Abhilas Chauhan
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#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - जन्म कुंडली में गुरु और शनि ग्रह वक्री होने के प्रभावः *्वक्री गुरुः* ५. ९०% सेल्फ study या ज्ञान खुद मेहनत करके अर्जित करेगा। self learner पढ़ाई में ब्रेक दे सकता हैं या घर के शुभ काम रुकते हैं। 6 हो तो दुनिया explore करें। ७. ज्ञान पाना फ्री का ज्ञान बाटे तो तुम्हारी वैल्यू गिर गई समझो। 8. *्वक्री शनिः* ५. ९०% जो भी जीवन में अजित करेगा वह made self होके करेगा| self made ६. काम को बीच बीच में छोड़ने की आदत हो सकती हैं। ७. बिजनेस आइडिया के लिए दुनिया explore करें। 8. फ्री की सेवा की तो आपकी skill value गिर गई समझो। जन्म कुंडली में गुरु और शनि ग्रह वक्री होने के प्रभावः *्वक्री गुरुः* ५. ९०% सेल्फ study या ज्ञान खुद मेहनत करके अर्जित करेगा। self learner पढ़ाई में ब्रेक दे सकता हैं या घर के शुभ काम रुकते हैं। 6 हो तो दुनिया explore करें। ७. ज्ञान पाना फ्री का ज्ञान बाटे तो तुम्हारी वैल्यू गिर गई समझो। 8. *्वक्री शनिः* ५. ९०% जो भी जीवन में अजित करेगा वह made self होके करेगा| self made ६. काम को बीच बीच में छोड़ने की आदत हो सकती हैं। ७. बिजनेस आइडिया के लिए दुनिया explore करें। 8. फ्री की सेवा की तो आपकी skill value गिर गई समझो। - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - जन्म कुंडली में गुरु और शनि ग्रह वक्री होने के प्रभावः *्वक्री गुरुः* १. ऐसा जातक अपने से बड़ों को भी समझाता हुआ मिलेगा| लोग निराश हो जाए वहां इसे उमंग की २. जहां a किरण दिखेगी। ३. एक सच्चे गुरू के लिए जीवन भर प्रयासरत रहते है, बाकी रह गया। गुरू ऋण कर लेगा लेकिन ೫ೇ೯ ` ४. किताब मंगा लेगा , जानकारी पढ़ने में टालेगा | *्वक्री शनिः* १. ऐसा जातक ९०% जल्दी mature हो जाता हैं। लेकिन एक ही समय में २. काम करने में आलस्य करेगा  भारी काम उठा लेगा| करने में खुद का ही सहारा बनना ३. कैरियर को स्थापित पडता हैं। योजनाएं बहुत बना लेगा ऐसा करूंगा वैसा करूंगा और 4 होँंगे आकस्मिक। काम जन्म कुंडली में गुरु और शनि ग्रह वक्री होने के प्रभावः *्वक्री गुरुः* १. ऐसा जातक अपने से बड़ों को भी समझाता हुआ मिलेगा| लोग निराश हो जाए वहां इसे उमंग की २. जहां a किरण दिखेगी। ३. एक सच्चे गुरू के लिए जीवन भर प्रयासरत रहते है, बाकी रह गया। गुरू ऋण कर लेगा लेकिन ೫ೇ೯ ` ४. किताब मंगा लेगा , जानकारी पढ़ने में टालेगा | *्वक्री शनिः* १. ऐसा जातक ९०% जल्दी mature हो जाता हैं। लेकिन एक ही समय में २. काम करने में आलस्य करेगा  भारी काम उठा लेगा| करने में खुद का ही सहारा बनना ३. कैरियर को स्थापित पडता हैं। योजनाएं बहुत बना लेगा ऐसा करूंगा वैसा करूंगा और 4 होँंगे आकस्मिक। काम - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - जन्म कुंडली में गुरु और शनि ग्रह वक्री हो तो क्या प्रभाव होगा जाने ।l जन्म कुंडली में गुरु और शनि ग्रह वक्री हो तो क्या प्रभाव होगा जाने ।l - ShareChat
