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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - ऊँअँसुप्रभातऊँऊँ बलिदान दिवस क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ  #नमोस्तृते कार्तवीर्याय सान्याल(१९४२) श्रीहरि पञ्चाङ्ग|| शनिदेव जन्मदिवस सृष्टि संवत१९५५८८५१२६ ক্কানিক্াঠী সন্সথনাথ মুদ(ং৪০c) चम्बल के सन्त सुब्बाराव(१९२९) युगाब्द ५१२७ सुविचार সাত কা নিক্ধস মণন ২০৫২ जीवन में हमने अपनी सुविधाओं से समझौता  ०७फरवरी२०२६ करना छोड़ दिया है यही कारण है अब हमारे लिए रिश्ते और सहयोग गौड़ हो चले हैं।हमें अपने षष्ठी३४९तक फाल्गुन कृष्ण संभावित सुख के आगे वर्तमान और अतीत का  चित्रा नक्षत्र ०३ २५ तक लगता और हम अंतहीन अदृश्य जीवन चुभने कल्पनाओं पे सवार होकर आगे की भविष्य की उपरांत स्वाती नक्षत्र यात्रा पर जाना चाहते हैं।यदि हम अपने आज से प्रेम नहीं कर सकते तो आगमन का स्वागत भी रवियोग/ भद्रा ३:३९ से नहीं कर सकेंगे क्योंकि हम अपने अंतर्मन से प्रेम यायिजययोग खो चुके होते हैं। सर्वार्थसिद्धि योग जीवन का आनंद वही ले सकता है जो वर्तमान  सरेश जायसवाल में सुख खोजता है जब हम अपने आज को  चंद्रमा तुला राशि में १४:३३ अद्भुत बना लेंगे तो कल का चमत्कारिक होना  राहुकाल ९०० से १०३०  निश्चित है क्योंकि हमारे आने वाले कल का सूर्योदय ६:१३ से १७२९ जन्मदाता हमारा आज ही होता है जय विरश्री हनुमानजी शुभ शनिश्चर ऊँअँसुप्रभातऊँऊँ बलिदान दिवस क्रांतिकारी शचीन्द्रनाथ  #नमोस्तृते कार्तवीर्याय सान्याल(१९४२) श्रीहरि पञ्चाङ्ग|| शनिदेव जन्मदिवस सृष्टि संवत१९५५८८५१२६ ক্কানিক্াঠী সন্সথনাথ মুদ(ং৪০c) चम्बल के सन्त सुब्बाराव(१९२९) युगाब्द ५१२७ सुविचार সাত কা নিক্ধস মণন ২০৫২ जीवन में हमने अपनी सुविधाओं से समझौता  ०७फरवरी२०२६ करना छोड़ दिया है यही कारण है अब हमारे लिए रिश्ते और सहयोग गौड़ हो चले हैं।हमें अपने षष्ठी३४९तक फाल्गुन कृष्ण संभावित सुख के आगे वर्तमान और अतीत का  चित्रा नक्षत्र ०३ २५ तक लगता और हम अंतहीन अदृश्य जीवन चुभने कल्पनाओं पे सवार होकर आगे की भविष्य की उपरांत स्वाती नक्षत्र यात्रा पर जाना चाहते हैं।यदि हम अपने आज से प्रेम नहीं कर सकते तो आगमन का स्वागत भी रवियोग/ भद्रा ३:३९ से नहीं कर सकेंगे क्योंकि हम अपने अंतर्मन से प्रेम यायिजययोग खो चुके होते हैं। सर्वार्थसिद्धि योग जीवन का आनंद वही ले सकता है जो वर्तमान  सरेश जायसवाल में सुख खोजता है जब हम अपने आज को  चंद्रमा तुला राशि में १४:३३ अद्भुत बना लेंगे तो कल का चमत्कारिक होना  राहुकाल ९०० से १०३०  निश्चित है क्योंकि हमारे आने वाले कल का सूर्योदय ६:१३ से १७२९ जन्मदाता हमारा आज ही होता है जय विरश्री हनुमानजी शुभ शनिश्चर - ShareChat