wbeauty
ShareChat
click to see wallet page
@241107786
241107786
wbeauty
@241107786
हिन्दू संस्कृति और अध्यात्म की जानकारियाँ
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 21-02-26 ढुण्ढिराज गणेश - বনুর্থী হানিনাব फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुण्ढिराज चतुर्थी एवं मनोरथ चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन धन-धान्य की प्राप्ति और सम्मान में वृद्धि के लिये भगवान गणेश को दुर्वा या दूब अर्पित की जाती हैं। २१ फरवरी को ढुण्ढिराज : मनाई जाएगी | चतुर्थी : एवं मनोरथ चतुर्थी के नाम फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुण्ढिराज चतुर्थी 1 से जाना जाता है। I में वृद्धि के लिये भगवान गणेश को दुर्वा या इस दिन धन-्धान्य की प्राप्ति और सम्मान दूब अर्पित की जाती हैं। जी की कृपा से व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है और आपके सभी कार्य बिना किसी गणेश विघ्न, बाधा के पूर्ण हो जाते हैं। ೫೯ / ৯ থুনল ' २० फरवरी को ' ०२ बजकर ३७ मिनट पर फाल्गुन माह पक्ष की चतुर्थी आरंभ होगी। वहीं २१ फरवरी को दोपहर ०१ बजे फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन होगा। ऐसे में २१ फरवरी को चतुर्थी मनाई UIUTfTI ढुण्ढिराज 21-02-26 ढुण्ढिराज गणेश - বনুর্থী হানিনাব फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुण्ढिराज चतुर्थी एवं मनोरथ चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन धन-धान्य की प्राप्ति और सम्मान में वृद्धि के लिये भगवान गणेश को दुर्वा या दूब अर्पित की जाती हैं। २१ फरवरी को ढुण्ढिराज : मनाई जाएगी | चतुर्थी : एवं मनोरथ चतुर्थी के नाम फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को ढुण्ढिराज चतुर्थी 1 से जाना जाता है। I में वृद्धि के लिये भगवान गणेश को दुर्वा या इस दिन धन-्धान्य की प्राप्ति और सम्मान दूब अर्पित की जाती हैं। जी की कृपा से व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है और आपके सभी कार्य बिना किसी गणेश विघ्न, बाधा के पूर्ण हो जाते हैं। ೫೯ / ৯ থুনল ' २० फरवरी को ' ०२ बजकर ३७ मिनट पर फाल्गुन माह पक्ष की चतुर्थी आरंभ होगी। वहीं २१ फरवरी को दोपहर ०१ बजे फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का समापन होगा। ऐसे में २१ फरवरी को चतुर्थी मनाई UIUTfTI ढुण्ढिराज - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - বনুর্থীী ढुण्ढिराज का समय शनिवार, फरवरी २१ , २०२६ को বনুথী  ण्ढराज मध्याह्न मुहूर्त : ೩ತ೫  11:03 13:00 मिनट्स अवधि - ०१ घण्टा ५७ एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय फरवरी २० को २०:४६ बजे 14:38 ०६ घण्टे ०८ मिनट्स अवधि वर्जित चन्द्रदर्शन का समय 08:36 21.48 ٨٠٤٩ 13 qUZ 12 अवधि तिथि प्रारम्भ फरवरी २०, २०२६ को १४:३८ बजे चतुर्थी  तिथि समाप्त फरवरी २१ , २०२६ को 1 ३:०० बजे বনুর্থী বনুর্থীী ढुण्ढिराज का समय शनिवार, फरवरी २१ , २०२६ को বনুথী  ण्ढराज मध्याह्न मुहूर्त : ೩ತ೫  11:03 13:00 मिनट्स अवधि - ०१ घण्टा ५७ एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय फरवरी २० को २०:४६ बजे 14:38 ०६ घण्टे ०८ मिनट्स अवधि वर्जित चन्द्रदर्शन का समय 08:36 21.48 ٨٠٤٩ 13 qUZ 12 अवधि तिथि प्रारम्भ फरवरी २०, २०२६ को १४:३८ बजे चतुर्थी  तिथि समाप्त फरवरी २१ , २०२६ को 1 ३:०० बजे বনুর্থী - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - १९, फाल्गुन Panchong  पक्ष चतुर्थी शुक्ल 21 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ থনিনাৎ वाराणसी, भारत चतुर्थी भद्रा, पञ्चक गण्ड मूल रवि योग பm रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए पञ्चक रहित मुहूर्तृू के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त आज कुम्भ - फरवरी २० को ३०:०५+ बजे से 0७:३६ 06:28 707:36 रज पञ्चक ) #7-07:36 709:05 থুল্স মুচুন - 07:36 স 09:05  १२   मेष - ०९:०५ से १०:४३ शुभ मुहूर्त - ०९:०५ 10:43 ४   वृषभ - १०:४३ से १२:४० 10:43 12:40 रज पञ्चक    मिथुन - १२४० से १४:५४ शुभ मुहूर्त - १२:४० 13:00 चोर पञ्चक - १३:०० 14:54 %  कर्क - १४:५४ से १७:१२ 0 86-17:12719:26 14:54 717:12 शुभ मुहूर्त - रोग पञ्चक - १७:१२ से १९:०७ T) 19:26 21:38 कन्या शुभ मुहूर्त - १९:०७ ? 19:26 तुला - २१:३८ 23:55 मृत्यु पञ्चक - १९:२६ 21:38 वृश्चिक - २३:५५ 26:12+ 21:38 23:55 आग्न पञ्चक 28:17+ 43-26:12+ থুল্ মুচুন - 23:55 26:12+ 1 30:01+ मकर - २8:१७+ रज पञ्चक - २६:१२+ 28:17+ থুল্স মুচুন - 28:174 30:01+ चोर पञ्चक 30:01+ 30:27+ १९, फाल्गुन Panchong  पक्ष चतुर्थी शुक्ल 21 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ থনিনাৎ वाराणसी, भारत चतुर्थी भद्रा, पञ्चक गण्ड मूल रवि योग பm रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए पञ्चक रहित मुहूर्तृू के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त आज कुम्भ - फरवरी २० को ३०:०५+ बजे से 0७:३६ 06:28 707:36 रज पञ्चक ) #7-07:36 709:05 থুল্স মুচুন - 07:36 স 09:05  १२   मेष - ०९:०५ से १०:४३ शुभ मुहूर्त - ०९:०५ 10:43 ४   वृषभ - १०:४३ से १२:४० 10:43 12:40 रज पञ्चक    मिथुन - १२४० से १४:५४ शुभ मुहूर्त - १२:४० 13:00 चोर पञ्चक - १३:०० 14:54 %  कर्क - १४:५४ से १७:१२ 0 86-17:12719:26 14:54 717:12 शुभ मुहूर्त - रोग पञ्चक - १७:१२ से १९:०७ T) 19:26 21:38 कन्या शुभ मुहूर्त - १९:०७ ? 19:26 तुला - २१:३८ 23:55 मृत्यु पञ्चक - १९:२६ 21:38 वृश्चिक - २३:५५ 26:12+ 21:38 23:55 आग्न पञ्चक 28:17+ 43-26:12+ থুল্ মুচুন - 23:55 26:12+ 1 30:01+ मकर - २8:१७+ रज पञ्चक - २६:१२+ 28:17+ থুল্স মুচুন - 28:174 30:01+ चोर पञ्चक 30:01+ 30:27+ - ShareChat
सूर्य कवचम् #मंत्र एवं मंत्र जप
मंत्र एवं मंत्र जप - ShareChat
तंत्रोक्त देवी सुक्तम् #मंत्र एवं मंत्र जप #पूजन विधि
