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हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
तंत्रोक्त देवी सुक्तम् #मंत्र एवं मंत्र जप #पूजन विधि
मंत्र एवं मंत्र जप - तंत्रोक्त देवी सूक्त ননী ঐন্য মন্ভান্থ হিনারয মনন নম:! भदार्य नियताः नम Hece qurcl; ಊ c 19 I शिदार्य नमो नित्याय गार्य धाा्दर्य नमा नमः ! ज्यात्स्नार्य चन्दुरूपिण्यं सुखार्य सततं नमः २ মির্য ক্কু্মী নমী নম: [ கா் பuai वृद्धर्य  र्ऋत्य भूभूतां " হণেuিয ন নমী নম: 13 II लप्म्य दुर्गपारा्य सारार्य सर्वकारिण्य।  द्वरगार्य धगार्य  तशव ಖನ' कृष्णार्य  सतत Fಭ: 10 I সনিমীম্মানিহন্রয় ননহনহখ লমী' নম: !  नमा जगत्पतिळाय देव्य कृत्य «٧ ٩؛ ١٧ ١ देवी सर्वभृतेष्ु विष्णुमायेलि शब्दिता।  नमस्वस्थ नमस्तस्य नमस्तस्य नमो नमः ६ या देवीं सर्वभतषु चेतनेत्यभिष्ीयते। नमस्लस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमो नमः ७ । या देवीं सर्वभूतेष् बुद्धिरूपेण सस्थिता। Tt THT TR Tt T: ICI दवी सर्वभूतष्रु निदारूपण   संस्थिता।  লমহনহয নমহনহয নমহনহয নমী TA: Ie I নী মনমূনম্ভ মুঘাহ্দত মস্থিনা! नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्नस्य नमा नमः ० ।l या देवी सर्वभूतेषुच्छयारूपेण  सं्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা নম; 199 | देवी सर्वभूतष शक्ति रूपेण   संस्थिला।  নমহনহযর নমহথর নমহনহয নমী নম; I9211 देवीं सर्वभृवषु तृष्णारूपण संस्थिता।  =ன = =் = =: 1931 देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपण   संस्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।९v || देवी सर्वभृतषु जातिरूपण   संस्थिला।  नमस्तर्स्य नमस्तर्स्य नमा नमस्तरस्य  F[; 194 /| देवीं सर्वभृतष लज्जारूपण   संश्थिला ।  नमस्तस्य नमस्तम्य नमस्लस्य नमा F: I9E I| देवी सर्वभतेषु शान्तिरूपण  संस्थिता ।  = = HஎI 1 নম; I99 I यादेवीं सर्वभूतेष श्रद्धारूपण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमा नमः I२८ । देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা লম: I9P I देवी सर्वभूतेष लक्ष्मीरूपण संस्थिता।  नमस्त्स्थे नमस्तस्य नमा नमसलस्य 'F: 130 | दवीं सर्वभूतषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।२७ | देवीं सर्वभूतष्रु स्मृतिरूपेण संस्थिता ा नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तसय नमो : 132 I देवी सर्वभतेष्र दयारूपेण  संस्थिता।  नमस्तर्स्थ नमस्तस्थ नमा नमः २३ । नमस्त्स्य  देवीं सर्वभूतेष वुष्टिरूपण  संस्थिता ! नमस्तस्य निमस्तस्यं निमस्तर्स्य निमो नमः २ि० । देवीं सर्वभूतेष् मातृरूपण संश्थिता।  नमस्तसय नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः २५| देवी सर्वभृतेष्र भान्तिरूपेण   संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तरस्य नमो नमः २६ | नमस्तस्य इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेष या।  भूतेष सततं तस्य व्याप्तिदेरव्य नमौ नमः २७ | चिदिरूपण या कृत्सनमतदयाप्य सियिना नगत।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्त्स्य नमा नमः २८।  दिनष  स्तरुता सुररः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुर्द्रेण  सावता হ্মানি  कशेत सा निः शभहनुरीश्चरी भृद्राण्यभिहन्दु चापदः ] २९ | चाद्धतदत्यलापित रस्माभिरीशा " যা মামান सररर्नमस्यते।  याच स्मृता तत्षणमव हन्ति नः सर्वापदा भक्ति विनममृर्तिभिः १३०[  तंत्रोक्त देवी सूक्त ননী ঐন্য মন্ভান্থ হিনারয মনন নম:! भदार्य नियताः नम Hece qurcl; ಊ c 19 I शिदार्य नमो नित्याय गार्य धाा्दर्य नमा नमः ! ज्यात्स्नार्य चन्दुरूपिण्यं सुखार्य सततं नमः २ মির্য ক্কু্মী নমী নম: [ கா் பuai वृद्धर्य  र्ऋत्य भूभूतां " হণেuিয ন নমী নম: 13 II लप्म्य दुर्गपारा्य सारार्य सर्वकारिण्य।  द्वरगार्य धगार्य  तशव ಖನ' कृष्णार्य  सतत Fಭ: 10 I সনিমীম্মানিহন্রয় ননহনহখ লমী' নম: !  