विवाह के योग: #✡️सितारों की चाल🌠 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
✡️सितारों की चाल🌠 - विवाह के योगः सप्तम भाव र्में विभिन्न ग्रहों की स्थिति के अनुसार विवाह के योग बनते हैंः १. *सप्तम में बुध*ः २० वर्ष से योग (किसी अशुभ ग्रहों की दृष्टि न हो) बुध की स्थिति विवाह को जल्दी और सुखद बनाती है। *सप्तम में गुरु*ः २१ वर्ष से योग (लड़कियों की कुंडली  २ में गुरु मज़बूत " शादी होती है) पर जल्द गुरु की स्थिति विवाह को शुभ और सुखद बनाती है। *्कुंडली में सप्तम में चंद्र*ः २५ वर्ष तक शादी और 3. पसंदीदा जीवनसाथी चंद्र की स्थिति विवाह को सुखद और प्रेमपूर्ण बनाती है।   में शुक्र*ः २६ वर्ष से योग और जीवन साथी ४. *सप्तम करने वाला प्यार शुक्र की स्थिति विवाह को प्रेमपूर्ण और सुखद बनाती है। *सप्तम में सूर्य या राहु*ः २७ वर्ष से योग बनते हैं 5. सूर्य या राहु की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण बना सकती है। ६. *सप्तम में मंगल*ः २८ वर्ष से योग बनते हैं मंगल की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण सकती है। बना ७. *सप्तम में शनि या केतु*ः ३० वर्ष के बाद योग बनते हैं शनि या केतु की स्थिति विवाह को देर से और संघर्षपूर्ण  बना सकती है। विवाह के योगः सप्तम भाव र्में विभिन्न ग्रहों की स्थिति के अनुसार विवाह के योग बनते हैंः १. *सप्तम में बुध*ः २० वर्ष से योग (किसी अशुभ ग्रहों की दृष्टि न हो) बुध की स्थिति विवाह को जल्दी और सुखद बनाती है। *सप्तम में गुरु*ः २१ वर्ष से योग (लड़कियों की कुंडली  २ में गुरु मज़बूत " शादी होती है) पर जल्द गुरु की स्थिति विवाह को शुभ और सुखद बनाती है। *्कुंडली में सप्तम में चंद्र*ः २५ वर्ष तक शादी और 3. पसंदीदा जीवनसाथी चंद्र की स्थिति विवाह को सुखद और प्रेमपूर्ण बनाती है।   में शुक्र*ः २६ वर्ष से योग और जीवन साथी ४. *सप्तम करने वाला प्यार शुक्र की स्थिति विवाह को प्रेमपूर्ण और सुखद बनाती है। *सप्तम में सूर्य या राहु*ः २७ वर्ष से योग बनते हैं 5. सूर्य या राहु की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण बना सकती है। ६. *सप्तम में मंगल*ः २८ वर्ष से योग बनते हैं मंगल की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण सकती है। बना ७. *सप्तम में शनि या केतु*ः ३० वर्ष के बाद योग बनते हैं शनि या केतु की स्थिति विवाह को देर से और संघर्षपूर्ण  बना सकती है। - ShareChat
नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखें #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️सितारों की चाल🌠
