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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - 3 < = %4 Cek Tu Hi Tu Guw Ji पुत्तर हम सभी की आदतें और वृत्तियाँ एक चक्र की तरह हैं, शुरुआत ' में हम गाड़ी अर्थात ( हमारी पूरी आदतें) हम चला रहे होते है लेकिन एक बिंदु के बाद गाडी हमें चलाने लगती है .! आरंभिक दौर में ह्म सोचते हैं कि गाड़ी हमारे नियंत्रण में हैं लेकिन चक्र का प्रभाव धीरे धीरे' आदतें ( वृत्तियाँ ) इतनी गहरी हिमारी ' चाहकर भी ब्रेक नहीं लगा पाते। गा़ड़ी हमारी  आदतें ) हमें कि हम हो जाती हैं' अपनी मर्ज़ी के रास्तों पर ले जाने लगती है।तुम्हारी वृत्तियों का निर्माण पानी की उस ढलान की तरह हैं जो बार बार बहने से एक गहरा रास्ता बना लेती हैं जरा सी चूकः यानी बेहोशी .!! जब तक बीज छोटा है॰ उसे उखाड़ना आसान है, लेकिन जब वह जड़े पकड़ कर स्वभाव बन जाता है॰ तो वह हमारी स्वेच्छा अर्थांत सच या नियंत्रण से बाहर हो जाता है .!! जब इंसान बाहरी आकर्षणों के पीछे भागते भागते ठोकरें खाता है, तभी उसका अहंकार टूटता है और वही चोट उसे भीतर मुड़ने ( सह आत्मा के मिलन ) का मार्ग दिखाती हैl की लात ही दुखों | अक्सर सुख के मार्ग का द्वार खोलती है...!! 3 < = %4 Cek Tu Hi Tu Guw Ji पुत्तर हम सभी की आदतें और वृत्तियाँ एक चक्र की तरह हैं, शुरुआत ' में हम गाड़ी अर्थात ( हमारी पूरी आदतें) हम चला रहे होते है लेकिन एक बिंदु के बाद गाडी हमें चलाने लगती है .! आरंभिक दौर में ह्म सोचते हैं कि गाड़ी हमारे नियंत्रण में हैं लेकिन चक्र का प्रभाव धीरे धीरे' आदतें ( वृत्तियाँ ) इतनी गहरी हिमारी ' चाहकर भी ब्रेक नहीं लगा पाते। गा़ड़ी हमारी  आदतें ) हमें कि हम हो जाती हैं' अपनी मर्ज़ी के रास्तों पर ले जाने लगती है।तुम्हारी वृत्तियों का निर्माण पानी की उस ढलान की तरह हैं जो बार बार बहने से एक गहरा रास्ता बना लेती हैं जरा सी चूकः यानी बेहोशी .!! जब तक बीज छोटा है॰ उसे उखाड़ना आसान है, लेकिन जब वह जड़े पकड़ कर स्वभाव बन जाता है॰ तो वह हमारी स्वेच्छा अर्थांत सच या नियंत्रण से बाहर हो जाता है .!! जब इंसान बाहरी आकर्षणों के पीछे भागते भागते ठोकरें खाता है, तभी उसका अहंकार टूटता है और वही चोट उसे भीतर मुड़ने ( सह आत्मा के मिलन ) का मार्ग दिखाती हैl की लात ही दुखों | अक्सर सुख के मार्ग का द्वार खोलती है...!! - ShareChat