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#लो वही हुआ
लो वही हुआ - लो बही हुआ जिसका था डर ना रही नदी, ना रही लहर। सूरज की किरन दहाड़ गई गरमी हर देह उघाड़ गई उठ गया बवंड़र, धूल हवा में अपना झंडा़ गाड गई गौरइया हाँफ रही डर कर ना रही नदी, ना रही लहर। ओर उमस के चर्चे हैं हर बिजली पंखों के खर्चे हैं बूढे महुए के हाथों से उड़ रहे हवा में पर्चे हैं साथी लू से बचकर " चलना ना रही नदी॰ ना रही लहर। संकल्प हिमालय सा गलता सारा दिन भट्ठी सा जलता मन भरे हुए, सब डरे हुए किस की हिम्मत बाहर हिलता है खडा सूर्य सरके ऊपर ना रही नदी, ना रही लहर।  बोझिल रातों के मध्य पहर छपरी से चन्दकिरण ऋनकर लो बही हुआ जिसका था डर ना रही नदी, ना रही लहर। सूरज की किरन दहाड़ गई गरमी हर देह उघाड़ गई उठ गया बवंड़र, धूल हवा में अपना झंडा़ गाड गई गौरइया हाँफ रही डर कर ना रही नदी, ना रही लहर। ओर उमस के चर्चे हैं हर बिजली पंखों के खर्चे हैं बूढे महुए के हाथों से उड़ रहे हवा में पर्चे हैं साथी लू से बचकर " चलना ना रही नदी॰ ना रही लहर। संकल्प हिमालय सा गलता सारा दिन भट्ठी सा जलता मन भरे हुए, सब डरे हुए किस की हिम्मत बाहर हिलता है खडा सूर्य सरके ऊपर ना रही नदी, ना रही लहर।  बोझिल रातों के मध्य पहर छपरी से चन्दकिरण ऋनकर - ShareChat
#हम छले गए!
हम छले गए! - 6#-3#+ जब भी चाहा द्वापर ्त्रेता सब चले गए! हम छले गए! =6<6 ना अश्व रहे ना दीर्घ रहे ना हर्स्व रहे मुट्ठी में तनी हुईं वल्गाओं के छूटे वर्चस्व रहे उनकी पीठों से छिटके हम अपनी ही पीठें मले गए हम छले गए! << ना मन्त्र रहे जो यावत रहे स्वतन्त्र रहे में रहे आग बनकर चुप्पी आहट पर मारक यन्त्र रहे कुरु स्वाहा' ढजे पर डिम-सा गले गए 6#-3#+ जब भी चाहा द्वापर ्त्रेता सब चले गए! हम छले गए! =6<6 ना अश्व रहे ना दीर्घ रहे ना हर्स्व रहे मुट्ठी में तनी हुईं वल्गाओं के छूटे वर्चस्व रहे उनकी पीठों से छिटके हम अपनी ही पीठें मले गए हम छले गए! << ना मन्त्र रहे जो यावत रहे स्वतन्त्र रहे में रहे आग बनकर चुप्पी आहट पर मारक यन्त्र रहे कुरु स्वाहा' ढजे पर डिम-सा गले गए - ShareChat
#दिन घटेंगे
दिन घटेंगे - जनम के सिरजे हुए दुख उम्र बन बनकर कटेंगे ज़िन्दगी के दिन घटेंगे अन्धा बिना पानी துர் यादें पुरानी घूमती प्यास का होना वसन्ती तितलियों से छेड़खानी झरे फूलों से पहाड़े . गन्ध के कब तक रटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे चढ़ गए सारे नसेड़ी वक़्त की मीनार टेढ़ी 'गिर रही है ~ गिर रही है' हवाओं ने तान छेड़ी मचेगी भगदड़ कि कितने स्वप्न लाशों से पटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे परिन्दे फिर भी चमन में खेत बागों में कि वन में चहचहाएँगे नदी बहती रहेगी उसी धन में जनम के सिरजे हुए दुख उम्र बन बनकर कटेंगे ज़िन्दगी के दिन घटेंगे अन्धा बिना पानी துர் यादें पुरानी घूमती प्यास का होना वसन्ती तितलियों से छेड़खानी झरे फूलों से पहाड़े . गन्ध के कब तक रटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे चढ़ गए सारे नसेड़ी वक़्त की मीनार टेढ़ी 'गिर रही है ~ गिर रही है' हवाओं ने तान छेड़ी मचेगी भगदड़ कि कितने स्वप्न लाशों से पटेंगे? ज़िन्दगी के दिन घटेंगे परिन्दे फिर भी चमन में खेत बागों में कि वन में चहचहाएँगे नदी बहती रहेगी उसी धन में - ShareChat
#कहो कैसे हो?
