ShareChat
click to see wallet page
search
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - सुअसति आथि बाणी बरमाउासति सुहाणु सदा मनि चाउ।।कवणु सु वेला वखतु कवणु कवण थिति कवणु নিন্তু वारु।।कवणि सि रुती माहु कवणु होआ लेखु  आकारुाावेल न पाईआ पंडती जि होवै UIUII लेखु  वखतु न पाइओ कादीआ जि लिखनि gేRTUII मीठा अर्थःहे भाई! वह कौन सा समय था? वह कौन सा वक्त था? वह कौन सी तिथि और कौन सा दिन था? वह कौन सी ऋतु और कौन सा महीना था, जब इसकी గా रचना हुई जब उस समय का पता पंडितों को भी नहीं चला, अन्यथा में ज़रूर लिखते अर्थात हिंदू धर्मग्रंथों में भी वे इसका ' वर्णन 'पुराणों तेरा सृष्टि के सटीक आरंभ का समय दर्ज नहीं है। उस वक्त का ज्ञान काज़ियों को भी नहीं मिल सका, वरना वे उसे ' क़ुरान' की आयतों में श्री गुरु ; नानक देव जी आगे समझा रहे हैं कि सृष्टि कब दर्ज करते। भाणा बुद्धि से परे है। चाहे वह विद्वान यह बताना मनुष्य की 5$ g$ पंडित हों या काज़ी, किसी के पास भी उस "शून्य" काल की सटीक जानकारी नहीं है। हम चाहे कितने भी ज्ञानी बन जाएं॰ प्रकृति और के रहस्यों को पूरी तरह नहीं जान सकते। पसात्मा सुअसति आथि बाणी बरमाउासति सुहाणु सदा मनि चाउ।।कवणु सु वेला वखतु कवणु कवण थिति कवणु নিন্তু वारु।।कवणि सि रुती माहु कवणु होआ लेखु  आकारुाावेल न पाईआ पंडती जि होवै UIUII लेखु  वखतु न पाइओ कादीआ जि लिखनि gేRTUII मीठा अर्थःहे भाई! वह कौन सा समय था? वह कौन सा वक्त था? वह कौन सी तिथि और कौन सा दिन था? वह कौन सी ऋतु और कौन सा महीना था, जब इसकी గా रचना हुई जब उस समय का पता पंडितों को भी नहीं चला, अन्यथा में ज़रूर लिखते अर्थात हिंदू धर्मग्रंथों में भी वे इसका ' वर्णन 'पुराणों तेरा सृष्टि के सटीक आरंभ का समय दर्ज नहीं है। उस वक्त का ज्ञान काज़ियों को भी नहीं मिल सका, वरना वे उसे ' क़ुरान' की आयतों में श्री गुरु ; नानक देव जी आगे समझा रहे हैं कि सृष्टि कब दर्ज करते। भाणा बुद्धि से परे है। चाहे वह विद्वान यह बताना मनुष्य की 5$ g$ पंडित हों या काज़ी, किसी के पास भी उस "शून्य" काल की सटीक जानकारी नहीं है। हम चाहे कितने भी ज्ञानी बन जाएं॰ प्रकृति और के रहस्यों को पूरी तरह नहीं जान सकते। पसात्मा - ShareChat