्होनें सरल शब्दों इनका मानना था कि सभी धर्म एक ही दिव्य लक्ष्य तक पहुँचते हैं। वे अक्सर कहते थे, "ईश्वर एक है, लेकिन उसके नाम अनेक हैं।" बेलूर मठ में इस पवित्र दिन पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। सुबह ४:३० बजे से आरंभ কীন বালী आरती से लेकर देर रात तक भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम होते हैं। मंगला श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त थे, इन्होनें अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। स्वामी जी के बचपन का नाम गदाधर था, कुशाग्र बुद्धि होने के कारण स्वामी जी को पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद् गीता कण्ठस्थ हो गई थी। श्री रामकृष्ण जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था, प्रेम और सेवा के माध्यम से हम उनके आदर्शों को जीवित रख सकते हैं। 19-02-26 श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती गुरुवार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन श्री रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती मनाई जाती है।श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। , इन्होनें : इन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त है, जो समाधि की अंतिम अवस्था है। हैं कि श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती क्यों मनाई जाती है? यह महोत्सव न केवल क्या आप जानते उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति है, बल्कि प्रेम और एकता का भी प्रतीक है। 1836 # క3II ' में गहन  श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म, सत्य सिखाए हैं। था, इन्होनें सरल शब्दों इनका मानना था कि सभी धर्म एक ही दिव्य लक्ष्य तक पहुँचते हैं। वे अक्सर कहते थे, "ईश्वर एक है, लेकिन उसके नाम अनेक हैं।" बेलूर मठ में इस पवित्र दिन पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। सुबह ४:३० बजे से आरंभ কীন বালী आरती से लेकर देर रात तक भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम होते हैं। मंगला श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त थे, इन्होनें अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। स्वामी जी के बचपन का नाम गदाधर था, कुशाग्र बुद्धि होने के कारण स्वामी जी को पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद् गीता कण्ठस्थ हो गई थी। श्री रामकृष्ण जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था, प्रेम और सेवा के माध्यम से हम उनके आदर्शों को जीवित रख सकते हैं। - ShareChat
फुलेरा दूज #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - सरोवर 19-02-26 फुलैरा दूज गुरुवार फाल्गुन माह की द्वितीया को मनायी जाने वाली फुलैरा दूज, को इस त्यौहार को फूलों से रंगोली होली आगमन का प्रतीक माना जाता है।  बनाई जाती है तथा विशेष रूप से श्री राधाकृष्ण का " फूलों से करके उनकी पूजा की जाती है।  9ITR कि फुलेरा दूज को साल का सबसे शुभ मुहूर्त क्यों r क्या आप जानते हैं जाता है? ೫೯ दूज, फाल्गुन माह की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और यह प्रेम व वैवाहिक फुलेरा में मधुरता लाने वाला पर्व माना जाता है। इस दिन बिना किसी पंचांग के भी शुभ जीवन कार्यों को संपन्न करना शुभ होता है। राधा ्कृष्ण की पूजा विशेष महत्व रखती है, जिससे दूर होती हैं। प्रेम और दांपत्य जीवन की समस्याएं के साथ होली खेलते हैं और फुलेरा दूज की मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ক্ুলী शुभ पूर्व संध्या पर होली के त्योहार में भाग लेते हैं। पूजन विधि में स्नान के बाद से राधा ्कृष्ण की प्रतिमा सजाएं और पुष्पों ; सुगंधित ' मधुराष्टक का पाठ करें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और किसी भी प्रकार की नकारात्मकता 8r81] सरोवर 19-02-26 फुलैरा दूज गुरुवार फाल्गुन माह की द्वितीया को मनायी जाने वाली फुलैरा दूज, को इस त्यौहार को फूलों से रंगोली होली आगमन का प्रतीक माना जाता है।  