कहो कैसे हो? - लौट रहा हूँ मैं अतीत से देखूँ प्रथम तुम्हारे तेवर मेरे समय! कहो कैसे हो? शोरन्शराबा चीख पुकारे सड़कें भीर दुकानें होटल लेकिन गायक दर्द नहीं है केवल बह्ुत है  सब सामान हूँ मैं अगेय  लौट रहा सोचा तुमसे मिलता जाऊँ गीत! कहो कैसे हो? भवन और भवनों के जंगल चढ़ते औरउतरते ज़ीने यहाँ आदमी कहाँ मिलेगा सिर्फ मशीनें और मशीनें लौट र्हा हूँ मैं यथार्थ  मन हो आया तुम्हे भेंट लूँ मेरे स्वप्न! कहो कैसे हो? की एकं नस्ल मनुज की चली मिटाती यह लावे नदी की आतंक न पूछो खबरदार बीसवीं सदी తత लौट रहा हूँ मैं विदेश से सबसे पहले कुशल पूँछ लूँ मेरे देश! कहो कैसे हो? सह सभ्यता नुमाइश जैसे लोग नहीं है यसर्फ मुखौटे ठीक मनुष्य नहीं है कोई कद से ऊँचे मन से छोटे लौट रद्रा डँ मैं जंगल से लौट रहा हूँ मैं अतीत से देखूँ प्रथम तुम्हारे तेवर मेरे समय! कहो कैसे हो? शोरन्शराबा चीख पुकारे सड़कें भीर दुकानें होटल लेकिन गायक दर्द नहीं है केवल बह्ुत है  सब सामान हूँ मैं अगेय  लौट रहा सोचा तुमसे मिलता जाऊँ गीत! कहो कैसे हो? भवन और भवनों के जंगल चढ़ते औरउतरते ज़ीने यहाँ आदमी कहाँ मिलेगा सिर्फ मशीनें और मशीनें लौट र्हा हूँ मैं यथार्थ  मन हो आया तुम्हे भेंट लूँ मेरे स्वप्न! कहो कैसे हो? की एकं नस्ल मनुज की चली मिटाती यह लावे नदी की आतंक न पूछो खबरदार बीसवीं सदी తత लौट रहा हूँ मैं विदेश से सबसे पहले कुशल पूँछ लूँ मेरे देश! कहो कैसे हो? सह सभ्यता नुमाइश जैसे लोग नहीं है यसर्फ मुखौटे ठीक मनुष्य नहीं है कोई कद से ऊँचे मन से छोटे लौट रद्रा डँ मैं जंगल से - ShareChat
#तुम कभी थे सूर्य
तुम कभी थे सूर्य - तुम कभी थे सूर्य लेकिन अब दियों तक आ गये। कभी मुख्पृष्ठ पर अब हाशियों तक आ गये II थे यवनिका बदली कि सारा दृष्य बदला मंच का | थे कभी दुल्हा स्वयं बारातियों तक आ गये ।। पहिया किसे कुचले कहां कबू क्या पता। वक्त का कभी रथवान अब बैसाखियों तक आ गये ।। 2 ली सत्ता किसी वारांगना से कम नहीं | दख जो कि अध्यादेश थे खुद अर्जियों तक आ गये ।। बोल लेते खूब हो। मे तुम ` देश संदर्भ  कुर्सियों तक आ गये ।l बात ध्वज की थी चलाई प्रेम के आख्यान मे तुम आत्मा से थे चले | घूम फिर कर देह की गोलाईयों तक आ गये कुछ बिके आलोचकों की मानकर ही गीत को | तुम ऋचाएं मानते थे गालियों तक आ गये । सभ्यता के पंथ पर यह आदमी की यात्रा ] देवताओं से शुरु की वहशियों तक आ गये ।l तुम कभी थे सूर्य लेकिन अब दियों तक आ गये। कभी मुख्पृष्ठ पर अब हाशियों तक आ गये II थे यवनिका बदली कि सारा दृष्य बदला मंच का | थे कभी दुल्हा स्वयं बारातियों तक आ गये ।। पहिया किसे कुचले कहां कबू क्या पता। वक्त का कभी रथवान अब बैसाखियों तक आ गये ।। 