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हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 22-02-26 स्कन्द षष्ठी रविवार शुक्ल षष्ठी तिथि के दिन भगवान शिव और माँ पार्वती सहित कार्तिकेय जी की पूजा अर्चना करने से स्वास्थ्य बाधा, विवाद और कलह से मुक्ति मिलती गौघृत  है। इस दिन कार्तिकेय जी का मेँ साबुत धनिया के बीज डालकर 3 %a] अर्पित करने चाहिए। दीप करना चाहिए, एवं पीले कनेर 22-02-26 स्कन्द षष्ठी रविवार शुक्ल षष्ठी तिथि के दिन भगवान शिव और माँ पार्वती सहित कार्तिकेय जी की पूजा अर्चना करने से स्वास्थ्य बाधा, विवाद और कलह से मुक्ति मिलती गौघृत  है। इस दिन कार्तिकेय जी का मेँ साबुत धनिया के बीज डालकर 3 %a] अर्पित करने चाहिए। दीप करना चाहिए, एवं पीले कनेर - ShareChat
#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3 dl-<ZR २१ , फाल्गुन शुक्ल पक्ष षष्ठी 23 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ सोमवार वाराणसी भारत নিচ मासिक कार्तिगाई रवि योग आडल योग, योग मासिक कार्तिगाई dnchahq.con हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3 dl-<ZR २१ , फाल्गुन शुक्ल पक्ष षष्ठी 23 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ सोमवार वाराणसी भारत নিচ मासिक कार्तिगाई रवि योग आडल योग, योग मासिक कार्तिगाई dnchahq.con - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
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#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - २१, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष षष्ठी 23 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ सोमवार वाराणसी, भारत मासिक कार्तिगाई रवि योग आडल योग विडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त् आज के दिन के लिए पञ्चक रहित मुहूर्त शुभ मुहूर्त - ०६ः२६ से ०७:२८ कुम्भ - फरवरी २२ को २९:५७+ बजे से ०७:२८ X #=-07:28 #08:57 रज पञ्चक - ०७:२८ से 08:५७ 0 77-08:577710;35 08:57 709:09 आग्न पञ्चक 8  ೯೫ - 10.35 : 12.32 शुभ मुहूर्त - ०९:०९ 10:35 1 #97-12:32 10:35 712:32 रज पञ्चक 14:46 शुभ मुहूर्त - १२:३२ 14:46 ७  कर्क - १४ ४६ से १७:०४ चोर पञ्चक - १४:४६ 0 86-17:04719:18 16:33 शुभ मुहूर्त - १६:३३ 1) 17:04 19:18 21:31 कन्या रोग पञ्चक - १७:०४ 19:18 ? 21:31 23:47 तुला  থুণ্ মুমুন - 19:18 # 21:31 वृश्चिक - २३:४७ 26:04+ मृत्यु पञ्चक - २१:३१ 23:47 धनु - २६:०४+ 28:09+ 26:04+ 23:47 पञ्चक ام 29:54+ To7 - 28.09+ शुभ मुहूर्त - २६:०४+ 28:09+ 28:09+ 29:54+ रज पञ्चक शुभ मुहूर्त - २९:५४+ 30:26+ २१, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष षष्ठी 23 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ सोमवार वाराणसी, भारत मासिक कार्तिगाई रवि योग आडल योग विडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त् आज के दिन के लिए पञ्चक रहित मुहूर्त शुभ मुहूर्त - ०६ः२६ से ०७:२८ कुम्भ - फरवरी २२ को २९:५७+ बजे से ०७:२८ X #=-07:28 #08:57 रज पञ्चक - ०७:२८ से 08:५७ 0 77-08:577710;35 08:57 709:09 आग्न पञ्चक 8  ೯೫ - 10.35 : 12.32 शुभ मुहूर्त - ०९:०९ 10:35 1 #97-12:32 10:35 712:32 रज पञ्चक 14:46 शुभ मुहूर्त - १२:३२ 14:46 ७  कर्क - १४ ४६ से १७:०४ चोर पञ्चक - १४:४६ 0 86-17:04719:18 16:33 शुभ मुहूर्त - १६:३३ 1) 17:04 19:18 21:31 कन्या रोग पञ्चक - १७:०४ 19:18 ? 