#ॐ नमः शिवाय
शीश गंगा वहे ,अंग भस्मी रमे ,
न्यारी न्यारी l
शोभा कहाँ तक कहूँ शिव तुम्हारी ll
लिपटे रहते गले बीच काले ,
पीते बिजिया को भर-भर के प्याले l
पी धतुरा कली ,
मुंडमाला डली, खल संहारी ll
शोभा कहाँ....
शीश पर चन्द्रमा है चमकता ,
संग लोचन तुम्हारा झलकता l
धन्य गौरा पती ,
धन्य जोगी जती, डमरूधारी ll
शोभा कहाँ....
पहना करते प्रभू बाघ छाला ,
नाग कुंडल, गले मुंडमाला l
करते वे ध्यान हैं ,
राम गुनगान हैं , शिवकामारी
शोभा कहाँ....
ध्यान शंकर से कोई लगाये ,
उनसे चारौ पदारथ वो पाये l
गाता रघुनाथ है ,जोड़कर हाथ है,दर-भिखारी
शोभा कहाँ....
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