2 ली सत्ता किसी वारांगना से कम नहीं | दख जो कि अध्यादेश थे खुद अर्जियों तक आ गये ।। बोल लेते खूब हो। मे तुम ` देश संदर्भ  कुर्सियों तक आ गये ।l बात ध्वज की थी चलाई प्रेम के आख्यान मे तुम आत्मा से थे चले | घूम फिर कर देह की गोलाईयों तक आ गये कुछ बिके आलोचकों की मानकर ही गीत को | तुम ऋचाएं मानते थे गालियों तक आ गये । सभ्यता के पंथ पर यह आदमी की यात्रा ] देवताओं से शुरु की वहशियों तक आ गये ।l - ShareChat
#संभव विडंबना भी
संभव विडंबना भी - संभव विडंबना भी है साथ नव सृजन के उल्लास तो बढ़ेंगे , परिहास कम न होंगे अलगाव की विवशता  हरदम निकट रही इतना प्रयत्न फिरभी दूरी न घट रही है होगा विकास फिर भी संभाव्य विपर्यय आवास तो बढ़ेंगे , वनवास कम न होंगे। में हो परिणाम पक्ष परितोष पर न होगा हो प्राप्त सफलताएं संतोष पर न होगा हर प्राप्ति में विफलता का बोध शेष होगा हों भोज अधिक फिर भी उपवास कम न होंगे भौतिक पदार्थवादी उपलब्धियां बढेंगी रक्तों रंगी वसीयत क्या पीढ़ियां पढ़ेंगी? उपभोग्य वस्तुओं में है वस्तु  आदमी भी सपन्नता बढ़ेगी , संत्रास कम न होंँगे। संभव विडंबना भी है साथ नव सृजन के उल्लास तो बढ़ेंगे , परिहास कम न होंगे अलगाव की विवशता  हरदम निकट रही इतना प्रयत्न फिरभी दूरी न घट रही है होगा विकास फिर भी संभाव्य विपर्यय आवास तो बढ़ेंगे , वनवास कम न होंगे। में हो परिणाम पक्ष परितोष पर न होगा हो प्राप्त सफलताएं संतोष पर न होगा हर प्राप्ति में विफलता का बोध शेष होगा हों भोज अधिक फिर भी उपवास कम न होंगे भौतिक पदार्थवादी उपलब्धियां बढेंगी रक्तों रंगी वसीयत क्या पीढ़ियां पढ़ेंगी? उपभोग्य वस्तुओं में है वस्तु  आदमी भी सपन्नता बढ़ेगी , संत्रास कम न होंँगे। - ShareChat
#apni Suraksha Khud Karen
apni Suraksha Khud Karen - दिल्ली मुंबई के बाद अब अपने छोटे शहर भी हाई अलर्ट पर बच्चे गायब के मामले तेजी से बढ़ने के बाद पूरे देश के छोटे में रेड अलर्ट जारी किया हे शहरों कोई बच्चों को खेलने अकेले बाहर ना भेजे घूम घूम कर सामान बेचने वाले को गली मोहले में ना घुसने दे अपने बच्चों को अपना फोन नंबर घर का एड्रेस जरूर याद कराए ओर अंजान से दूर रहना जरूर सिखाए इस पोस्ट को कम से कम 5 लोगों को जरूर शेयर करे ताकि किसी की जिंदगी बच सके अधिक जानकारी के लिए पेज को फोलो जरूर करे दिल्ली मुंबई के बाद अब अपने छोटे शहर भी हाई अलर्ट पर बच्चे गायब के मामले तेजी से बढ़ने के