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।। ॐ ।। धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासादक्षिणायनम्। तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्यनिवर्तते ॥ #❤️जीवन की सीख #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 जिसके प्रयाणकाल में धुआँ फैल रहा हो, योगाग्नि हो (अग्नि यज्ञ-प्रक्रिया में पायी जानेवाली अग्नि का स्वरूप है।) किन्तु धुएँ से आच्छादित हो, अविद्या की रात्रि हो, अँधेरा हो, कृष्णपक्ष का चन्द्रमा क्षीण हो रहा हो, कालिमा का बाहुल्य हो, ष‌ड्विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर) से युक्त दक्षिणायन अर्थात् बहिर्मुखी हो (जो परमात्मा के प्रवेश से अभी बाहर है।) उस योगी को पुनः जन्म लेना पड़ता है। तो क्या शरीर के साथ उस योगी की साधना नष्ट हो जाती है? इस पर योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं-"यथार्थ गीता"
❤️जीवन की सीख - 3 भगवान और सद्गुरु Il3 Il रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासादक्षिणायनम्। धूमो - योगेश्वर तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्यनिवर्तते Il भगवाज श्रीकृष्ण जिसके प्रयाणकाल में धुआँ फैल रहा हो, योगाग्नि हो (अग्नि यज्ञ प्रक्रिया में पायी जानेवाली अग्नि का स्वरूप है। ) किन्तु धुएँ से आच्छादित हो, अविद्या की रात्रि हो, अँधेरा हो, कृष्णपक्ष का चन्द्रमा क्षीण हो रहा हो, कालिमा का बाहुल्य हो षड्विकारों (काम , क्रोध लोभ मोहः मद ओर मत्सर ) से युक्त दक्षिणायन अर्थात् बहिर्मुखी हो (जो परमात्मा के प्रवेश से अभी बाहरहे।) उस योगी को पुनः जन्म लेना पड़ता है। तो क्या शरीर के साथ उस योगी की साधना नष्ट हो जाती है? कहते हैं-"यथार्थ गीता " সীকৃষ্ণা? इस पर योगेश्वर पूज्य स्वामी श्री परमानन्द जी महाराज ( परमहंस जी ) षयथार्थ गीता  कै प्रणैता स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज 3 भगवान और सद्गुरु Il3 Il रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासादक्षिणायनम्। धूमो - योगेश्वर तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्यनिवर्तते Il भगवाज श्रीकृष्ण जिसके प्रयाणकाल में धुआँ फैल रहा हो, योगाग्नि हो (अग्नि यज्ञ प्रक्रिया में पायी जानेवाली अग्नि का स्वरूप है। ) किन्तु धुएँ से आच्छादित हो, अविद्या की रात्रि हो, अँधेरा हो, कृष्णपक्ष का चन्द्रमा क्षीण हो रहा हो, कालिमा का बाहुल्य हो षड्विकारों (काम , क्रोध लोभ मोहः मद ओर मत्सर ) से युक्त दक्षिणायन अर्थात् बहिर्मुखी हो (जो परमात्मा के प्रवेश से अभी बाहरहे।) उस योगी को पुनः जन्म लेना पड़ता है। तो क्या शरीर के साथ उस योगी की साधना नष्ट हो जाती है? कहते हैं-"यथार्थ गीता " সীকৃষ্ণা? इस पर योगेश्वर पूज्य स्वामी श्री परमानन्द जी महाराज ( परमहंस जी ) षयथार्थ गीता  कै प्रणैता स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज - ShareChat