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#मेरे रावरिये गति रघुपति है बलि जाउँ।
मेरे रावरिये गति रघुपति है बलि जाउँ। - எஎனி मेरे रावरिये गति रघुपति निलज नीच निर्गुन निर्धन कहँ जंग दूसरो न ठाकुन 3?1 हैं घर घर बहु भरे सुसाहिबः सूझत सबनि आपनो 631 बानर बधु बिभीषन हित बिनु कोसलपाल कहूँ न समार २| प्रनतारति भजन जन रजन सरनागत पबि पंजर नाउँ। बिनु अब, कृपासिंधु  मोल कीजै दास दास तुलसी बिकाँँा३ எஎனி मेरे रावरिये गति रघुपति निलज नीच निर्गुन निर्धन कहँ जंग दूसरो न ठाकुन 3?1 हैं घर घर बहु भरे सुसाहिबः सूझत सबनि आपनो 631 बानर बधु बिभीषन हित बिनु कोसलपाल कहूँ न समार २| प्रनतारति भजन जन रजन सरनागत पबि पंजर नाउँ। बिनु अब, कृपासिंधु  मोल कीजै दास दास तुलसी बिकाँँा३ - ShareChat
#मैं केहि कहौ बिपति अति भारी।
मैं केहि कहौ बिपति अति भारी। - Vo2 ,ll 18% 4:00 mm मैं केहि कहौ बिपति अतिःभारी[ श्रीरघुबीर धीर हिंतकारी। मम हदय भवन प्रभु तोरा। तहँ बसे आइ बहु चारा। अति कठिन करहिं बर जोरा। मानहिं नहि बिनंय निहोरा।।  R ೫೯, लोभ अहँकारा | मद क्रोध, बोध तम मारा। अति करहिं उपद्रव नाथा। मरदहिं मोहि जानि अनाथा।| 14 4.4 Vo2 ,ll 18% 4:00 mm मैं केहि कहौ बिपति अतिःभारी[ श्रीरघुबीर धीर हिंतकारी। मम हदय भवन प्रभु तोरा। तहँ बसे आइ बहु चारा। अति कठिन करहिं बर जोरा। मानहिं नहि बिनंय निहोरा।।  R ೫೯, लोभ अहँकारा | मद क्रोध, बोध तम मारा। अति करहिं उपद्रव नाथा। मरदहिं मोहि जानि अनाथा।| 14 4.4 - ShareChat
#लाज न आवत दास कहावत
लाज न आवत दास कहावत - OFF लाज न आवत दास कहावत। आचरन बिसारि सोच तजि जो हरि तुम कह सो भावत Il१Il सकल संग तजि भजत जाहि मुनि, जप तप जाग बनावत। मो सम मंद महाखल पाँवर , कौन जतन तेहि I4II?II मल, मल ग्रसित ह्रदय, असंजस मोहि जनावत। जैीहि सरक्वाक बंक बक सूकर , क्यों मराल तहँ आवत Il३ Il जाकी सरन जाइ कोबिद, दारुन त्रयताप बुझावता  तहूँ गये मद मोह लोभ अति, सरगहुँ मिटत न सावत Il४I] भव सरिता कहेँ नाउ संत यह कहि औरनि समुझावत। हौं तिनसों हरि परम बैर करि तुमसों भलो मनावत १  ५ll नाहिन और ठौर मो कहँ, तातें हठि नातो लावत। राखु सरन उदार चूड़ामनि, तुलसिदास गुन गावता  Il OFF लाज न आवत दास कहावत। आचरन बिसारि सोच तजि जो हरि तुम कह सो भावत Il१Il सकल संग तजि भजत जाहि मुनि, जप तप जाग बनावत। मो सम मंद महाखल पाँवर , कौन जतन तेहि I4II?II मल, मल ग्रसित ह्रदय, असंजस मोहि जनावत। जैीहि सरक्वाक बंक बक सूकर , क्यों मराल तहँ आवत Il३ Il जाकी सरन जाइ कोबिद, दारुन त्रयताप बुझावता  तहूँ गये मद मोह लोभ अति, सरगहुँ मिटत न सावत Il४I] भव सरिता कहेँ नाउ संत यह कहि औरनि समुझावत। हौं तिनसों हरि परम बैर करि तुमसों भलो मनावत १  ५ll नाहिन और ठौर मो कहँ, तातें हठि नातो लावत। राखु सरन उदार चूड़ामनि, तुलसिदास गुन गावता  Il - ShareChat
#विश्वास करना चाहता हूँ