बाद पूरे देश के छोटे में रेड अलर्ट जारी किया हे शहरों कोई बच्चों को खेलने अकेले बाहर ना भेजे घूम घूम कर सामान बेचने वाले को गली मोहले में ना घुसने दे अपने बच्चों को अपना फोन नंबर घर का एड्रेस जरूर याद कराए ओर अंजान से दूर रहना जरूर सिखाए इस पोस्ट को कम से कम 5 लोगों को जरूर शेयर करे ताकि किसी की जिंदगी बच सके अधिक जानकारी के लिए पेज को फोलो जरूर करे - ShareChat
#देख देख एक बाला
देख देख एक बाला - देख देख एक बाला जोगी द्वारे मेरे आया हो ।ध्रु० ।ा  पीतपीतांबर गंगा बिराजे अंग बिभूती लगाया हो। तीन नेत्र अरु तिलक चंद्रमा जोगी जेटा बनाया हो Il 3I भिछा ले निकसी नंदरानी मोतीयन थाल भराया हो ल्यो जोगी जाओ आसनपर मेरा लाल दराया हो ।l  २ ना चईये तेरी माया हो अपनो गोपाल बताव नंदरानी हम दरशनकु आया हो Il३।l बालकले निकसी नंदरानी जोगीयन दरसन पाया हो दरसन पाया प्रेम बस नाचे मन मंगल दरसाया हो I 8I देत आसीस चले आसनपर चिरंजीव तेरा जाया हो सूरदास प्रभु सखा बिराजे आनंद मंगल गाया हो ५l देख देख एक बाला जोगी द्वारे मेरे आया हो ।ध्रु० ।ा  पीतपीतांबर गंगा बिराजे अंग बिभूती लगाया हो। तीन नेत्र अरु तिलक चंद्रमा जोगी जेटा बनाया हो Il 3I भिछा ले निकसी नंदरानी मोतीयन थाल भराया हो ल्यो जोगी जाओ आसनपर मेरा लाल दराया हो ।l  २ ना चईये तेरी माया हो अपनो गोपाल बताव नंदरानी हम दरशनकु आया हो Il३।l बालकले निकसी नंदरानी जोगीयन दरसन पाया हो दरसन पाया प्रेम बस नाचे मन मंगल दरसाया हो I 8I देत आसीस चले आसनपर चिरंजीव तेरा जाया हो सूरदास प्रभु सखा बिराजे आनंद मंगल गाया हो ५l - ShareChat
#नंद दुवारे एक जोगी आयो
नंद दुवारे एक जोगी आयो - नंद दुवारे एक जोगी आयो शिंगी नाद बजायो | सीश जटा शशि वदन सोहाये अरुण नयन छबि ಅೆ II F IIgoIl रोवत खिजत कृष्ण सावरो रहत नही हुलरायो लीयो उठाय गोद नंदरानी द्वारे जाय दिखायो Il F4oIgII  अलख अलख करी लीयो गोदमें चरण चुमि उर लायो श्रवण लाग कछु मंत्र सुनायो हसी बालक कीलकायो Il नंद I२ l चिरंजीवोसुत महरी तिहारो हो जोगी सुख पायो ( सूरदास रमि चल्यो रावरो संकर नाम बतायो I१ नंद।। 31 नंद दुवारे एक जोगी आयो शिंगी नाद बजायो | सीश जटा शशि वदन सोहाये अरुण नयन छबि ಅೆ II F IIgoIl रोवत खिजत कृष्ण सावरो रहत नही हुलरायो लीयो उठाय गोद नंदरानी द्वारे जाय दिखायो Il F4oIgII  अलख अलख करी लीयो गोदमें चरण चुमि उर लायो श्रवण लाग कछु मंत्र सुनायो हसी बालक कीलकायो Il नंद I२ l चिरंजीवोसुत महरी तिहारो हो जोगी सुख पायो ( सूरदास रमि चल्यो रावरो संकर नाम बतायो I१ नंद।। 31 - ShareChat