#राधे राधे #राधे कृष्ण
" निकुंज लीला "
जिज्ञासा -- निकुंज लीला किसे कहते हैं?
समाधान -- निकुंज लीला श्री राधा-कृष्ण की अत्यंत गोपनीय, मधुर और अंतरंग लीलाओं को कहते हैं, जो वृंदावन के निकुंज वन या कुंजों (फूलों से भरे एकांत उपवनों) में घटित होती हैं। ये लीलाएं सामान्य दृष्टि से नहीं देखी जा सकतीं - ये केवल पारकिया भाव में प्रेम करने वाले #गोपियों और रासिक भक्तों को ही अनुभव होती हैं।
विस्तार से समझें:
"निकुंज" का अर्थ है - फूलों से सजे एकांत उपवन, जहाँ शांति और माधुर्य होता है।
"लीला" का अर्थ है - भगवान की दिव्य क्रिया जो केवल आनंद के लिए होती है।
निकुंज लीलाओं की विशेषताएँ:
1. ये लीलाएं श्री राधा-कृष्ण की एकांत विहार लीलाएं होती हैं।
2. इनमें राधा रानी का स्वामिनी भाव और श्रीकृष्ण का रसिक भाव प्रमुख होता है।
3. इसमें ललिता, विशाखा आदि सखियाँ भी सहायिका रूप में होती हैं।
4. ये लीलाएं भक्ति के उच्चतम स्तर - मधुर्य रस की -चरम अवस्था – में अनुभूत होती हैं।
5. श्री हरिदास, श्री रूपगोस्वामी जैसे रासिक संतों ने इन लीलाओं का गूढ़ वर्णन किया है।
एक भजन की पंक्ति से उदाहरणः
> "जय जय कुंजबिहारी श्री हरिदास..."
यहाँ "कुंज बिहारी" वही राधा-कृष्ण हैं जो निकुंज लीलाओं में रत रहते हैं।
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