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#dohe #👌 दोहे
dohe - पहुँचे पूरे जोश से, ज्यों आंधी तूफान चाँदी का जूता पड़ा , तो सिल गई ज़ुबान सौंपी उन्हें जुबान सबने अपनी काटकर, सिध्द हुए वे सहन में, कितने मूक महान सभी जगह पर हैं ग़लत, लोग अयोग अपात्र क्यों न व्यवस्था हो लचर, एक दिखावा मात्र जो जिसके उपयुक्त है, वही नहीं उस स्थान होना तो था फ़़ायदा, हुआ मगर नुकसान चुनने में देखा नहीं , तुमने पात्र, अपात्र उनको प्राध्यापन दिया, जो कि स्वयं थे छात्र खास स्थान पर खास को, मिला नहीं पद भार सिफ़ारिशों ने कर दिया, सब कुछ बँटाढार मुझको रही अज़ीज ज़्यादा अपनी जान से, तुम कहो तो कहो उसे , मैं न कहूँगा चीज़ पक्षपात बादल करे, वितरण में व्याघात मरुथल सूखा रख करे, सागर पर बरसात इन आँखों के सिंधु में, मन के बहुत समीप पहुँचे पूरे जोश से, ज्यों आंधी तूफान चाँदी का जूता पड़ा , तो सिल गई ज़ुबान सौंपी उन्हें जुबान सबने अपनी काटकर, सिध्द हुए वे सहन में, कितने मूक महान सभी जगह पर हैं ग़लत, लोग अयोग अपात्र क्यों न व्यवस्था हो लचर, एक दिखावा मात्र जो जिसके उपयुक्त है, वही नहीं उस स्थान होना तो था फ़़ायदा, हुआ मगर नुकसान चुनने में देखा नहीं , तुमने पात्र, अपात्र उनको प्राध्यापन दिया, जो कि स्वयं थे छात्र खास स्थान पर खास को, मिला नहीं पद भार सिफ़ारिशों ने कर दिया, सब कुछ बँटाढार मुझको रही अज़ीज ज़्यादा अपनी जान से, तुम कहो तो कहो उसे , मैं न कहूँगा चीज़ पक्षपात बादल करे, वितरण में व्याघात मरुथल सूखा रख करे, सागर पर बरसात इन आँखों के सिंधु में, मन के बहुत समीप - ShareChat