21:31 23:47 तुला  থুণ্ মুমুন - 19:18 # 21:31 वृश्चिक - २३:४७ 26:04+ मृत्यु पञ्चक - २१:३१ 23:47 धनु - २६:०४+ 28:09+ 26:04+ 23:47 पञ्चक ام 29:54+ To7 - 28.09+ शुभ मुहूर्त - २६:०४+ 28:09+ 28:09+ 29:54+ रज पञ्चक शुभ मुहूर्त - २९:५४+ 30:26+ - ShareChat
#मंत्र एवं मंत्र जप
मंत्र एवं मंत्र जप - ३४ँ नमश्चण्डिकायै। मन्त्र जपने की सरल विधि निम्न मन्त्र से देवी का ध्यान एवं पूजन करें॰ ३४० नमस्तेउस्तु महारौद्रे महाघोर - पराक्रमे। महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि। | प्रतिदिन स्नान। शुद्धिकरण करके प्रातः सायं॰   रोरी, सिन्दूर, चन्दन, अक्षत , पुष्प, प्रसाद, जल से श्रद्धा पूर्वक देवी की प्रतिमा का पूजन करें। उन्हें धूप, दीप दिखायें और मन्त्र जप आरंभ कर दें। समयाभाव हो तो शुद्धता पूर्वक  भगवती का मन में ध्यान करके जप करें। भक्तो! उपासना में भक्ति-भाव को प्रधानता होती है। दाहिने हाथ में থনা বন্ন ব্ধী সালা লব্ধং সনিিন বব্চ সালা/ तुलसी  की भी पूजा कर लें। ग्यारह माला जप करें। जपते समय निम्न मन्त्र से माला अविघ्नं कुरु माले त्वं गृह्णामि दक्षिणे करे। 3 जपकाले च सिद्ध्यर्थं प्रसीद मम सिद्धये।। पूर्वाभिमुख ( पूर्व को ओर मुँह करके ) पद्मासन में (आलथी- जप मुद्रां पालथी मारकर) बैठ जायें। फिर दाहिने हाथ की अनामिका और मध्यमा अंगुलि एवं अंगुठे के मध्य माला का एक॰एक मनका ( दाना ) बढ़ाते हुए मन्त्र जप करें। तीन। नौ/ ग्यारह/ सोलह बार/एक माला/दस माला या मन्त्र जप संख्या इससे अधिक यथा साध्य यथा समय। जप के उपरान्त अपना पावन जप देवी को अर्पित करें इस निवेदन के साथ कि हे देवि! आप मेरे जप मन्त्र को स्वीकार करें तथा अपने कृपा प्रसाद ३४ँ नमश्चण्डिकायै। मन्त्र जपने की सरल विधि निम्न मन्त्र से देवी का ध्यान एवं पूजन करें॰ ३४० नमस्तेउस्तु महारौद्रे महाघोर - पराक्रमे। महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि। | प्रतिदिन स्नान। शुद्धिकरण करके प्रातः सायं॰   रोरी, सिन्दूर, चन्दन, अक्षत , पुष्प, प्रसाद, जल से श्रद्धा पूर्वक देवी की प्रतिमा का पूजन करें। उन्हें धूप, दीप दिखायें और मन्त्र जप आरंभ कर दें। समयाभाव हो तो शुद्धता पूर्वक  भगवती का मन में ध्यान करके जप करें। भक्तो! उपासना में भक्ति-भाव को प्रधानता होती है। दाहिने हाथ में থনা বন্ন ব্ধী সালা লব্ধং সনিিন বব্চ সালা/ तुलसी  की भी पूजा कर लें। ग्यारह माला जप करें। जपते समय निम्न मन्त्र से माला अविघ्नं कुरु माले त्वं गृह्णामि दक्षिणे करे। 3 जपकाले च सिद्ध्यर्थं प्रसीद मम सिद्धये।। पूर्वाभिमुख ( पूर्व को ओर मुँह करके ) पद्मासन में (आलथी- जप मुद्रां पालथी मारकर) बैठ जायें। फिर दाहिने हाथ की अनामिका और मध्यमा अंगुलि एवं अंगुठे के मध्य माला का एक॰एक मनका ( दाना ) बढ़ाते हुए मन्त्र जप करें। तीन। नौ/ ग्यारह/ सोलह बार/एक माला/दस माला या मन्त्र जप संख्या इससे अधिक यथा साध्य यथा समय। जप के उपरान्त अपना पावन जप देवी को अर्पित करें इस निवेदन के साथ कि हे देवि! आप मेरे जप मन्त्र को स्वीकार करें तथा अपने कृपा प्रसाद - ShareChat