बनाई जाती है तथा विशेष रूप से श्री राधाकृष्ण का " फूलों से करके उनकी पूजा की जाती है।  9ITR कि फुलेरा दूज को साल का सबसे शुभ मुहूर्त क्यों r क्या आप जानते हैं जाता है? ೫೯ दूज, फाल्गुन माह की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और यह प्रेम व वैवाहिक फुलेरा में मधुरता लाने वाला पर्व माना जाता है। इस दिन बिना किसी पंचांग के भी शुभ जीवन कार्यों को संपन्न करना शुभ होता है। राधा ्कृष्ण की पूजा विशेष महत्व रखती है, जिससे दूर होती हैं। प्रेम और दांपत्य जीवन की समस्याएं के साथ होली खेलते हैं और फुलेरा दूज की मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ক্ুলী शुभ पूर्व संध्या पर होली के त्योहार में भाग लेते हैं। पूजन विधि में स्नान के बाद से राधा ्कृष्ण की प्रतिमा सजाएं और पुष्पों ; सुगंधित ' मधुराष्टक का पाठ करें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और किसी भी प्रकार की नकारात्मकता 8r81] - ShareChat
रूद्र चण्डी #पूजन विधि #मंत्र एवं मंत्र जप
पूजन विधि - ShareChat
फुलेरा दूज #शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - फुलेरा द्रूज 19a/ फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार फुलेरा दूज फुलेरा दरूज पूजा का समय फुलेरा दूज बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को तीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे फुलेरा द्रूज 19a/ फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार फुलेरा दूज फुलेरा दरूज पूजा का समय फुलेरा दूज बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को तीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे - ShareChat
फुलेरा दूज #व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - 2026 फुलेरा মুত ब्रज क्षेत्र में, विशेषतः मथुरा ्वृन्दावन में, फुलेरा दूज एक अत्यधिक महत्वपूर्ण पर्व होता है। हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार फुलेरा दूज पर्व, फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है। दूज का पर्व, वसन्त पञ्चमी तथा होली उत्सव के मध्य आता है। अतः इस ক্ুলযা अवसर पर कृष्ण मन्दिरों में विशेष झाँकी अथवा दर्शन आयोजित किये जाते हैं जिसमें भगवान कृष्ण को होली की तैयारी करते हुये दर्शाया जाता है। दूज को फुलैरा दूज के रूप में भी जाना जाता है। ক্তুলযা  455 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फुलेरा दूज का दिन समस्त प्रकार के दोषों  होता है। इसीलिये, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों हेतु, विशेषतः विवाह समारोहों दूज के दिन किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। यद्यपि, यह 33 फुलेरा अवधारणा विवादस्पद विषय है तथा सभी ज्योतिषी इससे सहमत नहीं हैं। यह ঐনসাহয पर प्रकाशित विवाह मुहूर्तों में, सम्भवतः विवाह हो सकता है कि, इस समारोह हेतु फुलेरा दूज को शुभः दिन के रूप में सूचीबद्ध न किया गया हो। 