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हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
#होलिका दहन
होलिका दहन - होलिका दहन आज, जानें शुभ मुहूर्त होलिका दहन आज 2 मार्च को सूर्यास्त के बाद से शुरू होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त आधी रात तक रहेगा। परंपरा के मुताबिक शाम को सूरज वक्त होली की पूजा करते हैं और डूबते उसके बाद होली जलाते हैं। होली जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजे से शुरू हो रहा है जो रात में करीब १२ बजे तक रहेगा। इस दौरान भद्रा का अशुभ समय भी नहीं होगा। होलिका दहन की राख शरीर पर लगाने से सेहत से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं। होलिका दहन आज, जानें शुभ मुहूर्त होलिका दहन आज 2 मार्च को सूर्यास्त के बाद से शुरू होगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त आधी रात तक रहेगा। परंपरा के मुताबिक शाम को सूरज वक्त होली की पूजा करते हैं और डूबते उसके बाद होली जलाते हैं। होली जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजे से शुरू हो रहा है जो रात में करीब १२ बजे तक रहेगा। इस दौरान भद्रा का अशुभ समय भी नहीं होगा। होलिका दहन की राख शरीर पर लगाने से सेहत से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं। - ShareChat
#होली
होली - इस शहर में जली थी पहली होलिका, देश में ऐसे शुरू हुई होली UP के हरदोई को हिरण्यकश्यप की नगरी के नाम से जाना इसकी राजधानी का नाम हरि द्रोही था, क्योंकि वह जाता था। विष्णु विष्णु को नहीं मानता था। उसका बेटा प्रहलाद भगवान उसने अपनी बहन होलिका की गोद ಞ' भक्त था, जिसे मारने के में बिठाकर अग्नि में जलाया। होलिका जल गई, लेकिन प्रहलाद बच गया। हिरण्यकश्यप का वध भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर किया। इसके बाद लोगों ने होलिका की राख से वहां होली मनाई थी। इस शहर में जली थी पहली होलिका, देश में ऐसे शुरू हुई होली UP के हरदोई को हिरण्यकश्यप की नगरी के नाम से जाना इसकी राजधानी का नाम हरि द्रोही था, क्योंकि वह जाता था। विष्णु विष्णु को नहीं मानता था। उसका बेटा प्रहलाद भगवान उसने अपनी बहन होलिका की गोद ಞ' भक्त था, जिसे मारने के में बिठाकर अग्नि में जलाया। होलिका जल गई, लेकिन प्रहलाद बच गया। हिरण्यकश्यप का वध भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर किया। इसके बाद लोगों ने होलिका की राख से वहां होली मनाई थी। - ShareChat
#उपाय
उपाय - होलिका दहन ৪্ুল হীরলী होलिका दहन में करें इन वस्तुओं का प्रयोग लौंगः सुख ्शांति मिलती है। नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है उपले (गोबर के कंडे): जीवन से नकारात्मकता व बाधाएं दूर होती हैं हल्दी की गांठः विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं हरी इलायचीः व्यापार और आर्थिक लाभ मिलता है चंदनः घर में सुख समृद्धि और शांति का वातावरण बना रहता 8 बताशेः सुख ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है गुड़ः आर्थिक परेशानियों में कमी आती है और कर्ज से राहत मिलने के रास्ते बनते हैं होलिका दहन ৪্ুল হীরলী होलिका दहन में करें इन वस्तुओं का प्रयोग लौंगः सुख ्शांति मिलती है। नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है उपले (गोबर के कंडे): जीवन से नकारात्मकता व बाधाएं दूर होती हैं हल्दी की गांठः विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं हरी इलायचीः व्यापार और आर्थिक लाभ मिलता है चंदनः घर में सुख समृद्धि और शांति का वातावरण बना रहता 8 बताशेः सुख ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है गुड़ः आर्थिक परेशानियों में कमी आती है और कर्ज से राहत मिलने के रास्ते बनते हैं - ShareChat
