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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - दोऊ लोचन मूँद कैबैठि कहा भयोजो । रहिओ बकधिआन लगाइओपन्हात விதரி फिरिओ लीएसात समुद्रनि " परलोक गवाइओ [ #dT हे भाई! अपनी दोनों आँखों को मूँद कर बैठकर बगुले की तरह ध्यान लगाने का ढोंग ना किया करों ? जैसे बगुला एक टांग पर भिखारी होकरमछली पकड़ने केलिए ' ध्यान लगाता है, वैसे ही rdST' कपटी मनुष्य दुनिया को दिखाने केलिए समाधि लगाता है, पर जिओ मन में उसके लालच और चालाकी होती है। मनुष्य तीर्थों के स्नान के नामु पर सातों समुद्रों में नहाता फिरता পঙ্াভা है, लेकिन इस तीर्थों के स्नान से उसकी बाहरी सफाई से नतो उसे इस संसार में सम्मान मिलता है क्योंकि उसकी नीयत साफ বাল नहीं होती औरन ही उसे परलोक ईश्वरकी दरगाह में जगह मिलती है। उसने अपना यह जन्म और अगला जन्म दोनों को ही बाबा गँवा दिए है। गुरु साहब स्पष्ट करते हैंकिन तो आँखें बंद करने के नाटक करने से, न ही चालाकियों से और न ही केवल तीर्थों जी के स्नान से प्रभु मिलते हैं। प्रभु केवल प्रेम से मिलते हैं।मनुष्य चाहे जितनी चालाकियाँ करे अंत में जीत उसी की होती है जिसका हृदय सा़फ होता है औरजिसमें प्रेम होता है। दोऊ लोचन मूँद कैबैठि कहा भयोजो । रहिओ बकधिआन लगाइओपन्हात விதரி फिरिओ लीएसात समुद्रनि " परलोक गवाइओ [ #dT हे भाई! अपनी दोनों आँखों को मूँद कर बैठकर बगुले की तरह ध्यान लगाने का ढोंग ना किया करों ? जैसे बगुला एक टांग पर भिखारी होकरमछली पकड़ने केलिए ' ध्यान लगाता है, वैसे ही rdST' कपटी मनुष्य दुनिया को दिखाने केलिए समाधि लगाता है, पर जिओ मन में उसके लालच और चालाकी होती है। मनुष्य तीर्थों के स्नान के नामु पर सातों समुद्रों में नहाता फिरता পঙ্াভা है, लेकिन इस तीर्थों के स्नान से उसकी बाहरी सफाई से नतो उसे इस संसार में सम्मान मिलता है क्योंकि उसकी नीयत साफ नहीं होती औरन ही उसे परलोक ईश्वरकी दरगाह में जगह मिलती है। उसने अपना यह जन्म और अगला जन्म दोनों को ही बाबा गँवा दिए है। गुरु साहब स्पष्ट करते हैंकिन तो आँखें बंद करने के नाटक करने से, न ही चालाकियों से और न ही केवल तीर्थों जी के स्नान से प्रभु मिलते हैं। प्रभु केवल प्रेम से मिलते हैं।मनुष्य चाहे जितनी चालाकियाँ करे अंत में जीत उसी की होती है जिसका हृदय सा़फ होता है औरजिसमें प्रेम होता है। - ShareChat