नमा जगत्पतिळाय देव्य कृत्य «٧ ٩؛ ١٧ ١ देवी सर्वभृतेष्ु विष्णुमायेलि शब्दिता।  नमस्वस्थ नमस्तस्य नमस्तस्य नमो नमः ६ या देवीं सर्वभतषु चेतनेत्यभिष्ीयते। नमस्लस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमो नमः ७ । या देवीं सर्वभूतेष् बुद्धिरूपेण सस्थिता। Tt THT TR Tt T: ICI दवी सर्वभूतष्रु निदारूपण   संस्थिता।  লমহনহয নমহনহয নমহনহয নমী TA: Ie I নী মনমূনম্ভ মুঘাহ্দত মস্থিনা! नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्नस्य नमा नमः ० ।l या देवी सर्वभूतेषुच्छयारूपेण  सं्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা নম; 199 | देवी सर्वभूतष शक्ति रूपेण   संस्थिला।  নমহনহযর নমহথর নমহনহয নমী নম; I9211 देवीं सर्वभृवषु तृष्णारूपण संस्थिता।  =ன = =் = =: 1931 देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपण   संस्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।९v || देवी सर्वभृतषु जातिरूपण   संस्थिला।  नमस्तर्स्य नमस्तर्स्य नमा नमस्तरस्य  F[; 194 /| देवीं सर्वभृतष लज्जारूपण   संश्थिला ।  नमस्तस्य नमस्तम्य नमस्लस्य नमा F: I9E I| देवी सर्वभतेषु शान्तिरूपण  संस्थिता ।  = = HஎI 1 নম; I99 I यादेवीं सर्वभूतेष श्रद्धारूपण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमा नमः I२८ । देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা লম: I9P I देवी सर्वभूतेष लक्ष्मीरूपण संस्थिता।  नमस्त्स्थे नमस्तस्य नमा नमसलस्य 'F: 130 | दवीं सर्वभूतषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।२७ | देवीं सर्वभूतष्रु स्मृतिरूपेण संस्थिता ा नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तसय नमो : 132 I देवी सर्वभतेष्र दयारूपेण  संस्थिता।  नमस्तर्स्थ नमस्तस्थ नमा नमः २३ । नमस्त्स्य  देवीं सर्वभूतेष वुष्टिरूपण  संस्थिता ! नमस्तस्य निमस्तस्यं निमस्तर्स्य निमो नमः २ि० । देवीं सर्वभूतेष् मातृरूपण संश्थिता।  नमस्तसय नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः २५| देवी सर्वभृतेष्र भान्तिरूपेण   संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तरस्य नमो नमः २६ | नमस्तस्य इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेष या।  भूतेष सततं तस्य व्याप्तिदेरव्य नमौ नमः २७ | चिदिरूपण या कृत्सनमतदयाप्य सियिना नगत।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्त्स्य नमा नमः २८।  दिनष  स्तरुता सुररः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुर्द्रेण  सावता হ্মানি  कशेत सा निः शभहनुरीश्चरी भृद्राण्यभिहन्दु चापदः ] २९ | चाद्धतदत्यलापित रस्माभिरीशा " যা মামান सररर्नमस्यते।  याच स्मृता तत्षणमव हन्ति नः सर्वापदा भक्ति विनममृर्तिभिः १३०[ - ShareChat
#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3 dl-<ZR १८, फाल्गुन शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुकवार वाराणसी, भारत सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रवि योग, विडाल योग भद्ा पञ्चक गण्ड मूल इस दिन कोई महत्वपूर्ण 1 त्यौहार  7గ్గTగ్గే हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3 dl-<ZR १८, फाल्गुन शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुकवार वाराणसी, भारत सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रवि योग, विडाल योग भद्ा पञ्चक गण्ड मूल इस दिन कोई महत्वपूर्ण 1 त्यौहार  7గ్గTగ్గే - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
