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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कोई छिड़कता है जख्मों पर नमक कोई उनका मरहम बन जाता है, कोई छोड़ देता है बीच राह हाथ. ೦೦೧ कोई मरते दम तक साथ निभाता है कोई उडाता है मजाक जज्बातों का कोई ख़ामोशी भी समझ जाता है कोई अपना होकर भी अपना नही बन पता कोई पराया होकर भी अपना बन जाता है।। कोई छिड़कता है जख्मों पर नमक कोई उनका मरहम बन जाता है, कोई छोड़ देता है बीच राह हाथ. ೦೦೧ कोई मरते दम तक साथ निभाता है कोई उडाता है मजाक जज्बातों का कोई ख़ामोशी भी समझ जाता है कोई अपना होकर भी अपना नही बन पता कोई पराया होकर भी अपना बन जाता है।। - ShareChat