क्षर अक्षर विज्ञान है क्षर में वायु है जो विकार ग्रस्त है विषय के प्रकार को बुद्धि में व्यक्त करती है जिसे लोक दर्शन में गुण और गान कहते हैं अक्षर इससे जगत के समस्त विषय जन्म लेते हैं इसीलिए यह अक्षर है अक्ष पर संग्रहीत करने पर यह भूतकाल कहलाता है भूतकाल इसलिए कहते हैं क्योंकि यह संग्रहित भू पर तत्व ज्ञान को ही करता है भविष्य भूत भूत की छाया है इसीलिए भविष्य में भी यह तत्व विज्ञान सतत रहता है दृष्टि जगत में यह क्षय है क्षेत्र यज्ञ है आध्यात्मिक में यह अक्षय है स्वयं के कार्य क्रिया और कर्म अंत में भाग्य स्वरूप आत्मा है इसीलिए इस मनुष्य शरीर को अक्षय मूर्ति भी कहते हैं
ओम नमो नारायणा जगदम्बा
महानंदा नवमी कि हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं
जय श्री अम्बे जगदम्बे
शुभ प्रभात
जय मां आदि गायत्री जगदम्बा 🌞
जय श्री सदाशिव जगदम्बा
जय श्री राधे कृष्णा जगदम्बा
जय श्री महाकाल जगदम्बा
हर हर महादेव जगदम्बा
जय गुरु दत्तात्रेय जगदम्बा
जय गुरु गोरखनाथ जगदम्बा🙏🏻
#महानंदा नवमी #🌷महानंदा नवमी की शुभकामनाएं🌷 #☄महानंदा नवमी 🌸 #🙏राम राम जी #🌞 Good Morning🌞