#होली
होली - लिए बालों को रंगों के नुकसान से बचाने के अजमाएं ये तरीके बालों में सरसों या नारियल का तेल लगा लें। ये बालों में लेयर क्रिएट कर देता है, जिससे रंग अंदर तक नहीं जा पाता अगर आपके बाल लंबे हैं तो भूलकर भी इन्हें खुला न छोड़ें। खुले बालों में रंग ज्यादा अब्जॉर्ब होते हैं fag बाल में अगर कलर चढ़ गया है तो उसे निकालने के शैंपू का इस्तेमाल न करें बार्बार पहले सिर को सामान्य पानी से धोएं फिर हर्बल शैंपू का इस्तेमाल करें लिए बालों को रंगों के नुकसान से बचाने के अजमाएं ये तरीके बालों में सरसों या नारियल का तेल लगा लें। ये बालों में लेयर क्रिएट कर देता है, जिससे रंग अंदर तक नहीं जा पाता अगर आपके बाल लंबे हैं तो भूलकर भी इन्हें खुला न छोड़ें। खुले बालों में रंग ज्यादा अब्जॉर्ब होते हैं fag बाल में अगर कलर चढ़ गया है तो उसे निकालने के शैंपू का इस्तेमाल न करें बार्बार पहले सिर को सामान्य पानी से धोएं फिर हर्बल शैंपू का इस्तेमाल करें - ShareChat
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 03-03-26 चैतन्य महाप्रभु जयन्ती मंगलवार चैतन्य महाप्रभु वैष्णव धर्म के भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। चैतन्य महाप्रभु के গনুযাযী; इस पूर्णिमा को गौरव पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं और यह चैतन्य महाप्रभु की जयंती के रूप में मनाया जाता है।  श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिवस फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, इसे गौरा पूर्णिमा भी कहा जाता है। चैतन्य महाप्रभु, जिन्हें गौरांग के नाम से भी जाना जाता है, सोलहवीं शताब्दी में पूर्वी भारत के महान समाज सुधारक और भक्तिकाल के प्रमुख संत रहे। उनका जन्म विक्रम संवत १४८६ में बंगाल के नवद्वीप में हुआ था। उन्होंने वैष्णव धर्म के भक्ति योग का प्रचार किया और अपनी स्वर्णिम आभा के कारण गौर हरि के रूप में विख्यात हुए। चैतन्य महाप्रभु ने अपने समय के समाज को गहन रूप से प्रभावित किया। उनके अनुयायी इस दिन को गौरव पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। 03-03-26 चैतन्य महाप्रभु जयन्ती मंगलवार चैतन्य महाप्रभु वैष्णव धर्म के भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। चैतन्य महाप्रभु के গনুযাযী; इस पूर्णिमा को गौरव पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं और यह चैतन्य महाप्रभु की जयंती के रूप में मनाया जाता है।  श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिवस फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है, इसे गौरा पूर्णिमा भी कहा जाता है। चैतन्य महाप्रभु, जिन्हें गौरांग के नाम से भी जाना जाता है, सोलहवीं शताब्दी में पूर्वी भारत के महान समाज सुधारक और भक्तिकाल के प्रमुख संत रहे। उनका जन्म विक्रम संवत १४८६ में बंगाल के नवद्वीप में हुआ था। उन्होंने वैष्णव धर्म के भक्ति योग का प्रचार किया और अपनी स्वर्णिम आभा के कारण गौर हरि के रूप में विख्यात हुए। चैतन्य महाप्रभु ने अपने समय के समाज को गहन रूप से प्रभावित किया। उनके अनुयायी इस दिन को गौरव पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - श्री चैतन्य जयन्ती ३वाँ ম 2026 Tuesday मंगलवार चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु जयन्ती चैतन्य महाप्रभु की ५४०वाँ जन्म वर्षगाँठ चैतन्य  महाप्रभु जयन्ती मंगलवार, मार्च ३, २०२६ মাব 02, 2026 ক্ধী 17:55 ব্রতী নিথি সাংত্ম पूर्णिमा নিথি সমাদ সাব 03, 2026 ক্রী 17:07 ব্রতী ؟