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#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - १८, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुक्रवार वाराणसी, भारत भद्रा, पञ्चक गण्ड मूल सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रबि योग, बिडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त  पञ्चक रहित मुहूर्त आज के दिन के लिए M   कुम्भ - फरवरी १९ को ३०ः०९+ बजे से ०७:४०  মূন্তু পত্বব্ধ - 06:29 স 07:40  ) 77-07:40709:08 07:40 709:08 4or १२   मेष - ०९:०८ से १०:४७ शुभ मुहूर्त - ०९:०८ 10:47 ४ 10:47 12:44 वृषभ - १०:४७ स १२४४ पञ्चक ] নিথুন - 12:44 7 14:58  12:44 14:38 पञ्चक থু্স মুমুন - 14:38 স 14:58 %  कर्क - १४:५८ से १७:१६ 14:58717:16 0 86-17:16 719;29 रज पञ्चक शुभ मुहूर्त - १७:१६ से १९२९ T) 19:29 21:42 কন্মা चोर पञ्चक - १९:२९ 20:07 ? 23:59 বুলা - 21:42 शुभ मुहूर्त - २०:०७ 21.42 वृश्चिक - २३:५९ 26:16+ रोग पञ्चक 23:59 21:42 43-26:16+ 28:20+ शुभ मुहूर्त - २३:५९ 26:16+ 1p मकर - २८:२०+ 30:05+ पञ्चक - २६:१६+ 28:20+ पञ्चक - २८:२०+ 30:05+ शुभ मुहूर्त - ३०:०५+ 30:28+ १८, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुक्रवार वाराणसी, भारत भद्रा, पञ्चक गण्ड मूल सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रबि योग, बिडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त  पञ्चक रहित मुहूर्त आज के दिन के लिए M   कुम्भ - फरवरी १९ को ३०ः०९+ बजे से ०७:४०  মূন্তু পত্বব্ধ - 06:29 স 07:40  ) 77-07:40709:08 07:40 709:08 4or १२   मेष - ०९:०८ से १०:४७ शुभ मुहूर्त - ०९:०८ 10:47 ४ 10:47 12:44 वृषभ - १०:४७ स १२४४ पञ्चक ] নিথুন - 12:44 7 14:58  12:44 14:38 पञ्चक থু্স মুমুন - 14:38 স 14:58 %  कर्क - १४:५८ से १७:१६ 14:58717:16 0 86-17:16 719;29 रज पञ्चक शुभ मुहूर्त - १७:१६ से १९२९ T) 19:29 21:42 কন্মা चोर पञ्चक - १९:२९ 20:07 ? 23:59 বুলা - 21:42 शुभ मुहूर्त - २०:०७ 21.42 वृश्चिक - २३:५९ 26:16+ रोग पञ्चक 23:59 21:42 43-26:16+ 28:20+ शुभ मुहूर्त - २३:५९ 26:16+ 1p मकर - २८:२०+ 30:05+ पञ्चक - २६:१६+ 28:20+ पञ्चक - २८:२०+ 30:05+ शुभ मुहूर्त - ३०:०५+ 30:28+ - ShareChat
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 19-02-26 श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती गुरुवार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन श्री रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती मनाई जाती है।श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। , इन्होनें : इन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त है, जो समाधि की अंतिम अवस्था है। हैं कि श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती क्यों मनाई जाती है? यह महोत्सव न केवल क्या आप जानते उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति है, बल्कि प्रेम और एकता का भी प्रतीक है। 1836 # క3II ' में गहन  श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म, सत्य सिखाए हैं। था, इन्होनें सरल शब्दों इनका मानना था कि सभी धर्म एक ही दिव्य लक्ष्य तक पहुँचते हैं। वे अक्सर कहते थे, "ईश्वर एक है, लेकिन उसके नाम अनेक हैं।" बेलूर मठ में इस पवित्र दिन पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। सुबह ४:३० बजे से आरंभ কীন বালী आरती से लेकर देर रात तक भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम होते हैं। मंगला श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त थे, इन्होनें अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। स्वामी जी के बचपन का नाम गदाधर था, कुशाग्र बुद्धि होने के कारण स्वामी जी को पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद् गीता कण्ठस्थ हो गई थी। श्री रामकृष्ण जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था, प्रेम और सेवा के माध्यम से हम उनके आदर्शों को जीवित रख सकते हैं। 19-02-26 श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती गुरुवार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन श्री रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती मनाई जाती है।