ShareChat
click to see wallet page
search
क़ितआ मीर तकी मीर #✒ शायरी
✒ शायरी - "क़ितआ" दुनिया से दर-गुज़र कि गुज़रगह अजब है ये दरपेश यानी ' मीर है जाना जहाँ से भी लश्कर में है मबीत इसी बात के fag कहते हैं लोग कूच है कल सुब्ह याँ से भी (मीर तकी मीर) Motivational Videos App Want "क़ितआ" दुनिया से दर-गुज़र कि गुज़रगह अजब है ये दरपेश यानी ' मीर है जाना जहाँ से भी लश्कर में है मबीत इसी बात के fag कहते हैं लोग कूच है कल सुब्ह याँ से भी (मीर तकी मीर) Motivational Videos App Want - ShareChat