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#वृक्ष #वृक्ष लगाओ जीवन पाओ #कल्प वृक्ष
वृक्ष - & कोई वृक्ष गिरता है॰ G तो सिर्फ़ लकड़ी नहीं ಞsf, किसी की कविता बीच पंक्ति में चुपहो जाती है। आकर किसी के हिस्से की छाया धूप मेंबदल जाती है কিমী নিভিয়া ক্ষা ঘীবলা हवा में बिखर जाता है। वही वृक्ष फिर किसी घर में , 8, बन जाता ತf की बातचीत सुनता है॰ आरम पर जंगल की ख़ामोशी भूल 81 जाता 8, रूूप बदल GII जाता है < H dt  ತ  ತ13 af 3d मिट्टी को याद करती हैं। সাহাঁথা সী নতুব নী ক্িং নী ২৪ ৪ী আনা ৪, में कुछ भी इस कायनात पूरी तरह ख़त्म होता है। कहाँ बस फर्क इतना है  - कहीं जीवन छिनता हे॰ और कहीं सुविधा ল লনী ৪1 స & कोई वृक्ष गिरता है॰ G तो सिर्फ़ लकड़ी नहीं ಞsf, किसी की कविता बीच पंक्ति में चुपहो जाती है। आकर किसी के हिस्से की छाया धूप मेंबदल जाती है কিমী নিভিয়া ক্ষা ঘীবলা हवा में बिखर जाता है। वही वृक्ष फिर किसी घर में , 8, बन जाता ತf की बातचीत सुनता है॰ आरम पर जंगल की ख़ामोशी भूल 81 जाता 8, रूूप बदल GII जाता है < H dt  ತ  ತ13 af 3d मिट्टी को याद करती हैं। সাহাঁথা সী নতুব নী ক্িং নী ২৪ ৪ী আনা ৪, में कुछ भी इस कायनात पूरी तरह ख़त्म होता है। कहाँ बस फर्क इतना है  - कहीं जीवन छिनता हे॰ और कहीं सुविधा ল লনী ৪1 స - ShareChat
#ab koi jikar nhi #meri life me uska bi jikar tha
ab koi jikar nhi - ज़िक्र होता है ज़िक्र होता है जब कयामत का तेरे जलवों की बात होती है तू जो चाहे तो दिन निकलता है तू जो चाहे तो रात होती है देखा है मेरी नज़रों ने तुझको तेरी तारीफ़ होे मगर कैसे के बने ये नज़र কম जुबां के बने ये जुबान नज़र कैसे ना जुबां को दिखाई देता है ना निगाहो से बात होती है मुस्कुराती हुयी 314 तू चली तो बिखर जाये हरतरफ कलियाँ जाये उठके पहलू से तू चली तो उजड़ जाये की गलियाँ फूलों  जिस तरफ होती है नज़र तेरी #8 उस तरफ क़ायनात निगाहों से ना पिलाए तो अश्क्र भी पीनेवाले पीते है वैसे जीने को तो तेरे बिन भी इस ज़माने मे लोग जीते है ज़िंदगी तो उसी को कहते है जो बसर तेरे साथ होती है << ज़िक्र होता है ज़िक्र होता है जब कयामत का तेरे जलवों की बात होती है तू जो चाहे तो दिन निकलता है तू जो चाहे तो रात होती है देखा है मेरी नज़रों ने तुझको तेरी तारीफ़ होे मगर कैसे के बने ये नज़र কম जुबां के बने ये जुबान नज़र कैसे ना जुबां को दिखाई देता है ना निगाहो से बात होती है मुस्कुराती हुयी 314 तू चली तो बिखर जाये हरतरफ कलियाँ जाये उठके पहलू से तू चली तो उजड़ जाये की गलियाँ फूलों  जिस तरफ होती है नज़र तेरी #8 उस तरफ क़ायनात निगाहों से ना पिलाए तो अश्क्र भी पीनेवाले पीते है वैसे जीने को तो तेरे बिन भी इस ज़माने मे लोग जीते है ज़िंदगी तो उसी को कहते है जो बसर तेरे साथ होती है << - ShareChat