٢٠٢ श्री चैतन्य जयन्ती ३वाँ ম 2026 Tuesday मंगलवार चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु जयन्ती चैतन्य महाप्रभु की ५४०वाँ जन्म वर्षगाँठ चैतन्य  महाप्रभु जयन्ती मंगलवार, मार्च ३, २०२६ মাব 02, 2026 ক্ধী 17:55 ব্রতী নিথি সাংত্ম पूर्णिमा নিথি সমাদ সাব 03, 2026 ক্রী 17:07 ব্রতী ؟٢٠٢ - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - महा लक्ष्मी जयन्ती ३वाँ मार्च २०२६ Tuesday मंगलवार ঐ৭ী লঃসী जयन्ती समय লঃসী लक्ष्मी जयन्ती मंगलवार, मार्च ३, २०२६ को पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ HT 02, 2026 & 17.55 w5 पूर्णिमा तिथि समाप्त मार्च ०३, २०२६ को 1७:०७ बजे महा लक्ष्मी जयन्ती ३वाँ मार्च २०२६ Tuesday मंगलवार ঐ৭ী লঃসী जयन्ती समय লঃসী लक्ष्मी जयन्ती मंगलवार, मार्च ३, २०२६ को पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ HT 02, 2026 & 17.55 w5 पूर्णिमा तिथि समाप्त मार्च ०३, २०२६ को 1७:०७ बजे - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - पूर्णिमा वसन्त ३वाँ मार्च २०२६ Tuesday मंगलवार के दौरान राधा संग होली खेलते हुए भगवान कृष्ण पूर्णिमा q पूर्णिमा वसन्त समय पूर्णिमा मंगलवार, मार्च ३, २०२६ को वसन्त पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ मार्च ०२, २०२६ को १७:५५ बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त মার্ঘ 03, 2026 ক্রী 17:07 বরতী पूर्णिमा वसन्त ३वाँ मार्च २०२६ Tuesday मंगलवार के दौरान राधा संग होली खेलते हुए भगवान कृष्ण पूर्णिमा q पूर्णिमा वसन्त समय पूर्णिमा मंगलवार, मार्च ३, २०२६ को वसन्त पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ मार्च ०२, २०२६ को १७:५५ बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त মার্ঘ 03, 2026 ক্রী 17:07 বরতী - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - मासी मागम 3r T  2026 Tuesday मंगलवार मासा मागम मासी मागम मुहूर्तं मासी मागम मंगलवार, मार्च ३, २०२६ को मार्च ०२, २०२६ को ०७५१ बजे मागम् नक्षत्रम् प्रारम्भ मार्च ०३, २०२६ को ०७३१ बजे मागम् नक्षत्रम् समाप्त मासी मागम 3r T  2026 Tuesday मंगलवार मासा मागम मासी मागम मुहूर्तं मासी मागम मंगलवार, मार्च ३, २०२६ को मार्च ०२, २०२६ को ०७५१ बजे मागम् नक्षत्रम् प्रारम्भ मार्च ०३, २०२६ को ०७३१ बजे मागम् नक्षत्रम् समाप्त - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - अट्टुकल पोंगल Sai T  2026 Tuesday मंगलवार अट्टुकल पोंगल के दौरान पोंगल पकवान तैयार करती महिलायें अट्टुकल पोंगल समय अट्टुकल पोंगल मंगलवार, मार्च ३, २०२६ मार्च ०३, २०२६ को ०७३१ बजे पूरम् नक्षत्रम् प्रारम्भ মাঘ 04, 2026 ব্রী 07:39 ব্রতী पूरम् नक्षत्रम् समाप्त वास्तविक दिन में एक दिन का अन्तर हो सकता है। * मन्दिर के उत्सव स्थानीय कैलेण्डर पर निर्भर करते हैं, जिसके पश्चात् मन्दिर के अधिकारी तथा कभी ्कभी मन्दिर के ज्योतिषियों पर निर्भर करते हैं । अट्टुकल पोंगल Sai T  2026 Tuesday मंगलवार अट्टुकल पोंगल के दौरान पोंगल पकवान तैयार करती महिलायें अट्टुकल पोंगल समय अट्टुकल पोंगल मंगलवार, मार्च ३, २०२६ मार्च ०३, २०२६ को ०७३१ बजे पूरम् नक्षत्रम् प्रारम्भ মাঘ 04, 2026 ব্রী 07:39 ব্রতী पूरम् नक्षत्रम् समाप्त वास्तविक दिन में एक दिन का अन्तर हो सकता है। * मन्दिर के उत्सव स्थानीय कैलेण्डर पर निर्भर करते हैं, जिसके पश्चात् मन्दिर के अधिकारी तथा कभी ्कभी मन्दिर के ज्योतिषियों पर निर्भर करते हैं । - ShareChat