ShareChat
click to see wallet page
search
#पूजन विधि
पूजन विधि - a 6 पौष शुक्ल द्वादशी व्रत पूजा विधि नारदपुराण में वर्णित पौष शुक्ल व्रत विधान के अनुसार मनुष्य को द्वादशी द्वादशी तिथि के दिन उपवास का पालन करते हुये पवित्रतापूर्वक नमो नारायणाय। मन्त्र से भगवान नारायण का पूजन करें । भगवान का दुग्ध से अभिषेक करके उन्हें खीर का नैवेद्य अर्पित करें । रात्रिकाल में तीनों समय श्रीहरि के पूजन में लीन रहकर जागरण करें। तदुपरान्त गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, गायन, वादन तथा नृत्य आदि द्वारा पूजा अर्चना करें । श्रद्धापूर्वक नारायण कवच आदि भगवान नारायण से भगवान की सम्बन्धित विभिन्न स्तोत्रों का पाठ करें। पूजनोपरान्त ब्राह्मण को घृत एवं दक्षिणा सहित खिचड़ी दान करें। दान प्रातःकाल करते समय निम्नोक्त मन्त्र का उच्चारण करते हुये प्रार्थना करें - सर्वात्मा सर्वलोकेशः सर्वव्यापी सनातनः | कृशरान्नप्रदानतः नारायणः प्रसन्नः स्यात् 1 "जो सभी प्राणियों के आत्मा हैं जो सम्पूर्ण लोकों के ईश्वर हैं, जो सर्वत्र भावार्थ  विद्यमान हैं, जो सनातन हैं, हे भगवान श्रीनारायण! यह खिचड़ी दान करने से आप मुझ पर प्रसन्न हों।" उपरोक्त मन्त्र से ब्राह्मण को उत्तम दान देकर सामर्थ्यानुसार ब्राह्मणों को भोजन तदुपरान्त स्वयं भी बन्धु-्बान्धवों सहित भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार करायें से मनुष्य " श्रद्धापूर्वक विधिवत् भगवान नारायणदेव का पूजन करने को आठ अग्निष्टोम यज्ञों का सम्पूर्ण पुण्यफल प्राप्त होता है। a 6 पौष शुक्ल द्वादशी व्रत पूजा विधि नारदपुराण में वर्णित पौष शुक्ल व्रत विधान के अनुसार मनुष्य को द्वादशी द्वादशी तिथि के दिन उपवास का पालन करते हुये पवित्रतापूर्वक नमो नारायणाय। मन्त्र से भगवान नारायण का पूजन करें । भगवान का दुग्ध से अभिषेक करके उन्हें खीर का नैवेद्य अर्पित करें । रात्रिकाल में तीनों समय श्रीहरि के पूजन में लीन रहकर जागरण करें। तदुपरान्त गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, गायन, वादन तथा नृत्य आदि द्वारा पूजा अर्चना करें । श्रद्धापूर्वक नारायण कवच आदि भगवान नारायण से भगवान की सम्बन्धित विभिन्न स्तोत्रों का पाठ करें। पूजनोपरान्त ब्राह्मण को घृत एवं दक्षिणा सहित खिचड़ी दान करें। दान प्रातःकाल करते समय निम्नोक्त मन्त्र का उच्चारण करते हुये प्रार्थना करें - सर्वात्मा सर्वलोकेशः सर्वव्यापी सनातनः | कृशरान्नप्रदानतः नारायणः प्रसन्नः स्यात् 1 "जो सभी प्राणियों के आत्मा हैं जो सम्पूर्ण लोकों के ईश्वर हैं, जो सर्वत्र भावार्थ  विद्यमान हैं, जो सनातन हैं, हे भगवान श्रीनारायण! यह खिचड़ी दान करने से आप मुझ पर प्रसन्न हों।" उपरोक्त मन्त्र से ब्राह्मण को उत्तम दान देकर सामर्थ्यानुसार ब्राह्मणों को भोजन तदुपरान्त स्वयं भी बन्धु-्बान्धवों सहित भोजन ग्रहण करें। इस प्रकार करायें से मनुष्य " श्रद्धापूर्वक विधिवत् भगवान नारायणदेव का पूजन करने को आठ अग्निष्टोम यज्ञों का सम्पूर्ण पुण्यफल प्राप्त होता है। - ShareChat