#उपाय
उपाय - सप्ताह के 7 दिव्य स्नान उपाय शंख को मिलाकर नहाएं उम्र लंबी होती है॰ मन शंत होता নমক মিলাকয নচ্া रुके हुए काम पूरे होते हे इलायची मिलाकर नहाएं बुरा समय जल्दी दूर होता है हल्दी मिलाकर नहाएं भाग्य का उदय होता हे गुलाबजल मिलाकर नहाएं प्रेम , आकर्षण और सौंदर्य में वृद्धि होती है सरसों का तेल शरीर पर लगाकर शनि दोष, बाधाएं दूर फिर नहाएं - सप्ताह के 7 दिव्य स्नान उपाय शंख को मिलाकर नहाएं उम्र लंबी होती है॰ मन शंत होता নমক মিলাকয নচ্া रुके हुए काम पूरे होते हे इलायची मिलाकर नहाएं बुरा समय जल्दी दूर होता है हल्दी मिलाकर नहाएं भाग्य का उदय होता हे गुलाबजल मिलाकर नहाएं प्रेम , आकर्षण और सौंदर्य में वृद्धि होती है सरसों का तेल शरीर पर लगाकर शनि दोष, बाधाएं दूर फिर नहाएं - - ShareChat
#उपाय
उपाय - हर रोटी कुछ कहृती है जानो कौन॰सी रोटी क्या करती है चलो गुरकुल की और 0 गेढ्नुे की रोटी - वजन वढाए, रुगर वढाए ! ज्वार की रोटी ~ वजन कंट्रोल , राुगर कंट्रोल ! वाजरे की रोटी - सर्दी से ववाए, राुगर वैलैरा करे ! रागी की रोटी ~ हड़्डेयों मजवूत करे , हाई BP संमाले ! मक्की की रोटी - एनर्जों वढ़ाए, ड्स्वुनिटी तुस्ट करे ! वेसन की रोटी - मसल गेन के लिए वेरट ! जो की रोटी - कोलेस्ट्रोल घटाए, पेट भरा रखे ! ओटस की रोटी ~ फैट लोस मे मदद, दिल का हितैसी ! पोमण से भरपूर ! मल्टीग्रेन रोटी - पावन  सुथारे, चावल की रोटी - ग्त्वुटेन फ्री , हलकी और आसान ! 0 कुद्रट्र की रोटी ~ व्रत मे वाकल दे, राुगर कंट्रोल करे ! मिंयाड़ै की रोटी - ठंडक दे, एसिडिएी ्मे राहत ! सोयावीन की रोटी - हाई प्रोटौन , मराल्ग्स केलिए वेरट ! रोटी - वलड् शुगर रलो बदाए, पेट भरे ! चना आटा अमररेय (राजगीरा) रोटी ~ आयरन र केतशिवम से भरपूर ! रोहत चाहिएतो रोन रोटी वदलो , आदत नहीं ! हर रोटी कुछ कहृती है जानो कौन॰सी रोटी क्या करती है चलो गुरकुल की और 0 गेढ्नुे की रोटी - वजन वढाए, रुगर वढाए ! ज्वार की रोटी ~ वजन कंट्रोल , राुगर कंट्रोल ! वाजरे की रोटी - सर्दी से ववाए, राुगर वैलैरा करे ! रागी की रोटी ~ हड़्डेयों मजवूत करे , हाई BP संमाले ! मक्की की रोटी - एनर्जों वढ़ाए, ड्स्वुनिटी तुस्ट करे ! वेसन की रोटी - मसल गेन के लिए वेरट ! जो की रोटी - कोलेस्ट्रोल घटाए, पेट भरा रखे ! ओटस की रोटी ~ फैट लोस मे मदद, दिल का हितैसी ! पोमण से भरपूर ! मल्टीग्रेन रोटी - पावन  सुथारे, चावल की रोटी - ग्त्वुटेन फ्री , हलकी और आसान ! 0 कुद्रट्र की रोटी ~ व्रत मे वाकल दे, राुगर कंट्रोल करे ! मिंयाड़ै की रोटी - ठंडक दे, एसिडिएी ्मे राहत ! सोयावीन की रोटी - हाई प्रोटौन , मराल्ग्स केलिए वेरट ! रोटी - वलड् शुगर रलो बदाए, पेट भरे ! चना आटा अमररेय (राजगीरा) रोटी ~ आयरन र केतशिवम से भरपूर ! रोहत चाहिएतो रोन रोटी वदलो , आदत नहीं ! - ShareChat
#उपाय
