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#पाटल-पाटल है ।
पाटल-पाटल है । - किसी के स्पर्शों से मेरी देह सब पाटल ्पाटल है | प्राण में जली प्रणय की लौ काम्य कौमार्य कपूर हुआ , आरती श्वास, रोम अक्षत  सिन्दूर हुआ, लाज कास्वर प्यार की पूजा के पल में समर्पित तन तुलसीदल है | लिए प्रणय पुष्पों की गंध ' साँस के सार्थवाह निकले , गीत गंधर्वी आत्मा से पूर्ण करके विवाह निकले , वृत्ति अब जैसे वंशी है, मर्म अब जैसे मादल है | देह की शिरा-शिरा गोपी गूँजता मन-वृन्दावन है, मग्न है महारास में सब ब्रह्मसुख पाने का क्षण है | हृदय के श्याम व्यथाकुल हैं, प्रीति की राधा विह्वल है | किसी के स्पर्शों से मेरी देह सब पाटल ्पाटल है | प्राण में जली प्रणय की लौ काम्य कौमार्य कपूर हुआ , आरती श्वास, रोम अक्षत  सिन्दूर हुआ, लाज कास्वर प्यार की पूजा के पल में समर्पित तन तुलसीदल है | लिए प्रणय पुष्पों की गंध ' साँस के सार्थवाह निकले , गीत गंधर्वी आत्मा से पूर्ण करके विवाह निकले , वृत्ति अब जैसे वंशी है, मर्म अब जैसे मादल है | देह की शिरा-शिरा गोपी गूँजता मन-वृन्दावन है, मग्न है महारास में सब ब्रह्मसुख पाने का क्षण है | हृदय के श्याम व्यथाकुल हैं, प्रीति की राधा विह्वल है | - ShareChat