विजया एकादशी
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिन्दू धर्म में विजया एकादशी के व्रत का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। विजया एकादशी व्रत विजय प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। यह व्रत इस बात को दर्शाता है कि जब कोई व्यक्ति भयंकर शत्रुओं से घिरा हो और उसे लग रहा हो कि उसकी पराजय उसके सामने खड़ी है, तो उस विकट स्थिति में यदि वह व्यक्ति विजय प्राप्त करना चाहता है, तो विजया एकादशी उस व्यक्ति को विजय दिलाने की क्षमता रखती है। ऐसी कथा है कि माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए जब राम अपनी सेना समेत समुद्र किनारे पहुंचे तो उन्होंने अपने अनुज लक्ष्मण से कहा कि, हे सुमित्रानंदन, किस पुण्य के प्रताप से हम इस समुद्र को पार करेंगे।' तब लक्ष्मण जी बोले, 'हे पुरुषोत्तम, आप आदि पुरुष हैं, सब कुछ जानते हैं। यहां से कुछ दूरी पर बकदालभ्य मुनि का आश्रम है। प्रभु आप उनके पास जाकर उपाय पूछें। इसके पश्चात जब प्रभु श्री राम ने बकदालभ्य ऋषि के पास पहुंचकर अपनी समस्या बताई तो मुनिश्री बोले- 'हेराम, फाल्गुन कृष्ण पक्ष में जो 'विजया एकादशी' आती है, उसका व्रत करने से आपकी निश्चित विजय होगी और आप अपनी सेना के साथ समुद्र भी अवश्य पार कर लेंगे।' मुनि के कथनानुसार, रामचंद्र जी ने इस दिन विधिपूर्वक व्रत किया। व्रत को करने से श्री राम ने लंका पर विजय पाई और माता सीता को प्राप्त किया। #शुभ कामनाएँ 🙏


