ShareChat
click to see wallet page
search
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - तमिलनाडु में चली मुहिम पक्षी तचाओ पाढशाला स्कूलीबच्चे वाटरगार्जियन बने, में पक्षियों का बसेरा ६ हजार घरों प्रशांत शंमुगसुंदरम | कोचंबटूर छठी क्लास के गोकुल ने अपने घर पर तीन कटोरे रखे हैं। इनमें वे रोज पानी भरते हैं ताकि परिंदे गर्मियों में प्यासे न रहें। गोकुल अकेले नहीं हैं। तमिलनाडु के कई शहरों और कस्बों #{్గ్c DD के बच्चे परिंदों के लिए गर्मियों में सा़फ पानी के कटोरे रख रहे हैं। यह 5 साल से चल रही उस সুদ্মিমা  के तहत हुआ है, जहां स्कूली बच्चों को में शहरी इलाकों में रह रहे पक्षियों परेशानी के प्रति जागरूक किया गया है। उन्हें पता पक्षियों की प्यास बच्चे ज्यादा महसूस कर रहे। है कि गर्मियों में पक्षियों की मौत गांवों से ज्यादा शहरों में होती है। एक और छात्र मैगलिन बताते प्लास्टिक या टिन कै डब्बों मैं पानी हैं कि हमारे स्कूल ने सैकड़ों कटोरे अपने परिसर में खखे है। हम रीैज इनमें साफ पानी भरते है। कई   दैनै सै व्यवहार बदल सकता है वेट्रिवल बताते हैं- पहले हमने टिन के डिब्बों बार हम कटोरों के पास कुछ खाने को भी रखते में पानी रखना शुरू किया था, लेकिन इसमें हैं। मेरे स्कूल में अब खूब सारे पक्षी आते हैं। स्कूल के बच्चों को जागरूक करने की जंग लग जाता था। जंग लगे बर्तन में पक्षियों से शुरू हुई। यहां के कोयंबटूर ক্ষী বানী পিলান স ওনক্দা प्राकृतिक  यह मुहिम शहर व्यवहार इयारकैसी नेसी ट्रस्ट ने बच्चों को जागरूक करने बदल सकता है। यही प्लास्टिक के डिब्बों के साथ भी है। फिर हमने पीवीसी पाइप से सीमेंट के साथं कटोरे बनाने शुरू किए। इसके बाद कई और बालू मिलाकर कटोरे बनाने शुरू किए। लागतह्मि बने ऐँझे कटीवे वे सिर्फ वॉलेंटियर्स उनकी इसमें 2 से ढाई लीटर पानी आता है। इसमें तैयार २४ से ३० रु. की परिंदे नहा भी सकते हैं। कई वॉलेंटियर्स के कर लोगों को बांट रहे हैं जो सालों साल चलते हैं। सहयोग की वजह से यह इतना सस्ता तैयार हो इसमें जंग नहीं लगती। इसके संस्थापक वेट्रिवल पा रहा है, वयोंकि हमें मजदूरी नहीं देनी होती।  कहते हैं- हम 3 साल में हजारों कटोरे स्कूल  तमिलनाडु के अलग-्अलग शहरों के कॉलेज, कंपनियों और सरकारी दफ्तरों में दे चुके अब तक 6 हजार से ज्यादा घरों में नियमित तौर पर यह हैं। सबसे खास बात यह है कि बच्चों में पर्यावरण कटोरे रखे जा रहे हैं जहां पक्षी जुटने लगे हैं। के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भाव बढ़ रहा है। तमिलनाडु में चली मुहिम पक्षी तचाओ पाढशाला स्कूलीबच्चे वाटरगार्जियन बने, में पक्षियों का बसेरा ६ हजार घरों प्रशांत शंमुगसुंदरम | कोचंबटूर छठी क्लास के गोकुल ने अपने घर पर तीन कटोरे रखे हैं। इनमें वे रोज पानी भरते हैं ताकि परिंदे गर्मियों में प्यासे न रहें। गोकुल अकेले नहीं हैं। तमिलनाडु के कई शहरों और कस्बों #{్గ్c DD के बच्चे परिंदों के लिए गर्मियों में सा़फ पानी के कटोरे रख रहे हैं। यह 5 साल से चल रही उस সুদ্মিমা  के तहत हुआ है, जहां स्कूली बच्चों को में शहरी इलाकों में रह रहे पक्षियों परेशानी के प्रति जागरूक किया गया है। उन्हें पता पक्षियों की प्यास बच्चे ज्यादा महसूस कर रहे। है कि गर्मियों में पक्षियों की मौत गांवों से ज्यादा शहरों में होती है। एक और छात्र मैगलिन बताते प्लास्टिक या टिन कै डब्बों मैं पानी हैं कि हमारे स्कूल ने सैकड़ों कटोरे अपने परिसर में खखे है। हम रीैज इनमें साफ पानी भरते है। कई   दैनै सै व्यवहार बदल सकता है वेट्रिवल बताते हैं- पहले हमने टिन के डिब्बों बार हम कटोरों के पास कुछ खाने को भी रखते में पानी रखना शुरू किया था, लेकिन इसमें हैं। मेरे स्कूल में अब खूब सारे पक्षी आते हैं। स्कूल के बच्चों को जागरूक करने की जंग लग जाता था। जंग लगे बर्तन में पक्षियों से शुरू हुई। यहां के कोयंबटूर ক্ষী বানী পিলান স ওনক্দা प्राकृतिक  यह मुहिम शहर व्यवहार इयारकैसी नेसी ट्रस्ट ने बच्चों को जागरूक करने बदल सकता है। यही प्लास्टिक के डिब्बों के साथ भी है। फिर हमने पीवीसी पाइप से सीमेंट के साथं कटोरे बनाने शुरू किए। इसके बाद कई और बालू मिलाकर कटोरे बनाने शुरू किए। लागतह्मि बने ऐँझे कटीवे वे सिर्फ वॉलेंटियर्स उनकी इसमें 2 से ढाई लीटर पानी आता है। इसमें तैयार २४ से ३० रु. की परिंदे नहा भी सकते हैं। कई वॉलेंटियर्स के कर लोगों को बांट रहे हैं जो सालों साल चलते हैं। सहयोग की वजह से यह इतना सस्ता तैयार हो इसमें जंग नहीं लगती। इसके संस्थापक वेट्रिवल पा रहा है, वयोंकि हमें मजदूरी नहीं देनी होती।  कहते हैं- हम 3 साल में हजारों कटोरे स्कूल  तमिलनाडु के अलग-्अलग शहरों के कॉलेज, कंपनियों और सरकारी दफ्तरों में दे चुके अब तक 6 हजार से ज्यादा घरों में नियमित तौर पर यह हैं। सबसे खास बात यह है कि बच्चों में पर्यावरण कटोरे रखे जा रहे हैं जहां पक्षी जुटने लगे हैं। के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भाव बढ़ रहा है। - ShareChat