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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें गजल ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में अभी मोहब्बत नई्नई है हैं पलकें दिलों में उल्फत नईन्नई है ख़ामोश लब हैं झुकी अभी न हमको सुकूं मिलेगा अभी न आएगी नींद तुमको अभी तो धड़केगा दिल ज्यादा अभी ये चाहत नई नई है ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है बहार का आज पहला दिन है चलो चमन में टहल के आएं फ़ज़ां में खुशबू नयी नयी है गुलों पे रंगत रंगत नईननई है ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई ्नई है जो खानदानी रईस हैं वो मिज़ा रखते हैं नरम अपना है तुम्हारी दौलत नई ्नई है तुम्हारा लहज़ा बता रहा ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नईनई है सा कुदरत ने क्या नवाजा कि आके बैठे हैं पहली सफ़ में जरा शोहरत ` अभी से उड़ने लगे हवा में अभी तो ٦؟ ٦٤٤ ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है बमों की बरसात हो रही है पुराने जांबाज़ सो रहे हैं को कर रहा वो जिसकी ताकत नईननई है दुनिया Jm ' ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है Motivationat Videos App Want खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें गजल ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में अभी मोहब्बत नई्नई है हैं पलकें दिलों में उल्फत नईन्नई है ख़ामोश लब हैं झुकी अभी न हमको सुकूं मिलेगा अभी न आएगी नींद तुमको अभी तो धड़केगा दिल ज्यादा अभी ये चाहत नई नई है ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है बहार का आज पहला दिन है चलो चमन में टहल के आएं फ़ज़ां में खुशबू नयी नयी है गुलों पे रंगत रंगत नईननई है ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई ्नई है जो खानदानी रईस हैं वो मिज़ा रखते हैं नरम अपना है तुम्हारी दौलत नई ्नई है तुम्हारा लहज़ा बता रहा ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नईनई है सा कुदरत ने क्या नवाजा कि आके बैठे हैं पहली सफ़ में जरा शोहरत ` अभी से उड़ने लगे हवा में अभी तो ٦؟ ٦٤٤ ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई-नई है बमों की बरसात हो रही है पुराने जांबाज़ सो रहे हैं को कर रहा वो जिसकी ताकत नईननई है दुनिया Jm ' ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है Motivationat Videos App Want - ShareChat