श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। , इन्होनें : इन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त है, जो समाधि की अंतिम अवस्था है। हैं कि श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती क्यों मनाई जाती है? यह महोत्सव न केवल क्या आप जानते उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति है, बल्कि प्रेम और एकता का भी प्रतीक है। 1836 # క3II ' में गहन  श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म, सत्य सिखाए हैं। था, इन्होनें सरल शब्दों इनका मानना था कि सभी धर्म एक ही दिव्य लक्ष्य तक पहुँचते हैं। वे अक्सर कहते थे, "ईश्वर एक है, लेकिन उसके नाम अनेक हैं।" बेलूर मठ में इस पवित्र दिन पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। सुबह ४:३० बजे से आरंभ কীন বালী आरती से लेकर देर रात तक भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम होते हैं। मंगला श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त थे, इन्होनें अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। स्वामी जी के बचपन का नाम गदाधर था, कुशाग्र बुद्धि होने के कारण स्वामी जी को पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद् गीता कण्ठस्थ हो गई थी। श्री रामकृष्ण जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था, प्रेम और सेवा के माध्यम से हम उनके आदर्शों को जीवित रख सकते हैं। - ShareChat
फुलेरा दूज #शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - सरोवर 19-02-26 फुलैरा दूज गुरुवार फाल्गुन माह की द्वितीया को मनायी जाने वाली फुलैरा दूज, को इस त्यौहार को फूलों से रंगोली होली आगमन का प्रतीक माना जाता है।  बनाई जाती है तथा विशेष रूप से श्री राधाकृष्ण का " फूलों से करके उनकी पूजा की जाती है।  9ITR कि फुलेरा दूज को साल का सबसे शुभ मुहूर्त क्यों r क्या आप जानते हैं जाता है? ೫೯ दूज, फाल्गुन माह की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और यह प्रेम व वैवाहिक फुलेरा में मधुरता लाने वाला पर्व माना जाता है। इस दिन बिना किसी पंचांग के भी शुभ जीवन कार्यों को संपन्न करना शुभ होता है। राधा ्कृष्ण की पूजा विशेष महत्व रखती है, जिससे दूर होती हैं। प्रेम और दांपत्य जीवन की समस्याएं के साथ होली खेलते हैं और फुलेरा दूज की मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ক্ুলী शुभ पूर्व संध्या पर होली के त्योहार में भाग लेते हैं। पूजन विधि में स्नान के बाद से राधा ्कृष्ण की प्रतिमा सजाएं और पुष्पों ; सुगंधित ' मधुराष्टक का पाठ करें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और किसी भी प्रकार की नकारात्मकता 8r81] सरोवर 19-02-26 फुलैरा दूज गुरुवार फाल्गुन माह की द्वितीया को मनायी जाने वाली फुलैरा दूज, को इस त्यौहार को फूलों से रंगोली होली आगमन का प्रतीक माना जाता है।  बनाई जाती है तथा विशेष रूप से श्री राधाकृष्ण का " फूलों से करके उनकी पूजा की जाती है।  9ITR कि फुलेरा दूज को साल का सबसे शुभ मुहूर्त क्यों r क्या आप जानते हैं जाता है? ೫೯ दूज, फाल्गुन माह की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है और यह प्रेम व वैवाहिक फुलेरा में मधुरता लाने वाला पर्व माना जाता है। इस दिन बिना किसी पंचांग के भी शुभ जीवन कार्यों को संपन्न करना शुभ होता है। राधा ्कृष्ण की पूजा विशेष महत्व रखती है, जिससे दूर होती हैं। प्रेम और दांपत्य जीवन की समस्याएं के साथ होली खेलते हैं और फुलेरा दूज की मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ক্ুলী शुभ पूर्व संध्या पर होली के त्योहार में भाग लेते हैं। पूजन विधि में स्नान के बाद से राधा ्कृष्ण की प्रतिमा सजाएं और पुष्पों ; सुगंधित ' मधुराष्टक का पाठ करें। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और किसी भी प्रकार की नकारात्मकता 8r81] - ShareChat
रूद्र चण्डी #पूजन विधि #मंत्र एवं मंत्र जप