विश्वास करना चाहता हूँ - विश्वास करना चाहता हूँकि प्रेम में अपनी पराजय पर जब कविता के निपट एकांत में विलाप करता तो किसी वृक्ष पर नए उगे किसलयों में सिहरन होती बुरा लगता है किसी चिड़िया को दृश्य का फिसथी इतना हरा भराहाना किससक्षत्र की गति पल भरको धीमी पड़ती है अंतरिक्ष में कृथ्वीकी किसी अदृश्य शिरा में बह रहा लावा थोड़ा बुझता है केपार फैले पुरखे एक्टूसरे को ढाढ़स सदियों बंधाते टेवताओंके आंसू असमय हुई वर्षा में झूरते हैं मै रोता हूँ॰ तो पूरे ब्रह्माड्में झकृत होता है दुर्खका एकवृदवादन दुख मेंमुझे अंकेला न्रही छोड़ देता पचजय और संसार दुख घिरता है ऐसे जैसे बही अब देह हो जिसमे रहना और मरना है जैसे होने का वही असली रंग है जो अबजाकर उभरा है 9 विश्वास करना चाहता हूँकि प्रेम में अपनी पराजय पर जब कविता के निपट एकांत में विलाप करता तो किसी वृक्ष पर नए उगे किसलयों में सिहरन होती बुरा लगता है किसी चिड़िया को दृश्य का फिसथी इतना हरा भराहाना किससक्षत्र की गति पल भरको धीमी पड़ती है अंतरिक्ष में कृथ्वीकी किसी अदृश्य शिरा में बह रहा लावा थोड़ा बुझता है केपार फैले पुरखे एक्टूसरे को ढाढ़स सदियों बंधाते टेवताओंके आंसू असमय हुई वर्षा में झूरते हैं मै रोता हूँ॰ तो पूरे ब्रह्माड्में झकृत होता है दुर्खका एकवृदवादन दुख मेंमुझे अंकेला न्रही छोड़ देता पचजय और संसार दुख घिरता है ऐसे जैसे बही अब देह हो जिसमे रहना और मरना है जैसे होने का वही असली रंग है जो अबजाकर उभरा है 9 - ShareChat
#इस गाढे अंधेरे में
इस गाढे अंधेरे में - इस गाढे अंध यों तो हाथ को हाथ नहू सझता लेकिन साफ़ साफ़ नज 5-} का बढता दआ हुजूम हत्यारों उनकी ख़ूंख़्वार आंखें उसके तेज़ धारदार हथियार उनकी भड़कीली पोशाकें मारने नष्ट करने का उनका चमकीला उत्साह उनके सधे सोचे समझे क़ॅदम। पास अंधेरे को भेदने की कोई हिकमत नहीं है हमारे और न हमारी आंखों को अंधेरे में देखने का कोई वरदान मिला है। फिर भी हमको यह सब साफ नज़र आ रहा है। यह अजब अंधेरा है जिसमें सब कुछ् साफ दिखाई दे रहा है जैसे नीमरोशनी में कोई नाटक के दृश्य। पास न तो आत्मा का प्रकाश है हमार औरन ही अंतःकरण का कोई आलोकः यह हमारा विचित्र समय है जो बिना किसी रोशनी की उम्मीद के हमें गाढे अंधेरे में गुम भी कर रहा है और साथ ही उसमें जो हो रहा है वहःदिखा रहा हैः क्या कभी कभार कोई अंधेरा समय रोशनी भी होता है? इस गाढे अंध यों तो हाथ को हाथ नहू सझता लेकिन साफ़ साफ़ नज 5-} का बढता दआ हुजूम हत्यारों उनकी ख़ूंख़्वार आंखें उसके तेज़ धारदार हथियार उनकी भड़कीली पोशाकें मारने नष्ट करने का उनका चमकीला उत्साह उनके सधे सोचे समझे क़ॅदम। पास अंधेरे को भेदने की कोई हिकमत नहीं है हमारे और न हमारी आंखों को अंधेरे में देखने का कोई वरदान मिला है। फिर भी हमको यह सब साफ नज़र आ रहा है। यह अजब अंधेरा है जिसमें सब कुछ् साफ दिखाई दे रहा है जैसे नीमरोशनी में कोई नाटक के दृश्य। पास न तो आत्मा का प्रकाश है हमार औरन ही अंतःकरण का कोई आलोकः यह हमारा विचित्र समय है जो बिना किसी रोशनी की उम्मीद के हमें गाढे अंधेरे में गुम भी कर रहा है और साथ ही उसमें जो हो रहा है वहःदिखा रहा हैः क्या कभी कभार कोई अंधेरा समय रोशनी भी होता है? - ShareChat
#कविता 😂 चंदा मामा #🙏🏻 #chanda mama
कविता 😂 चंदा मामा #🙏🏻 - चन्दा मामा दौड़े आओ दूध कटोरा भरकरलाओ | उसे प्यार से मुझे पिलाओ, मुझ परछिड़क चाँदनी जाओ I मैं तैरा मृग छौना लूँगा , उसके साथ हँसूँ खेलूँगा  देखूँगा, उसकी उछल कूद उसको चाटूँगा चूमूँगा 4 चन्दा मामा दौड़े आओ दूध कटोरा भरकरलाओ | उसे प्यार से मुझे पिलाओ, मुझ परछिड़क चाँदनी जाओ I मैं तैरा मृग छौना लूँगा , उसके साथ हँसूँ खेलूँगा  देखूँगा, उसकी उछल कूद उसको चाटूँगा चूमूँगा 4 - ShareChat