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखें वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति विशेष की पहचान ज्ञात हो उसे नाम कहते है। बच्चे के जन्म लेने पर हम उसे एक नाम देते हैं जो उसकी पहचान बन जाता है। नाम नवीन, मधुर और सार्थक हो तो लोग सुनते ही कह उठते हैं वाह! क्या नाम है, इसका तो कोई जवाब ही नर्ही। बच्चे का जन्म जिस नक्षत्र के जिस चरण में हुआ हो, नक्षत्र ಕತಳ' चरण के अक्षर के अनुरूप बच्चे का जन्म नाम रखना चाहिए। जन्म नाम और बोलते नाम ्में अन्तर नर्ही होना चाहिए।  ब्राह्मण वर्ण को - उपनाम (सरनेम) शर्मा मंगल सूचक रखने चाहिए। নথা নাস क्षत्रिय वर्ण को - उपनाम  वर्मा নথা নাস নলনামক ম্রন ঘরাটিতI वैश्य वर्ण को गुप्ता उपनाम तथा नाम- थनन्धान्य सूचक रखने चाहिए। को ಿ೯೯f' उपनाम दास तथा नाम- सेवा वाचक रखने चाहिए। नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखें वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति विशेष की पहचान ज्ञात हो उसे नाम कहते है। बच्चे के जन्म लेने पर हम उसे एक नाम देते हैं जो उसकी पहचान बन जाता है। नाम नवीन, मधुर और सार्थक हो तो लोग सुनते ही कह उठते हैं वाह! क्या नाम है, इसका तो कोई जवाब ही नर्ही। बच्चे का जन्म जिस नक्षत्र के जिस चरण में हुआ हो, नक्षत्र ಕತಳ' चरण के अक्षर के अनुरूप बच्चे का जन्म नाम रखना चाहिए। जन्म नाम और बोलते नाम ्में अन्तर नर्ही होना चाहिए।  ब्राह्मण वर्ण को - उपनाम (सरनेम) शर्मा मंगल सूचक रखने चाहिए। নথা নাস क्षत्रिय वर्ण को - उपनाम  वर्मा নথা নাস নলনামক ম্রন ঘরাটিতI वैश्य वर्ण को गुप्ता उपनाम तथा नाम- थनन्धान्य सूचक रखने चाहिए। को ಿ೯೯f' उपनाम दास तथा नाम- सेवा वाचक रखने चाहिए। - ShareChat
नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखने के लिए निम्नलिखित जानकारी का पालन करें: *नक्षत्र और उनके चरण:* 1. अश्विनी - चू, चे, चो, ला 2. भरणी - ली, लू, ले, लो 3. कृत्तिका - अ, ई, उ, ए 4. रोहिणी - ओ, वा, वी, वू 5. मृगशिरा - वे, वो, का, की 6. आर्द्रा - कु, घ, ङ, छ 7. पुनर्वसु - के, को, हा, ही 8. पुष्य - हु, हे, हो, ड 9. आश्लेषा - डी, डू, डे, डो 10. मघा - मा, मी, मू, मे 11. पूर्वाफाल्गुनी - मो, टा, टी, टू 12. उत्तराफाल्गुनी - टे, टो, पा, पी 13. हस्त - पू, ष, ण, ठ 14. चित्रा - पे, पो, रा, री 15. स्वाति - रू, रे, रो, ता 16. विशाखा - ती, तू, ते, तो 17. अनुराधा - ना, नी, नू, ने 18. ज्येष्ठा - नो, या, यी, यू 19. मूल - ये, यो, भा, भी 20. पूर्वाषाढ़ा - भू, धा, फा, ढा 21. उत्तराषाढ़ा - भे, भो, जा, जी 22. श्रवण - खी, खू, खे, खो 23. धनिष्ठा - गा, गी, गु, गे 24. शतभिषा - गो, सा, सी, सू 25. पूर्वाभाद्रपदा - से, सो, दा, दी 26. उत्तराभाद्रपदा - दू, थ, झ, ञ 27. रेवती - दे, दो, चा, ची *वर्ण अनुसार नाम रखने के नियम:* - ब्राह्मण वर्ण: उपनाम - शर्मा, नाम - मंगल सूचक (जैसे - शुभम, मंगल) - क्षत्रिय वर्ण: उपनाम - वर्मा, नाम - बलवाचक (जैसे - विक्रम, विजय) - वैश्य वर्ण: उपनाम - गुप्ता, नाम - धन-धान्य सूचक (जैसे - धनंजय, संपत्ति) - शूद्र वर्ण: उपनाम - दास, नाम - सेवा वाचक (जैसे - सेवक, श्रमिक) इन नियमों का पालन करके आप अपने बच्चे के लिए एक सार्थक और शुभ नाम रख सकते हैं। #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠
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पंचक ज्ञान: #✡️सितारों की चाल🌠 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