मंत्र एवं मंत्र जप - तंत्रोक्त देवी सूक्त ননী ঐন্য মন্ভান্থ হিনারয মনন নম:! भदार्य नियताः नम Hece qurcl; ಊ c 19 I शिदार्य नमो नित्याय गार्य धाा्दर्य नमा नमः ! ज्यात्स्नार्य चन्दुरूपिण्यं सुखार्य सततं नमः २ মির্য ক্কু্মী নমী নম: [ கா் பuai वृद्धर्य  र्ऋत्य भूभूतां " হণেuিয ন নমী নম: 13 II लप्म्य दुर्गपारा्य सारार्य सर्वकारिण्य।  द्वरगार्य धगार्य  तशव ಖನ' कृष्णार्य  सतत Fಭ: 10 I সনিমীম্মানিহন্রয় ননহনহখ লমী' নম: !  नमा जगत्पतिळाय देव्य कृत्य «٧ ٩؛ ١٧ ١ देवी सर्वभृतेष्ु विष्णुमायेलि शब्दिता।  नमस्वस्थ नमस्तस्य नमस्तस्य नमो नमः ६ या देवीं सर्वभतषु चेतनेत्यभिष्ीयते। नमस्लस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमो नमः ७ । या देवीं सर्वभूतेष् बुद्धिरूपेण सस्थिता। Tt THT TR Tt T: ICI दवी सर्वभूतष्रु निदारूपण   संस्थिता।  লমহনহয নমহনহয নমহনহয নমী TA: Ie I নী মনমূনম্ভ মুঘাহ্দত মস্থিনা! नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्नस्य नमा नमः ० ।l या देवी सर्वभूतेषुच्छयारूपेण  सं्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা নম; 199 | देवी सर्वभूतष शक्ति रूपेण   संस्थिला।  নমহনহযর নমহথর নমহনহয নমী নম; I9211 देवीं सर्वभृवषु तृष्णारूपण संस्थिता।  =ன = =் = =: 1931 देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपण   संस्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।९v || देवी सर्वभृतषु जातिरूपण   संस्थिला।  नमस्तर्स्य नमस्तर्स्य नमा नमस्तरस्य  F[; 194 /| देवीं सर्वभृतष लज्जारूपण   संश्थिला ।  नमस्तस्य नमस्तम्य नमस्लस्य नमा F: I9E I| देवी सर्वभतेषु शान्तिरूपण  संस्थिता ।  = = HஎI 1 নম; I99 I यादेवीं सर्वभूतेष श्रद्धारूपण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमा नमः I२८ । देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা লম: I9P I देवी सर्वभूतेष लक्ष्मीरूपण संस्थिता।  नमस्त्स्थे नमस्तस्य नमा नमसलस्य 'F: 130 | दवीं सर्वभूतषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।२७ | देवीं सर्वभूतष्रु स्मृतिरूपेण संस्थिता ा नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तसय नमो : 132 I देवी सर्वभतेष्र दयारूपेण  संस्थिता।  नमस्तर्स्थ नमस्तस्थ नमा नमः २३ । नमस्त्स्य  देवीं सर्वभूतेष वुष्टिरूपण  संस्थिता ! नमस्तस्य निमस्तस्यं निमस्तर्स्य निमो नमः २ि० । देवीं सर्वभूतेष् मातृरूपण संश्थिता।  नमस्तसय नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः २५| देवी सर्वभृतेष्र भान्तिरूपेण   संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तरस्य नमो नमः २६ | नमस्तस्य इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेष या।  भूतेष सततं तस्य व्याप्तिदेरव्य नमौ नमः २७ | चिदिरूपण या कृत्सनमतदयाप्य सियिना नगत।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्त्स्य नमा नमः २८।  दिनष  स्तरुता सुररः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुर्द्रेण  सावता হ্মানি  कशेत सा निः शभहनुरीश्चरी भृद्राण्यभिहन्दु चापदः ] २९ | चाद्धतदत्यलापित रस्माभिरीशा " যা মামান सररर्नमस्यते।  याच स्मृता तत्षणमव हन्ति नः सर्वापदा भक्ति विनममृर्तिभिः १३०[  तंत्रोक्त देवी सूक्त ননী ঐন্য মন্ভান্থ হিনারয মনন নম:! भदार्य नियताः नम Hece qurcl; ಊ c 19 I शिदार्य नमो नित्याय गार्य धाा्दर्य नमा नमः ! ज्यात्स्नार्य चन्दुरूपिण्यं सुखार्य सततं नमः २ মির্য ক্কু্মী নমী নম: [ கா் பuai वृद्धर्य  र्ऋत्य भूभूतां " হণেuিয ন নমী নম: 13 II लप्म्य दुर्गपारा्य सारार्य सर्वकारिण्य।  