Abhilas Chauhan
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+91 81038 40601 अपनी जन्म पत्रिका का संपूर्ण विशे
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠
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✡️सितारों की चाल🌠 - Meta Al  Meta Al - ShareChat
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🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - sfe Feeds पहलगाम हमले पर जो लोग चुप थे, अब खामनेई की मौत पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं मातम मनाकर छाती पीट रहे हैं..! BJPf6g और फिर लोग कहते हैं कि मुस्लिम करती है sfe Feeds पहलगाम हमले पर जो लोग चुप थे, अब खामनेई की मौत पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं मातम मनाकर छाती पीट रहे हैं..! BJPf6g और फिर लोग कहते हैं कि मुस्लिम करती है - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - गुरु का मनोवैज्ञानिक महत्व *गुरु का प्रमुख कार्य*ः - दैवीय कृपा आंतरिक अच्छाइयां सामाजिक भलाई *गुरु का प्रभाव*:ः आध्यात्मिक सृजनता को बढ़ाता है शाश्वत ज्ञान और आशावादी विचारों की आवश्यकता *अधिदेवता*ः अधिदेवता इन्द्र हैं गुरु के  देव-गुरु से भी जुड़ा है गुरु की ये विशेषताएं हर्में आध्यात्मिक विकास और सामाजिक कल्याण की ओर ले जाती हैं। क्या आपको है कि गुरु का ये पहलू आपके जीवन में महत्वपूर्ण लगता गुरु का मनोवैज्ञानिक महत्व *गुरु का प्रमुख कार्य*ः - दैवीय कृपा आंतरिक अच्छाइयां सामाजिक भलाई *गुरु का प्रभाव*:ः आध्यात्मिक सृजनता को बढ़ाता है शाश्वत ज्ञान और आशावादी विचारों की आवश्यकता *अधिदेवता*ः अधिदेवता इन्द्र हैं गुरु के  देव-गुरु से भी जुड़ा है गुरु की ये विशेषताएं हर्में आध्यात्मिक विकास और सामाजिक कल्याण की ओर ले जाती हैं। क्या आपको है कि गुरु का ये पहलू आपके जीवन में महत्वपूर्ण लगता - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - गुरु के नक्षत्रों के प्रभाव *गुरु के नक्षत्र*ः १. *अपने या चन्द्रमा / बध के नक्षत्र में*: अच्छा स्वास्थ्य *ंसूर्य के नक्षत्र ्में*ः 2 भूख / पाचन को कमी संक्रामक ज्वर और पित्त के रोग ३. *मंगल के नक्षत्र में*: पेट में गंभीर दर्द पित्ताशय के रोग *शुक्र के नक्षत्र में*ः 4. सिर दर्द यौन कमी गुर्दे।यकृत पित्ताशय पैंक्रियास मै रोग ५. *्शनि के नक्षत्र में*: दीर्घ-्कालीन गंभीर रोग *राहु के नक्षत्र में*: 6 पेचिस पेट में दर्द नासूर (अलसर) क्षीण शरीर ७. *केतु के नक्षत्र मे*: संक्रामक यकृत रोग क्या आपको लगता है कि आपके गुरु की नक्षत्र स्थिति आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है? गुरु के नक्षत्रों के प्रभाव *गुरु के नक्षत्र*ः १. *अपने या चन्द्रमा / बध के नक्षत्र में*: अच्छा स्वास्थ्य *ंसूर्य के नक्षत्र ्में*ः 2 भूख / पाचन को कमी संक्रामक ज्वर और पित्त के रोग ३. *मंगल के नक्षत्र में*: पेट में गंभीर दर्द पित्ताशय के रोग *शुक्र के नक्षत्र में*ः 4. सिर दर्द यौन कमी गुर्दे।यकृत पित्ताशय पैंक्रियास मै रोग ५. *्शनि के नक्षत्र में*: दीर्घ-्कालीन गंभीर रोग *राहु के नक्षत्र में*: 6 पेचिस पेट में दर्द नासूर (अलसर) क्षीण शरीर ७. *केतु के नक्षत्र मे*: संक्रामक यकृत रोग क्या आपको लगता है कि आपके गुरु की नक्षत्र स्थिति आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है? - ShareChat
#🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 - ज्योतिष में गुरु का महत्व *गुरु का कारकत्व*: धन, संतान, पति, दैवीय / सरकारी सहायता सभी भौतिक लाभ पूर्व उत्तर दिशा *गुरु के शुभ प्रभाव*ः मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के जातकों के लिए शुभ खुशी , बुद्धि और सृजनता बढ़ाता है *गुरु का शारीरिक नियंत्रण*ः यकृत, गांठे, चरबी , और धमनियों में रक्त प्रवाह *गुरु कमजोर होने के कारण*ः १. मकर राशि में नीचस्थ होना वक्री या ग्रह-युद्ध में पराजित होना 2. 