ShareChat
click to see wallet page
search
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़ल नर्हीं कि अपना ज़माना भी तो नर्हीं आया हर्में किसी से निभाना भी तो नर्हीं आया जला के रख लिया हाथों के साथ दामन तक तुम्हें चराग़ बुझाना भी तो नरहीं आया तो फ़ासर्लों की तरह नए मकान बनाए हर्में ये शहर बसाना भी तो न्हीं आया ব্রী পুতনা ` था मिरी औँख भीगने का सबब मुझे बहाना बनाना भी तो नहीं आया 'वसीम देखना मुड़ मुड़ के वो उसी की तरफ़ किसी को छोड़ के जाना भी तो नर्हीं आया वसीम बरेलवी A99 Motivational Videos Want गज़ल नर्हीं कि अपना ज़माना भी तो नर्हीं आया हर्में किसी से निभाना भी तो नर्हीं आया जला के रख लिया हाथों के साथ दामन तक तुम्हें चराग़ बुझाना भी तो नरहीं आया तो फ़ासर्लों की तरह नए मकान बनाए हर्में ये शहर बसाना भी तो न्हीं आया ব্রী পুতনা ` था मिरी औँख भीगने का सबब मुझे बहाना बनाना भी तो नहीं आया 'वसीम देखना मुड़ मुड़ के वो उसी की तरफ़ किसी को छोड़ के जाना भी तो नर्हीं आया वसीम बरेलवी A99 Motivational Videos Want - ShareChat