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##हरि_आये_हरियाणे_नूं सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूँ पूर्ण परमात्मा कविर्देव अर्थात कबीर परमेश्वर जिस क्षेत्र में आए उसका नाम हरयाणा अर्थात् परमात्मा के आने वाला पवित्र स्थल, जिसके कारण आस-पास के क्षेत्र को हरिआना (हरियाणा) कहने लगे। क्योंकि सन् 1727 में फाल्गुन मास की सुदी द्वादशी को परमेश्वर कबीर जी सतलोक से आकर गरीबदास जी को मिले थे।
#हरि_आये_हरियाणे_नूं - (1U10) तपणतं छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर  ग्राम कबीर साहिब जी जिंदा बाबा रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् १७८४ , सन् को मिले थे। इसीलिए संत १७२७ में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी गरीबदास जी ने कहा हैः सर्व कला सतगुरु साहेब की॰ हरि आए हरियाणे नूँ।  में हुआ " 8, उन्हीं परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी का अवतरण हरियाणा प्रात जिनके विषय में आदरणीय संत गरीबदास जी ने अपनी अमरवाणी में कहा हैः दाणें नू। पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण, क्यों फिरदा दाणें  सर्ब कला सतगुरु साहेब की हरि आए हरियाणे नू।। (1U10) तपणतं छुड़ानी, जिला झज्जर, हरियाणा में जन्मे संत गरीबदास जी को परमेश्वर  ग्राम कबीर साहिब जी जिंदा बाबा रूप में सतलोक से आकर विक्रमी संवत् १७८४ , सन् को मिले थे। इसीलिए संत १७२७ में फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वादशी गरीबदास जी ने कहा हैः सर्व कला सतगुरु साहेब की॰ हरि आए हरियाणे नूँ।  में हुआ " 8, उन्हीं परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी का अवतरण हरियाणा प्रात जिनके विषय में आदरणीय संत गरीबदास जी ने अपनी अमरवाणी में कहा हैः दाणें नू। पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण, क्यों फिरदा दाणें  सर्ब कला सतगुरु साहेब की हरि आए हरियाणे नू।। - ShareChat