3, ३. त्रिक भाव में पीड़ित होना ४. केंद्र भाव का स्वामी होकर केंद्र में अपनी से अतिरिक्त राशि में होना अशुभ ग्रहों से युति द्रष्टि सम्बन्ध में होना 5. आपको लगता है कि आपके गुरु की स्थिति आपके क्य जीवन को प्रभावित कर रही है? ज्योतिष में गुरु का महत्व *गुरु का कारकत्व*: धन, संतान, पति, दैवीय / सरकारी सहायता सभी भौतिक लाभ पूर्व उत्तर दिशा *गुरु के शुभ प्रभाव*ः मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के जातकों के लिए शुभ खुशी , बुद्धि और सृजनता बढ़ाता है *गुरु का शारीरिक नियंत्रण*ः यकृत, गांठे, चरबी , और धमनियों में रक्त प्रवाह *गुरु कमजोर होने के कारण*ः १. मकर राशि में नीचस्थ होना वक्री या ग्रह-युद्ध में पराजित होना 2. 3, ३. त्रिक भाव में पीड़ित होना ४. केंद्र भाव का स्वामी होकर केंद्र में अपनी से अतिरिक्त राशि में होना अशुभ ग्रहों से युति द्रष्टि सम्बन्ध में होना 5. आपको लगता है कि आपके गुरु की स्थिति आपके क्य जीवन को प्रभावित कर रही है? - ShareChat
#💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔
💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी - कमजोर होने के लक्षण *मानसिक स्थिति*: जोश, इच्छा ्शक्ति और आत्म विश्वास में कमी g?, निराशा, विषाद, चिता, उदासी और आत्मनदया की भावना औरों के लिए संवेदना की कमी , तानाशाह या चरमपंथी विचार *वित्तीय और पारिवारिक स्थिति*ः भौतिक वित्तीय परेशानी - बच्चे नर्हीं होते या दुःख उठाते हैं *्शारीरिक स्थिति*ः उर्जा की कमी , कमज़ोर स्वास्थ्य प्रतिरक्ष्ता मांसल शरीर वजन कम कमजोर यकृत व पैंक्रियास स्नायु/ ग्रन्थियों में विकार दीर्घ-्कालीन गंभीर रोग या आपको लगता है कि आपके जीवन में ये लक्षण নযা दिखाई दे रहे हैं? कमजोर होने के लक्षण *मानसिक स्थिति*: जोश, इच्छा ्शक्ति और आत्म विश्वास में कमी g?, निराशा, विषाद, चिता, उदासी और आत्मनदया की भावना औरों के लिए संवेदना की कमी , तानाशाह या चरमपंथी विचार *वित्तीय और पारिवारिक स्थिति*ः भौतिक वित्तीय परेशानी - बच्चे नर्हीं होते या दुःख उठाते हैं *्शारीरिक स्थिति*ः उर्जा की कमी , कमज़ोर स्वास्थ्य प्रतिरक्ष्ता मांसल शरीर वजन कम कमजोर यकृत व पैंक्रियास स्नायु/ ग्रन्थियों में विकार दीर्घ-्कालीन गंभीर रोग या आपको लगता है कि आपके जीवन में ये लक्षण নযা दिखाई दे रहे हैं? - ShareChat
#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️सितारों की चाल🌠 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 - अंगारक दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है जिसर्में मंगल ग्रह जन्मकुंडली में अशुभ होती है। आइए इसे की स्थिति विस्तार से समझते हैंः *अंगारक दोष की स्थिति*ः मंगल ग्रह अकारक या मारक हा। नीचस्थ हो (मंगल का नीच राशि कर्क है)। शत्रु क्षेत्री हो (मंगल का शत्रु राशि वृषभ और तुला है) ] अंशबल से पूर्ण हो। राहु या केतु से युति में अंशिक दूरी निकटतम हो। राहु या केतु भी अंशबली हो। *3ঁমাৎক্ধ योग का प्रभाव*ः भाव और राशि के अनुसार फलदायी रहेगा। रक्त सम्बंधित विकार, जैसे ब्लड प्रेशर, नर्सों की समस्या। खुजली।  अग्नि भय, रक्तातिसार, दाद, खाज , - दुर्घटना , बवासीर, कैंसर। में सहन शक्ति की कमी। जातक यह योग कितना प्रभावी है, यह कुंडली विशेष पर निर्भर करेगा। आपको लगता है कि आपके जन्मकुंडली में अंगारक क्या दोष है? अंगारक दोष एक ज्योतिषीय स्थिति है जिसर्में मंगल ग्रह जन्मकुंडली में अशुभ होती है। आइए इसे की स्थिति विस्तार से समझते हैंः *अंगारक दोष की स्थिति*ः मंगल ग्रह अकारक या मारक हा। नीचस्थ हो (मंगल का नीच राशि कर्क है)। शत्रु क्षेत्री हो (मंगल का शत्रु राशि वृषभ और तुला है) ] अंशबल से पूर्ण हो। राहु या केतु से युति में अंशिक दूरी निकटतम हो। राहु या केतु भी अंशबली हो। *3ঁমাৎক্ধ योग का प्रभाव*ः भाव और राशि के अनुसार फलदायी रहेगा। रक्त सम्बंधित विकार, जैसे ब्लड प्रेशर, नर्सों की समस्या। खुजली।  अग्नि भय, रक्तातिसार, दाद, खाज , - दुर्घटना , बवासीर, कैंसर। में सहन शक्ति की कमी। जातक यह योग कितना प्रभावी है, यह कुंडली विशेष पर निर्भर करेगा। आपको लगता है कि आपके जन्मकुंडली में अंगारक क्या दोष है? - ShareChat