उपाय - ऊँ सनातन धर्म के सोलह संस्कार (16 Sanskar of Hindu Dharma) सीमन्तोन्नयन संस्कार संस्कार जातकर्म पुंसवन संस्कार गर्भाधान संस्कार संतान प्राप्ति हेतु शुद्ध गर्भस्थ शिशु के गर्भवती माता की मानसिक शिशु के जन्म के समय शारीरिक शांति हेतु किया जाने वाला संस्कार स्वास्थ्य व संरक्षण हेतु भाव व संकल्प एव निष्क्रमण संस्कार (মুঁভন) अन्नप्राशन संस्कार चूड़ाकर्म ( नामकरण संस्कार R शिशु का शुभ शिशु को प्रथम बार शिशु को प्रथम बार घर से बाहर ले जाना নালী ব্ধা সথম ম্দো अन्न ग्रहण कराना नामकरण कर्णवेध संस्कार वेदारंभ संस्कार उपनयन संस्कार समावर्तन संस्कार शिक्षा पूर्ण कर गृहस्थ कान छेदन संस्कार विद्या आरंभ एवं वेद एवं शास्त्र जीवन की तैयारी अध्ययन का प्रारंभ का प्रवेश ब्रह्मचर्य '2,43 विवाह संस्कार अंत्येष्टि संस्कार वानप्रस्थ संस्कार संन्यास संस्कार पूर्ण वैराग्य व मोक्ष धर्मपूर्वक गृहस्थ सांसारिक मोह से देह त्याग के पश्चात मार्ग की ओर गमन जीवन का आरंभ धीरे-धीरे विरक्ति अंतिम संस्कार ऊँ सनातन धर्म के सोलह संस्कार (16 Sanskar of Hindu Dharma) सीमन्तोन्नयन संस्कार संस्कार जातकर्म पुंसवन संस्कार गर्भाधान संस्कार संतान प्राप्ति हेतु शुद्ध गर्भस्थ शिशु के गर्भवती माता की मानसिक शिशु के जन्म के समय शारीरिक शांति हेतु किया जाने वाला संस्कार स्वास्थ्य व संरक्षण हेतु भाव व संकल्प एव निष्क्रमण संस्कार (মুঁভন) अन्नप्राशन संस्कार चूड़ाकर्म ( नामकरण संस्कार R शिशु का शुभ शिशु को प्रथम बार शिशु को प्रथम बार घर से बाहर ले जाना নালী ব্ধা সথম ম্দো अन्न ग्रहण कराना नामकरण कर्णवेध संस्कार वेदारंभ संस्कार उपनयन संस्कार समावर्तन संस्कार शिक्षा पूर्ण कर गृहस्थ कान छेदन संस्कार विद्या आरंभ एवं वेद एवं शास्त्र जीवन की तैयारी अध्ययन का प्रारंभ का प्रवेश ब्रह्मचर्य '2,43 विवाह संस्कार अंत्येष्टि संस्कार वानप्रस्थ संस्कार संन्यास संस्कार पूर्ण वैराग्य व मोक्ष धर्मपूर्वक गृहस्थ सांसारिक मोह से देह त्याग के पश्चात मार्ग की ओर गमन जीवन का आरंभ धीरे-धीरे विरक्ति अंतिम संस्कार - ShareChat
#मंत्र एवं मंत्र जप
मंत्र एवं मंत्र जप - Niortir 10!3 ೩್' 0 ;021غ 0! ३३ केसेड देवी - देवता ಹ २ अश्विनी कुमार १२ आदित्य ৪ নমু ११ रुद्र अग्नि १नासत्य विवस्वान २ दश्र 2. ওযসা पृथ्वी 2. बहुरूप ag 3. সিন্ন न्रयम्बक अंतरिक्ष शास्त्रों में   इंद्र ४. आपराजित कुछ वरुण ५. आदित्य और प्रजापति के स्थान वृषाकपि  5. 319T पर दो अश्विनी ঘরা कुमारों 6. এানূ ६. शम्भु भी ক্রী कोटि 33 ७. कपर्दिन इंद्र T देवताओं में सम्मिलित নৈন ८. नक्षत्र त्वष्टा किया गया है। 9٠ ؟٩٢ १. मृगव्याध  १०. सर्व 10. ~ ११. पार्जन्य कपाली 11 विष्णु  12 प्रकार या श्रेणी होता है, न कि करोड़।   इसलिए, ३३ कोटि সথ कोटि शब्द का देवी - देवता का अर्थ ३३ करोड़ नहीं , बल्कि ३३ प्रकार के देवी - देवता है। Niortir 10!3 ೩್' 0 ;021غ 0! ३३ केसेड देवी - देवता ಹ २ अश्विनी कुमार १२ आदित्य ৪ নমু ११ रुद्र अग्नि १नासत्य विवस्वान २ दश्र 2. ওযসা पृथ्वी 2. बहुरूप ag 3. সিন্ন न्रयम्बक अंतरिक्ष शास्त्रों में   इंद्र ४. आपराजित कुछ वरुण ५. आदित्य और प्रजापति के स्थान वृषाकपि  5. 319T पर दो अश्विनी ঘরা कुमारों 6. এানূ ६. शम्भु भी ক্রী कोटि 33 ७. कपर्दिन इंद्र T देवताओं में सम्मिलित নৈন ८. नक्षत्र त्वष्टा किया गया है। 9٠ ؟٩٢ १. मृगव्याध  १०. सर्व 10. ~ ११. पार्जन्य कपाली 11 विष्णु  12 प्रकार या श्रेणी होता है, न कि करोड़।   इसलिए, ३३ कोटि সথ कोटि शब्द का देवी - देवता का अर्थ ३३ करोड़ नहीं , बल्कि ३३ प्रकार के देवी - देवता है। - ShareChat