द्वरगार्य धगार्य  तशव ಖನ' कृष्णार्य  सतत Fಭ: 10 I সনিমীম্মানিহন্রয় ননহনহখ লমী' নম: !  नमा जगत्पतिळाय देव्य कृत्य «٧ ٩؛ ١٧ ١ देवी सर्वभृतेष्ु विष्णुमायेलि शब्दिता।  नमस्वस्थ नमस्तस्य नमस्तस्य नमो नमः ६ या देवीं सर्वभतषु चेतनेत्यभिष्ीयते। नमस्लस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमो नमः ७ । या देवीं सर्वभूतेष् बुद्धिरूपेण सस्थिता। Tt THT TR Tt T: ICI दवी सर्वभूतष्रु निदारूपण   संस्थिता।  লমহনহয নমহনহয নমহনহয নমী TA: Ie I নী মনমূনম্ভ মুঘাহ্দত মস্থিনা! नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्नस्य नमा नमः ० ।l या देवी सर्वभूतेषुच्छयारूपेण  सं्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা নম; 199 | देवी सर्वभूतष शक्ति रूपेण   संस्थिला।  নমহনহযর নমহথর নমহনহয নমী নম; I9211 देवीं सर्वभृवषु तृष्णारूपण संस्थिता।  =ன = =் = =: 1931 देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपण   संस्शिता। नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।९v || देवी सर्वभृतषु जातिरूपण   संस्थिला।  नमस्तर्स्य नमस्तर्स्य नमा नमस्तरस्य  F[; 194 /| देवीं सर्वभृतष लज्जारूपण   संश्थिला ।  नमस्तस्य नमस्तम्य नमस्लस्य नमा F: I9E I| देवी सर्वभतेषु शान्तिरूपण  संस्थिता ।  = = HஎI 1 নম; I99 I यादेवीं सर्वभूतेष श्रद्धारूपण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्यं नमस्तर्स्य नमा नमः I२८ । देवी सर्वभूतषु कान्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य নমা লম: I9P I देवी सर्वभूतेष लक्ष्मीरूपण संस्थिता।  नमस्त्स्थे नमस्तस्य नमा नमसलस्य 'F: 130 | दवीं सर्वभूतषु वृत्तिरूपेण संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः ।२७ | देवीं सर्वभूतष्रु स्मृतिरूपेण संस्थिता ा नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्तसय नमो : 132 I देवी सर्वभतेष्र दयारूपेण  संस्थिता।  नमस्तर्स्थ नमस्तस्थ नमा नमः २३ । नमस्त्स्य  देवीं सर्वभूतेष वुष्टिरूपण  संस्थिता ! नमस्तस्य निमस्तस्यं निमस्तर्स्य निमो नमः २ि० । देवीं सर्वभूतेष् मातृरूपण संश्थिता।  नमस्तसय नमस्तस्य नमस्तस्य नमा नमः २५| देवी सर्वभृतेष्र भान्तिरूपेण   संस्थिता।  नमस्तस्य नमस्तरस्य नमो नमः २६ | नमस्तस्य इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेष या।  भूतेष सततं तस्य व्याप्तिदेरव्य नमौ नमः २७ | चिदिरूपण या कृत्सनमतदयाप्य सियिना नगत।  नमस्तस्य नमस्तस्य नमस्त्स्य नमा नमः २८।  दिनष  स्तरुता सुररः पूर्वमभीष्टसंश्रयात्तथा सुर्द्रेण  सावता হ্মানি  कशेत सा निः शभहनुरीश्चरी भृद्राण्यभिहन्दु चापदः ] २९ | चाद्धतदत्यलापित रस्माभिरीशा " যা মামান सररर्नमस्यते।  याच स्मृता तत्षणमव हन्ति नः सर्वापदा भक्ति विनममृर्तिभिः १३०[ - ShareChat
#व्रत एवं त्योहार