पूजन विधि - ShareChat
फुलेरा दूज #शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - फुलेरा द्रूज 19a/ फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार फुलेरा दूज फुलेरा दरूज पूजा का समय फुलेरा दूज बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को तीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे फुलेरा द्रूज 19a/ फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार फुलेरा दूज फुलेरा दरूज पूजा का समय फुलेरा दूज बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को तीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे - ShareChat
फुलेरा दूज #व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - 2026 फुलेरा মুত ब्रज क्षेत्र में, विशेषतः मथुरा ्वृन्दावन में, फुलेरा दूज एक अत्यधिक महत्वपूर्ण पर्व होता है। हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार फुलेरा दूज पर्व, फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है। दूज का पर्व, वसन्त पञ्चमी तथा होली उत्सव के मध्य आता है। अतः इस ক্ুলযা अवसर पर कृष्ण मन्दिरों में विशेष झाँकी अथवा दर्शन आयोजित किये जाते हैं जिसमें भगवान कृष्ण को होली की तैयारी करते हुये दर्शाया जाता है। दूज को फुलैरा दूज के रूप में भी जाना जाता है। ক্তুলযা  455 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फुलेरा दूज का दिन समस्त प्रकार के दोषों  होता है। इसीलिये, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों हेतु, विशेषतः विवाह समारोहों दूज के दिन किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। यद्यपि, यह 33 फुलेरा अवधारणा विवादस्पद विषय है तथा सभी ज्योतिषी इससे सहमत नहीं हैं। यह ঐনসাহয पर प्रकाशित विवाह मुहूर्तों में, सम्भवतः विवाह हो सकता है कि, इस समारोह हेतु फुलेरा दूज को शुभः दिन के रूप में सूचीबद्ध न किया गया हो। 2026 फुलेरा মুত ब्रज क्षेत्र में, विशेषतः मथुरा ्वृन्दावन में, फुलेरा दूज एक अत्यधिक महत्वपूर्ण पर्व होता है। हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार फुलेरा दूज पर्व, फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है। दूज का पर्व, वसन्त पञ्चमी तथा होली उत्सव के मध्य आता है। अतः इस ক্ুলযা अवसर पर कृष्ण मन्दिरों में विशेष झाँकी अथवा दर्शन आयोजित किये जाते हैं जिसमें भगवान कृष्ण को होली की तैयारी करते हुये दर्शाया जाता है। दूज को फुलैरा दूज के रूप में भी जाना जाता है। ক্তুলযা  455 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फुलेरा दूज का दिन समस्त प्रकार के दोषों  होता है। इसीलिये, सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों हेतु, विशेषतः विवाह समारोहों दूज के दिन किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। यद्यपि, यह 33 फुलेरा अवधारणा विवादस्पद विषय है तथा सभी ज्योतिषी इससे सहमत नहीं हैं। यह ঐনসাহয पर प्रकाशित विवाह मुहूर्तों में, सम्भवतः विवाह हो सकता है कि, इस समारोह हेतु फुलेरा दूज को शुभः दिन के रूप में सूचीबद्ध न किया गया हो। - ShareChat
श्री राम कृष्ण जयंती #व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - रामकृष्ण जयन्ती 19a फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार रामकृष्ण परमहंस श्रो श्री रामकृष्ण जयन्ती १९०वाँ তন্স বরণশাঁঠ रामकृष्ण परमहंस की रामकृष्ण जयन्ती बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को द्वितीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे रामकृष्ण जयन्ती 19a फरवरी २०२६ Thursday गुरुवार रामकृष्ण परमहंस श्रो श्री रामकृष्ण जयन्ती १९०वाँ তন্স বরণশাঁঠ रामकृष्ण परमहंस की रामकृष्ण जयन्ती बृहस्पतिवार, फरवरी १९, २०२६ को द्वितीया तिथि प्रारम्भ फरवरी १८, २०२६ को 1६:५७ बजे द्वितीया तिथि समाप्त फरवरी १९, २०२६ को 1 ५:५८ बजे - ShareChat