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रोग निवारण #मंत्र एवं मंत्र जप
मंत्र एवं मंत्र जप - तन्त्र-मन्त्र द्वारा रोग निवारण - १०२ दुर्गा सप्तशती से रोग निवारण अब मैं दुर्गासप्तशती में से कुछविशेष रोगनाशक मंत्र दे रहा हूँ। उनका उपयोग  करके आप अपना अनुभव मुझे अवश्य लिखें। जो मंत्र जाप आप करना चाहते हैं उसे ग्रहण काल में १००८ बार दोहराना चाहिये। उससे मंत्र और भी शक्तिशाली होगा। शुरू करें। मंत्रोच्चारण से जो लहरें निर्माण होती हैं, वे रोग पर असर शुद्घ उच्चारण करती हैं और रोग समूल नष्ट हो जाता है। मंत्र जप हर रोज १०८ बार करें। नसों की बीमारी हटाने के लिए ३ँ॰ ऊं उमादेवीभ्याम् नमः।| की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ यं यमघण्टाभ्यां नमः। । नाक औँखों की बीमारियों हेतु मंग्र :- ३ँ॰ शां शाकिनीभ्यां नमः। । इस मंत्र से आँखों की बीमारी चली जाती हैं। सूर्योदय से पूर्व आँखों पर से लाल झटकारने से आँख का फूला चला जाता है। কল ওনাকে যা कान की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ दुं द्वां द्वारवासिनीभ्यां नमः। गले की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ चि चित्रघण्टाभ्यां नमः| जीभ की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ सं सवमंगलाभ्यां नमः| स्तनविकार के लिए मंत्र :- ३ँ॰ मं महादेवीभ्यां नमः। इस मंत्र से स्तनविकार नष्ट हो जाते हैं। जिस माता का दूध कम है उसे बच्चे वस्त्र से सात दिन मंत्र कहकर झाडने से दूध ठीक आने लागता है। आरोग्य कारक मंत्र :- निम्न मंत्र से आरोग्य की प्राप्ति होती है ३ँ॰ हूं सः। मंत्र रोजाना दस बार पढ़़ें। 39f गुदा द्वार पर मस्सों के रूप में दिखाई देता है। इस रोग में रोगी को रसदार यह भोजन हा खाना चाहिए तथा पेट भी साफ होना चाहिए। इस बीमारी को दूर करने के मंगल के दिन पांव के दोनों अंगूठों पर यह धागें लपेट कर लिए लाल धागे को बट लें बांध दें। इस प्रयोग से यह रोग समाप्त हो जाता है तन्त्र-मन्त्र द्वारा रोग निवारण - १०२ दुर्गा सप्तशती से रोग निवारण अब मैं दुर्गासप्तशती में से कुछविशेष रोगनाशक मंत्र दे रहा हूँ। उनका उपयोग  करके आप अपना अनुभव मुझे अवश्य लिखें। जो मंत्र जाप आप करना चाहते हैं उसे ग्रहण काल में १००८ बार दोहराना चाहिये। उससे मंत्र और भी शक्तिशाली होगा। शुरू करें। मंत्रोच्चारण से जो लहरें निर्माण होती हैं, वे रोग पर असर शुद्घ उच्चारण करती हैं और रोग समूल नष्ट हो जाता है। मंत्र जप हर रोज १०८ बार करें। नसों की बीमारी हटाने के लिए ३ँ॰ ऊं उमादेवीभ्याम् नमः।| की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ यं यमघण्टाभ्यां नमः। । नाक औँखों की बीमारियों हेतु मंग्र :- ३ँ॰ शां शाकिनीभ्यां नमः। । इस मंत्र से आँखों की बीमारी चली जाती हैं। सूर्योदय से पूर्व आँखों पर से लाल झटकारने से आँख का फूला चला जाता है। কল ওনাকে যা कान की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ दुं द्वां द्वारवासिनीभ्यां नमः। गले की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ चि चित्रघण्टाभ्यां नमः| जीभ की बीमारियों हेतु मंत्र :- ३ँ॰ सं सवमंगलाभ्यां नमः| स्तनविकार के लिए मंत्र :- ३ँ॰ मं महादेवीभ्यां नमः। इस मंत्र से स्तनविकार नष्ट हो जाते हैं। जिस माता का दूध कम है उसे बच्चे वस्त्र से सात दिन मंत्र कहकर झाडने से दूध ठीक आने लागता है। आरोग्य कारक मंत्र :- निम्न मंत्र से आरोग्य की प्राप्ति होती है ३ँ॰ हूं सः। मंत्र रोजाना दस बार पढ़़ें। 39f गुदा द्वार पर मस्सों के रूप में दिखाई देता है। इस रोग में रोगी को रसदार यह भोजन हा खाना चाहिए तथा पेट भी साफ होना चाहिए। इस बीमारी को दूर करने के मंगल के दिन पांव के दोनों अंगूठों पर यह धागें लपेट कर लिए लाल धागे को बट लें बांध दें। इस प्रयोग से यह रोग समाप्त हो जाता है - ShareChat