व्रत एवं त्योहार - हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3 dl-<ZR १८, फाल्गुन शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुकवार वाराणसी, भारत सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रवि योग, विडाल योग भद्ा पञ्चक गण्ड मूल इस दिन कोई महत्वपूर्ण 1 त्यौहार  7గ్గTగ్గే हिन्दुओं के व्रत,पर्व 3 dl-<ZR १८, फाल्गुन शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुकवार वाराणसी, भारत सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रवि योग, विडाल योग भद्ा पञ्चक गण्ड मूल इस दिन कोई महत्वपूर्ण 1 त्यौहार  7గ్గTగ్గే - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - ShareChat
#शुभ मुहूर्त
शुभ मुहूर्त - १८, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुक्रवार वाराणसी, भारत भद्रा, पञ्चक गण्ड मूल सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रबि योग, बिडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त  पञ्चक रहित मुहूर्त आज के दिन के लिए M   कुम्भ - फरवरी १९ को ३०ः०९+ बजे से ०७:४०  মূন্তু পত্বব্ধ - 06:29 স 07:40  ) 77-07:40709:08 07:40 709:08 4or १२   मेष - ०९:०८ से १०:४७ शुभ मुहूर्त - ०९:०८ 10:47 ४ 10:47 12:44 वृषभ - १०:४७ स १२४४ पञ्चक ] নিথুন - 12:44 7 14:58  12:44 14:38 पञ्चक থু্স মুমুন - 14:38 স 14:58 %  कर्क - १४:५८ से १७:१६ 14:58717:16 0 86-17:16 719;29 रज पञ्चक शुभ मुहूर्त - १७:१६ से १९२९ T) 19:29 21:42 কন্মা चोर पञ्चक - १९:२९ 20:07 ? 23:59 বুলা - 21:42 शुभ मुहूर्त - २०:०७ 21.42 वृश्चिक - २३:५९ 26:16+ रोग पञ्चक 23:59 21:42 43-26:16+ 28:20+ शुभ मुहूर्त - २३:५९ 26:16+ 1p मकर - २८:२०+ 30:05+ पञ्चक - २६:१६+ 28:20+ पञ्चक - २८:२०+ 30:05+ शुभ मुहूर्त - ३०:०५+ 30:28+ १८, फाल्गुन Panchang शुक्ल पक्ष तृतीया  20 २०८२ कालयुक्त, विक्रम सम्वत फरवरी २०२६ शुक्रवार वाराणसी, भारत भद्रा, पञ्चक गण्ड मूल सर्वार्थ सिद्धियोग अमृत सिद्धि योग रबि योग, बिडाल योग रहित मुहूर्त एवं उदय-लग्न पञ्चक आज के दिन के लिए उदय लग्न मुहूर्त  पञ्चक रहित मुहूर्त आज के दिन के लिए M   कुम्भ - फरवरी १९ को ३०ः०९+ बजे से ०७:४०  মূন্তু পত্বব্ধ - 06:29 স 07:40  ) 77-07:40709:08 07:40 709:08 4or १२   मेष - ०९:०८ से १०:४७ शुभ मुहूर्त - ०९:०८ 10:47 ४ 10:47 12:44 वृषभ - १०:४७ स १२४४ पञ्चक ] নিথুন - 12:44 7 14:58  12:44 14:38 पञ्चक থু্স মুমুন - 14:38 স 14:58 %  कर्क - १४:५८ से १७:१६ 14:58717:16 0 86-17:16 719;29 रज पञ्चक शुभ मुहूर्त - १७:१६ से १९२९ T) 19:29 21:42 কন্মা चोर पञ्चक - १९:२९ 20:07 ? 23:59 বুলা - 21:42 शुभ मुहूर्त - २०:०७ 21.42 वृश्चिक - २३:५९ 26:16+ रोग पञ्चक 23:59 21:42 43-26:16+ 28:20+ शुभ मुहूर्त - २३:५९ 26:16+ 1p मकर - २८:२०+ 30:05+ पञ्चक - २६:१६+ 28:20+ पञ्चक - २८:२०+ 30:05+ शुभ मुहूर्त - ३०:०५+ 30:28+ - ShareChat
#शुभ मुहूर्त #पूजन विधि
