प्रभु श्री राम के चरणों मे नमन करके सागर वापस चला गया व प्रभु ने सहर्ष सेतु बनाने की आज्ञा वनराधीश सुग्रीव को दे दी , बाबा तुलसीदास अपने मन को समझा रहे हैं कि ज्यादा किंतु परंतु मत कर ,यह सुंदरकांड परम् कल्याणकारी कथा है, यह समस्त विघ्नों को हरने वाली व समस्त मंगलों को करने वाली है, जैसी मेरी मति थी वैसी मैंने रचना कर दी, अब सब शंका संशय को त्याग व इसका मनन कर व कल्याण को प्राप्त हो ,यही कलयुग में मुक्ति का सेतु है।
जय श्री राम
##सुंदरकांड पाठ चौपाई📙🚩
![#सुंदरकांड पाठ चौपाई📙🚩 - छद Rig श्रीरघुपतिहि पह मत भायऊ [ निज भवन गवनेउ पह चरित कलि मल हर जथामति दास JU5II तुलसी रघुपति गुन गना| सुख भवन संसय समन दवन विषाद तंजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना। ] रघुनाथजी को यह मत (उसकी মম্তুভ অপন ঘ২ বলা মমা; স্পী यह चरित्र कलियुग के पापों को हरने वाला सलाह) अच्छा लगा है, इसे तुलसीदास ने अपनी बुद्धि के अनुसार गाया है। श्री रघुनाथजी के गुण समूह " धाम , संदेह का नाश करने सुख के वाले और विषाद का दमन करने वाले हैं। अरे मूर्ख मन! तू संसार और सुन। का सब आशा - भरोसा त्यागकर निरंतर इन्हें गा सुदरकाण्ड छद Rig श्रीरघुपतिहि पह मत भायऊ [ निज भवन गवनेउ पह चरित कलि मल हर जथामति दास JU5II तुलसी रघुपति गुन गना| सुख भवन संसय समन दवन विषाद तंजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना। ] रघुनाथजी को यह मत (उसकी মম্তুভ অপন ঘ২ বলা মমা; স্পী यह चरित्र कलियुग के पापों को हरने वाला सलाह) अच्छा लगा है, इसे तुलसीदास ने अपनी बुद्धि के अनुसार गाया है। श्री रघुनाथजी के गुण समूह " धाम , संदेह का नाश करने सुख के वाले और विषाद का दमन करने वाले हैं। अरे मूर्ख मन! तू संसार और सुन। का सब आशा - भरोसा त्यागकर निरंतर इन्हें गा सुदरकाण्ड - ShareChat #सुंदरकांड पाठ चौपाई📙🚩 - छद Rig श्रीरघुपतिहि पह मत भायऊ [ निज भवन गवनेउ पह चरित कलि मल हर जथामति दास JU5II तुलसी रघुपति गुन गना| सुख भवन संसय समन दवन विषाद तंजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना। ] रघुनाथजी को यह मत (उसकी মম্তুভ অপন ঘ২ বলা মমা; স্পী यह चरित्र कलियुग के पापों को हरने वाला सलाह) अच्छा लगा है, इसे तुलसीदास ने अपनी बुद्धि के अनुसार गाया है। श्री रघुनाथजी के गुण समूह " धाम , संदेह का नाश करने सुख के वाले और विषाद का दमन करने वाले हैं। अरे मूर्ख मन! तू संसार और सुन। का सब आशा - भरोसा त्यागकर निरंतर इन्हें गा सुदरकाण्ड छद Rig श्रीरघुपतिहि पह मत भायऊ [ निज भवन गवनेउ पह चरित कलि मल हर जथामति दास JU5II तुलसी रघुपति गुन गना| सुख भवन संसय समन दवन विषाद तंजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना। ] रघुनाथजी को यह मत (उसकी মম্তুভ অপন ঘ২ বলা মমা; স্পী यह चरित्र कलियुग के पापों को हरने वाला सलाह) अच्छा लगा है, इसे तुलसीदास ने अपनी बुद्धि के अनुसार गाया है। श्री रघुनाथजी के गुण समूह " धाम , संदेह का नाश करने सुख के वाले और विषाद का दमन करने वाले हैं। अरे मूर्ख मन! तू संसार और सुन। का सब आशा - भरोसा त्यागकर निरंतर इन्हें गा सुदरकाण्ड - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_923043_366b75ea_1767329921509_sc.jpg?tenant=sc&referrer=pwa-sharechat-service&f=509_sc.jpg)