2026 फुलेरा মুত ब्रज क्षेत्र में, विशेषतः मथुरा ्वृन्दावन में, फुलेरा दूज एक अत्यधिक महत्वपूर्ण पर्व होता है। हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार फुलेरा दूज पर्व, फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है। दूज का पर्व, वसन्त पञ्चमी तथा होली उत्सव के मध्य आता है। अतः इस ক্ুলযা अवसर पर कृष्ण मन्दिरों में विशेष झाँकी अथवा दर्शन आयोजित किये जाते हैं जिसमें भगवान कृष्ण को होली की तैयारी करते हुये दर्शाया जाता है। दूज को फुलैरा दूज के रूप में भी जाना जाता है। ক্তুলযা  455 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फुलेरा दूज का दिन समस्त प्रकार के दोषों  होता है। इसीलिये, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों हेतु, विशेषतः विवाह समारोहों दूज के दिन किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। यद्यपि, यह 33 फुलेरा अवधारणा विवादस्पद विषय है तथा सभी ज्योतिषी इससे सहमत नहीं हैं। यह ঐনসাহয पर प्रकाशित विवाह मुहूर्तों में, सम्भवतः विवाह हो सकता है कि, इस समारोह हेतु फुलेरा दूज को शुभः दिन के रूप में सूचीबद्ध न किया गया हो। - ShareChat
श्री राम कृष्ण जयंती #व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - रामकृष्ण जयन्ती 19a फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार रामकृष्ण परमहंस श्रो श्री रामकृष्ण जयन्ती १९०वाँ তন্স বরণশাঁঠ रामकृष्ण परमहंस की रामकृष्ण जयन्ती बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को द्वितीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे रामकृष्ण जयन्ती 19a फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार रामकृष्ण परमहंस श्रो श्री रामकृष्ण जयन्ती १९०वाँ তন্স বরণশাঁঠ रामकृष्ण परमहंस की रामकृष्ण जयन्ती बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को द्वितीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे - ShareChat
श्री राम कृष्ण जयंती #व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - रामकृष्ण जयन्ती २०२६ रामकृष्ण ( १ ८३६ १ ८८६ ई. ) १९वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय सन्त थे। स्वामी रामकृष्ण का जन्म गुरुवार, फरवरी १८, १८३६ को भारत के पश्चिम में हुआ  में हुगली जिले के कमरपुकुर नामक ग्राम নঁশাল থাI ওনব্ধা তন্স বব্ধ अत्यन्त धार्मिक परिवार में हुआ था। कालान्तर में वह, देवी अत्यन्त निर्धन, কিল্ু काली को समर्पित दक्षिणेश्वर काली मन्दिर के पुजारी बन गये थे। वह अपने भक्तों के मध्य रामकृष्ण परमहंस के नाम से लोकप्रिय हैं। उनका पूरा नाम चट्टोपाध्याय था। गदाधर देवी से हुआ  जो कुछ समय पश्चात् उनकी स्वामी रामकृष्ण का विवाह शारदा [, आध्यात्मिक संगिनी बन गयी थीं। स्वामी विवेकानन्द उनके प्रसिद्ध शिष्यों में से एक थे। स्वामी विवेकानन्द ने अपने गुरु के सम्मान में, रामकृष्ण मठ की स्थापना की, जो कि जन॰्कल्याण हेतु कार्यरत है तथा विश्व भर में रामकृष्ण मिशन के रूप में आध्यात्मिक आन्दोलन का प्रचार ्प्रसार करता है। रामकृष्ण मठ एवं मिशन का मुख्यालय बेलुड़ मठ है। हिन्दु चन्द्र कैलेण्डर के अनुसार, श्री रामकृष्ण का जन्म द्वितीया तिथि, फाल्गुन माह, शुक्ल पक्ष, विक्रम सम्वत १८९२ को हुआ था। प्रतिवर्ष सभी रामकृष्ण मठों में हिन्दु चन्द्र कैलेण्डर के अनुसार ही रामकृष्ण जयन्ती मनायी जाती है। रामकृष्ण जयन्ती २०२६ रामकृष्ण ( १ ८३६ १ ८८६ ई. ) १९वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय सन्त थे। स्वामी रामकृष्ण का जन्म गुरुवार, फरवरी १८, १८३६ को भारत के पश्चिम में हुआ  में हुगली जिले के कमरपुकुर नामक