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गज़ल पुरनम इलाहाबादी #✒ शायरी
✒ शायरी - WTTUImT कभी दिल से न तेरा दर्द निकले निकलती है तो आह-ए-सर्द নিব্ধল तुम्हें हमदर्द समझे थे हम अपना मगर तुम भी बड़े बे दर्द निकले किया बर्बाद अरमानों ने दिल ಈ मिरे दुश्मन तो घर के फ़र्द निकले न थी उम्मीद हमदर्दी की जिन से वही तक़दीर से हमदर्द निकले ख़िज़ाँ का ख़ौफ़ था जिन को বমন ম उन्हीं फूलों के चेहरे ज़र्द निकले (पुरनम इलाहाबादी) Motivational Videos App Want ' WTTUImT कभी दिल से न तेरा दर्द निकले निकलती है तो आह-ए-सर्द নিব্ধল तुम्हें हमदर्द समझे थे हम अपना मगर तुम भी बड़े बे दर्द निकले किया बर्बाद अरमानों ने दिल ಈ मिरे दुश्मन तो घर के फ़र्द निकले न थी उम्मीद हमदर्दी की जिन से वही तक़दीर से हमदर्द निकले ख़िज़ाँ का ख़ौफ़ था जिन को বমন ম उन्हीं फूलों के चेहरे ज़र्द निकले (पुरनम इलाहाबादी) Motivational Videos App Want ' - ShareChat