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चौपाई चरणदास #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - चौपाई ' 0 रिध्दि सिध्दि फल कछू न चाहूँ जगत कामना को नहिं लाऊँ और कामना मैं नहिं राखूँ रसना भाखूँ तुम्हारे নাম में बहु ' चौरासी दुख पायो ता ते सरन तिहारी आयो सुक्ति होन की मन में आवै आवागवन सूँ जीव डरावै प्रेम प्रीति में हिरदा भीजै यही दान पाता मोहिं दीजै अपना कीजै गहिये बाहीं धरिये सिर पर हाथ गुसाई चरनदास' को लेहु उबारे मैं अण्डा तुम सेवनहारे (चरनदास) Motivational Videos App Want . चौपाई ' 0 रिध्दि सिध्दि फल कछू न चाहूँ जगत कामना को नहिं लाऊँ और कामना मैं नहिं राखूँ रसना भाखूँ तुम्हारे নাম में बहु ' चौरासी दुख पायो ता ते सरन तिहारी आयो सुक्ति होन की मन में आवै आवागवन सूँ जीव डरावै प्रेम प्रीति में हिरदा भीजै यही दान पाता मोहिं दीजै अपना कीजै गहिये बाहीं धरिये सिर पर हाथ गुसाई चरनदास' को लेहु उबारे मैं अण्डा तुम सेवनहारे (चरनदास) Motivational Videos App Want . - ShareChat