शुभ मुहूर्त - 19-02-26 श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती गुरुवार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन श्री रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती मनाई जाती है।श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। , इन्होनें : इन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त है, जो समाधि की अंतिम अवस्था है। हैं कि श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती क्यों मनाई जाती है? यह महोत्सव न केवल क्या आप जानते उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति है, बल्कि प्रेम और एकता का भी प्रतीक है। 1836 # క3II ' में गहन  श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म, सत्य सिखाए हैं। था, इन्होनें सरल शब्दों इनका मानना था कि सभी धर्म एक ही दिव्य लक्ष्य तक पहुँचते हैं। वे अक्सर कहते थे, "ईश्वर एक है, लेकिन उसके नाम अनेक हैं।" बेलूर मठ में इस पवित्र दिन पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। सुबह ४:३० बजे से आरंभ কীন বালী आरती से लेकर देर रात तक भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम होते हैं। मंगला श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त थे, इन्होनें अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। स्वामी जी के बचपन का नाम गदाधर था, कुशाग्र बुद्धि होने के कारण स्वामी जी को पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद् गीता कण्ठस्थ हो गई थी। श्री रामकृष्ण जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था, प्रेम और सेवा के माध्यम से हम उनके आदर्शों को जीवित रख सकते हैं। 19-02-26 श्री रामकृष्ण परमहंस जयन्ती गुरुवार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन श्री रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती मनाई जाती है।श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। , इन्होनें : इन्हें परमहंस की उपाधि प्राप्त है, जो समाधि की अंतिम अवस्था है। हैं कि श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती क्यों मनाई जाती है? यह महोत्सव न केवल क्या आप जानते उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति है, बल्कि प्रेम और एकता का भी प्रतीक है। 1836 # క3II ' में गहन  श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म, सत्य सिखाए हैं। था, इन्होनें सरल शब्दों इनका मानना था कि सभी धर्म एक ही दिव्य लक्ष्य तक पहुँचते हैं। वे अक्सर कहते थे, "ईश्वर एक है, लेकिन उसके नाम अनेक हैं।" बेलूर मठ में इस पवित्र दिन पर विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। सुबह ४:३० बजे से आरंभ কীন বালী आरती से लेकर देर रात तक भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम होते हैं। मंगला श्री रामकृष्ण परमहंस माँ काली के अनन्य भक्त थे, इन्होनें अपना ज्यादातर जीवन एक परम भक्त की तरह ही बिताया था। स्वामी जी के बचपन का नाम गदाधर था, कुशाग्र बुद्धि होने के कारण स्वामी जी को पुराण, रामायण, महाभारत और भगवद् गीता कण्ठस्थ हो गई थी। श्री रामकृष्ण जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था, प्रेम और सेवा के माध्यम से हम उनके आदर्शों को जीवित रख सकते हैं। - ShareChat