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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - মড়াল ಹಗಾ' बार मेरा इश्क़ मुकम्मल कर दे मिल मैं जो पागल हूं मुझे और भी पागल कर दे तेरे हिज्र के सदमे नहीं झेले जाते अब बारिशें वस्ल से इस दश्त को जलथल कर दे एक नज़र पूरी मोहब्बत से कभी देख मुझे और फिर नज़रे करम मुसलसल कर दे मुझपे आता है मोहब्बत में करिश्में करना तुझको तु तो कीकर को भी छू कर उसे संदल कर दे है कडी धूप में चले फिरते गुज़री 34 ए ख़ुदा अब मेरे सहराओं पे बादल कर दे Motivational Videos Aop Want মড়াল ಹಗಾ' बार मेरा इश्क़ मुकम्मल कर दे मिल मैं जो पागल हूं मुझे और भी पागल कर दे तेरे हिज्र के सदमे नहीं झेले जाते अब बारिशें वस्ल से इस दश्त को जलथल कर दे एक नज़र पूरी मोहब्बत से कभी देख मुझे और फिर नज़रे करम मुसलसल कर दे मुझपे आता है मोहब्बत में करिश्में करना तुझको तु तो कीकर को भी छू कर उसे संदल कर दे है कडी धूप में चले फिरते गुज़री 34 ए ख़ुदा अब मेरे सहराओं पे बादल कर दे Motivational Videos Aop Want - ShareChat