✡️सितारों की चाल🌠 - पंचक ज्ञानः पंचक पांच नक्षत्रों का समूह है, जिसर्में थनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद, और रेवती शामिल हैं। इन नक्षत्रों में कुछ विशेष कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योकि ये कार्य अशुभ फल दे सकते हैं। *पंचक के दौरान त्याज्य कार्यः* *्तृण काष्ठादि का संग्रह*ः पंचक के दौरान लऋ, घास, वनस्पतिर्यों का संग्रह नहीं करना चाहिए। इससे या अन्य घर र्में दरिद्रता आ सकती है। २. *दक्षिण दिशा की यात्रा*ः पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इससे यात्रा ्में बाधाएं आ सकती हैं और अशुभ फल मिल सकता है। ३. *ग्रह छादन*: पंचक के दौरान घर की छत या अन्य संरचनाओं का निर्माण या मरम्मत नहीं करनी चाहिए। इससे घर र्में अशांति और दरिद्रता आ सकती है। *खाट बुनना*ः पंचक के दौरान खाट या अन्य लऋ के फर्नीचर का निर्माण नहीं करना चाहिए। इससे घर ्में अशांति और दख्रिता आ सकती है। *पंचक के दौरान क्या कर्रेः* १. *धार्मिक कार्य*ः पंचक के दौरान धार्मिक कार्य पूजा पाठ, और अन्य शुभ कार्य करने चाहिए।  २. *विश्राम *ः पंचक के दौरान विश्राम करना और आराम करना चाहिए। ३. *सावधानी*: पंचक के दौरान सावधानी से कार्य करना चाहिए और किसी भी नए कार्य की शुरुआत नहीं करनी  चाहिए।  पंचक के दौरान इन बार्तों का ध्यान रखने से आप अशुभ फल से बच सकते हैं और अपने जीवन में सुखनशांति और समृद्धि ला सकते ्है। पंचक ज्ञानः पंचक पांच नक्षत्रों का समूह है, जिसर्में थनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद, और रेवती शामिल हैं। इन नक्षत्रों में कुछ विशेष कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योकि ये कार्य अशुभ फल दे सकते हैं। *पंचक के दौरान त्याज्य कार्यः* *्तृण काष्ठादि का संग्रह*ः पंचक के दौरान लऋ, घास, वनस्पतिर्यों का संग्रह नहीं करना चाहिए। इससे या अन्य घर र्में दरिद्रता आ सकती है। २. *दक्षिण दिशा की यात्रा*ः पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इससे यात्रा ्में बाधाएं आ सकती हैं और अशुभ फल मिल सकता है। ३. *ग्रह छादन*: पंचक के दौरान घर की छत या अन्य संरचनाओं का निर्माण या मरम्मत नहीं करनी चाहिए। इससे घर र्में अशांति और दरिद्रता आ सकती है। *खाट बुनना*ः पंचक के दौरान खाट या अन्य लऋ के फर्नीचर का निर्माण नहीं करना चाहिए। इससे घर ्में अशांति और दख्रिता आ सकती है। *पंचक के दौरान क्या कर्रेः* १. *धार्मिक कार्य*ः पंचक के दौरान धार्मिक कार्य पूजा पाठ, और अन्य शुभ कार्य करने चाहिए।  २. *विश्राम *ः पंचक के दौरान विश्राम करना और आराम करना चाहिए। ३. *सावधानी*: पंचक के दौरान सावधानी से कार्य करना चाहिए और किसी भी नए कार्य की शुरुआत नहीं करनी  चाहिए।  पंचक के दौरान इन बार्तों का ध्यान रखने से आप अशुभ फल से बच सकते हैं और अपने जीवन में सुखनशांति और समृद्धि ला सकते ्है। - ShareChat
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