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#पयोदों की धारा
पयोदों की धारा - पयोदों की धारा गगन तल घेरे क्षितिज में विलंबी होती है, धरणि उर का ताप तज के बुलाती गाती है पलनपल, नए भाव उस के बलाका माला से उठ कर उड़़े और फहरे। पयोदों की धारा गगन तल घेरे क्षितिज में विलंबी होती है, धरणि उर का ताप तज के बुलाती गाती है पलनपल, नए भाव उस के बलाका माला से उठ कर उड़़े और फहरे। - ShareChat