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#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 - *दूसरा श्लोकः* लग्नेशे बलसंयुक्ते केन्द्रकोणगते शुभे ఇఓకలా: पापग्रहैरसन्दृष्टे देहसौख्यं || *अर्थः* जिस-किसी की कुण्डली में लग्नेश बलवान होकर केन्द्र (१-४-७-१०) भाव और कोण (९-५) भाव में स्थित हो तथा शुभयुक्त दृष्ट हो और पापग्रहों से स्वयं शुभ ग्रह हो अथवा देखा जाता न हो, तो पण्डितों द्वारा मनुष्य को शरीर सुख मिलेगा| *विस्तारः* लग्नेश का बलवान होनाः लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को शक्ति और आत्मविश्वास देता है। केन्द्र या कोण भाव में होनाः केन्द्र या कोण भाव में होने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और सुख मिलता है। शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट और सुख  मिलता है। होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा  पापग्रहों से न देखा जानाः पापग्रहों से न देखा जाने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है। *दूसरा श्लोकः* लग्नेशे बलसंयुक्ते केन्द्रकोणगते शुभे ఇఓకలా: पापग्रहैरसन्दृष्टे देहसौख्यं || *अर्थः* जिस-किसी की कुण्डली में लग्नेश बलवान होकर केन्द्र (१-४-७-१०) भाव और कोण (९-५) भाव में स्थित हो तथा शुभयुक्त दृष्ट हो और पापग्रहों से स्वयं शुभ ग्रह हो अथवा देखा जाता न हो, तो पण्डितों द्वारा मनुष्य को शरीर सुख मिलेगा| *विस्तारः* लग्नेश का बलवान होनाः लग्नेश का बलवान होना व्यक्ति को शक्ति और आत्मविश्वास देता है। केन्द्र या कोण भाव में होनाः केन्द्र या कोण भाव में होने से व्यक्ति को जीवन में सफलता और सुख मिलता है। शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट होनाः शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट और सुख  मिलता है। होने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा  पापग्रहों से न देखा जानाः पापग्रहों से न देखा जाने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है। - ShareChat