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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - कलयुग की सच्चाई "ये कलियुग है यहाँ सगा भी सगा नहीं होता जिनसे होती है ज्यादा आस जो दिखते हैं अपने और ख़ास जिनपर होता है अति-विश्वास वही पहनाते है भरोसे को क़फ़न और करते है रिश्तोंकी दफन घबराइए नहीं यही तो खासियत है कलियुग की भले ही दिखते हो पास पास रहते हों साथ साथ पर यहाँ अपने ही देते हैं अपर्नों को वनवास" कलयुग की सच्चाई "ये कलियुग है यहाँ सगा भी सगा नहीं होता जिनसे होती है ज्यादा आस जो दिखते हैं अपने और ख़ास जिनपर होता है अति-विश्वास वही पहनाते है भरोसे को क़फ़न और करते है रिश्तोंकी दफन घबराइए नहीं यही तो खासियत है कलियुग की भले ही दिखते हो पास पास रहते हों साथ साथ पर यहाँ अपने ही देते हैं अपर्नों को वनवास" - ShareChat