ग्राम নঁশাল থাI ওনব্ধা তন্স বব্ধ अत्यन्त धार्मिक परिवार में हुआ था। कालान्तर में वह, देवी अत्यन्त निर्धन, কিল্ু काली को समर्पित दक्षिणेश्वर काली मन्दिर के पुजारी बन गये थे। वह अपने भक्तों के मध्य रामकृष्ण परमहंस के नाम से लोकप्रिय हैं। उनका पूरा नाम चट्टोपाध्याय था। गदाधर देवी से हुआ  जो कुछ समय पश्चात् उनकी स्वामी रामकृष्ण का विवाह शारदा [, आध्यात्मिक संगिनी बन गयी थीं। स्वामी विवेकानन्द उनके प्रसिद्ध शिष्यों में से एक थे। स्वामी विवेकानन्द ने अपने गुरु के सम्मान में, रामकृष्ण मठ की स्थापना की, जो कि जन॰्कल्याण हेतु कार्यरत है तथा विश्व भर में रामकृष्ण मिशन के रूप में आध्यात्मिक आन्दोलन का प्रचार ्प्रसार करता है। रामकृष्ण मठ एवं मिशन का मुख्यालय बेलुड़ मठ है। हिन्दु चन्द्र कैलेण्डर के अनुसार, श्री रामकृष्ण का जन्म द्वितीया तिथि, फाल्गुन माह, शुक्ल पक्ष, विक्रम सम्वत १८९२ को हुआ था। प्रतिवर्ष सभी रामकृष्ण मठों में हिन्दु चन्द्र कैलेण्डर के अनुसार ही रामकृष्ण जयन्ती मनायी जाती है। - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - १७, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष, द्वितीया 19 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ बृहस्पतिवार वाराणसी, भारत योग फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयन्ती, पञ्चक, आडल विडाल योग पञ्चक रहित मुहूर्त एवं उदय लग्न I के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्तू  पञ्चक रहित मुहूर्त आज के दिन के लिए आज कुम्भ - फरवरी १८ को ३०:१३+ बजे से ०७:४४ शुभ मुहूर्त - ०६:३० से 0७:४४ X #=- 07:44=09:12 रोग पञ्चक  07:44#09:12 १  मेष - ०९:१२ से १०:५१ चोर पञ्चक - ०९:१२ 10:51 ४  वृषभ - १०:५१ शुभ मुहूर्त - १०:५१ 12:48 12:48 रोग पञ्चक T ಗg೯- 12*48 : 15.02 12.48 15:02 शुभ मुहूर्त - १५:०२ %  कर्क - १५:०२ से १७:१९ 15:58 & RF 15:58 717:19 17:19 ম 19:33 मृत्यु पञ्चक  1ட 377 434 17.19 19.33 19:33 21:46 कन्या शुभ मुहूर्त - १९:३३ 20:52 ? বুলা - 21:46 24:03+ 20:52 21:46 रज पञ्चक 26:20+ वृश्चेक - २४:०३+ शुभ मुहूर्त - २१:४६ 24:03+ धनु - २६:२०+ 28:24+ 26:20+ 24:03+ ام पञ्चक मकर - २८:२४+ 30:09+ शुभ मुहूर्त - २६:२०+ 28:24+ ಗತಾಪ - 28.24+ 30:09+ 99 ಔ೯ಗ - 30:09+ 30:29+ १७, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष, द्वितीया 19 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ बृहस्पतिवार वाराणसी, भारत योग फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयन्ती, पञ्चक, आडल विडाल योग पञ्चक रहित मुहूर्त एवं उदय लग्न I के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्तू  पञ्चक रहित मुहूर्त आज के दिन के लिए आज कुम्भ - फरवरी १८ को ३०:१३+ बजे से ०७:४४ शुभ मुहूर्त - ०६:३० से 0७:४४ X #=- 07:44=09:12 रोग पञ्चक  07:44#09:12 १  मेष - ०९:१२ से १०:५१ चोर पञ्चक - ०९:१२ 10:51 ४  वृषभ - १०:५१ शुभ मुहूर्त - १०:५१ 12:48 12:48 रोग पञ्चक T ಗg೯- 12*48 : 15.02 12.48 15:02 शुभ मुहूर्त - १५:०२ %  कर्क - १५:०२ से १७:१९ 15:58 & RF 15:58 717:19 17:19 ম 19:33 मृत्यु पञ्चक  1ட 377 434 17.19 19.33 19:33 21:46 कन्या शुभ मुहूर्त - १९:३३ 20:52 ? বুলা - 21:46 24:03+ 20:52 21:46 रज पञ्चक 26:20+ वृश्चेक - २४:०३+ शुभ मुहूर्त - २१:४६ 24:03+ धनु - २६:२०+ 28:24+ 26:20+ 24:03+ ام पञ्चक मकर - २८:२४+ 30:09+ शुभ मुहूर्त - २६:२०+ 28:24+ ಗತಾಪ - 28.24+ 30:09+ 99 ಔ೯ಗ - 30:09+ 30:29+ - ShareChat
दान #पूजन विधि
पूजन विधि - ShareChat