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हीनांगानतिरिक्तांगान् विद्याहीनान् विगर्हितान् । रूपद्रविणहीनांश्च सत्वहीनांश्च नाक्षिपेत् ॥ [ महाभारत, अनुशासन पर्व - १०४/३५ ] अर्थात् 👉🏻 हीन अंग वाले , अधिक अंग वाले , विद्याहीन , निन्दित , रूपहीन , धनहीन तथा बलहीन मनुष्यों पर आक्षेप नही करना चाहिए । 🌄🌄 प्रभातवंदन 🌄🌄 #❤️जीवन की सीख
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