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#poet #बेनाम शायर #shayar #विकास बेदर्दी की शायरी ऐ शायर हसीन #विकास की कलम से दर्दे शायर
poet - येअलम भी उठाना पडता है ज़ख़्म अपनों से खाना पड़ता है ऐसा मौक़ा भी आता है अकरम आँसुओं को छुपाना पड़ता है अकरम तिलहरी Your uotein येअलम भी उठाना पडता है ज़ख़्म अपनों से खाना पड़ता है ऐसा मौक़ा भी आता है अकरम आँसुओं को छुपाना पड़ता है अकरम तिलहरी Your uotein - ShareChat