Abhilas Chauhan
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विवाह के योग: #✡️सितारों की चाल🌠 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
✡️सितारों की चाल🌠 - विवाह के योगः सप्तम भाव र्में विभिन्न ग्रहों की स्थिति के अनुसार विवाह के योग बनते हैंः १. *सप्तम में बुध*ः २० वर्ष से योग (किसी अशुभ ग्रहों की दृष्टि न हो) बुध की स्थिति विवाह को जल्दी और सुखद बनाती है। *सप्तम में गुरु*ः २१ वर्ष से योग (लड़कियों की कुंडली  २ में गुरु मज़बूत " शादी होती है) पर जल्द गुरु की स्थिति विवाह को शुभ और सुखद बनाती है। *्कुंडली में सप्तम में चंद्र*ः २५ वर्ष तक शादी और 3. पसंदीदा जीवनसाथी चंद्र की स्थिति विवाह को सुखद और प्रेमपूर्ण बनाती है।   में शुक्र*ः २६ वर्ष से योग और जीवन साथी ४. *सप्तम करने वाला प्यार शुक्र की स्थिति विवाह को प्रेमपूर्ण और सुखद बनाती है। *सप्तम में सूर्य या राहु*ः २७ वर्ष से योग बनते हैं 5. सूर्य या राहु की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण बना सकती है। ६. *सप्तम में मंगल*ः २८ वर्ष से योग बनते हैं मंगल की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण सकती है। बना ७. *सप्तम में शनि या केतु*ः ३० वर्ष के बाद योग बनते हैं शनि या केतु की स्थिति विवाह को देर से और संघर्षपूर्ण  बना सकती है। विवाह के योगः सप्तम भाव र्में विभिन्न ग्रहों की स्थिति के अनुसार विवाह के योग बनते हैंः १. *सप्तम में बुध*ः २० वर्ष से योग (किसी अशुभ ग्रहों की दृष्टि न हो) बुध की स्थिति विवाह को जल्दी और सुखद बनाती है। *सप्तम में गुरु*ः २१ वर्ष से योग (लड़कियों की कुंडली  २ में गुरु मज़बूत " शादी होती है) पर जल्द गुरु की स्थिति विवाह को शुभ और सुखद बनाती है। *्कुंडली में सप्तम में चंद्र*ः २५ वर्ष तक शादी और 3. पसंदीदा जीवनसाथी चंद्र की स्थिति विवाह को सुखद और प्रेमपूर्ण बनाती है।   में शुक्र*ः २६ वर्ष से योग और जीवन साथी ४. *सप्तम करने वाला प्यार शुक्र की स्थिति विवाह को प्रेमपूर्ण और सुखद बनाती है। *सप्तम में सूर्य या राहु*ः २७ वर्ष से योग बनते हैं 5. सूर्य या राहु की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण बना सकती है। ६. *सप्तम में मंगल*ः २८ वर्ष से योग बनते हैं मंगल की स्थिति विवाह को थोड़ा देर से और संघर्षपूर्ण सकती है। बना ७. *सप्तम में शनि या केतु*ः ३० वर्ष के बाद योग बनते हैं शनि या केतु की स्थिति विवाह को देर से और संघर्षपूर्ण  बना सकती है। - ShareChat
नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखें #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️सितारों की चाल🌠
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखें वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति विशेष की पहचान ज्ञात हो उसे नाम कहते है। बच्चे के जन्म लेने पर हम उसे एक नाम देते हैं जो उसकी पहचान बन जाता है। नाम नवीन, मधुर और सार्थक हो तो लोग सुनते ही कह उठते हैं वाह! क्या नाम है, इसका तो कोई जवाब ही नर्ही। बच्चे का जन्म जिस नक्षत्र के जिस चरण में हुआ हो, नक्षत्र ಕತಳ' चरण के अक्षर के अनुरूप बच्चे का जन्म नाम रखना चाहिए। जन्म नाम और बोलते नाम ्में अन्तर नर्ही होना चाहिए।  ब्राह्मण वर्ण को - उपनाम (सरनेम) शर्मा मंगल सूचक रखने चाहिए। নথা নাস क्षत्रिय वर्ण को - उपनाम  वर्मा নথা নাস নলনামক ম্রন ঘরাটিতI वैश्य वर्ण को गुप्ता उपनाम तथा नाम- थनन्धान्य सूचक रखने चाहिए। को ಿ೯೯f' उपनाम दास तथा नाम- सेवा वाचक रखने चाहिए। नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखें वह शब्द जिससे किसी व्यक्ति विशेष की पहचान ज्ञात हो उसे नाम कहते है। बच्चे के जन्म लेने पर हम उसे एक नाम देते हैं जो उसकी पहचान बन जाता है। नाम नवीन, मधुर और सार्थक हो तो लोग सुनते ही कह उठते हैं वाह! क्या नाम है, इसका तो कोई जवाब ही नर्ही। बच्चे का जन्म जिस नक्षत्र के जिस चरण में हुआ हो, नक्षत्र ಕತಳ' चरण के अक्षर के अनुरूप बच्चे का जन्म नाम रखना चाहिए। जन्म नाम और बोलते नाम ्में अन्तर नर्ही होना चाहिए।  ब्राह्मण वर्ण को - उपनाम (सरनेम) शर्मा मंगल सूचक रखने चाहिए। নথা নাস क्षत्रिय वर्ण को - उपनाम  वर्मा নথা নাস নলনামক ম্রন ঘরাটিতI वैश्य वर्ण को गुप्ता उपनाम तथा नाम- थनन्धान्य सूचक रखने चाहिए। को ಿ೯೯f' उपनाम दास तथा नाम- सेवा वाचक रखने चाहिए। - ShareChat
नक्षत्र चरणानुसार बच्चों के सार्थक नाम रखने के लिए निम्नलिखित जानकारी का पालन करें: *नक्षत्र और उनके चरण:* 1. अश्विनी - चू, चे, चो, ला 2. भरणी - ली, लू, ले, लो 3. कृत्तिका - अ, ई, उ, ए 4. रोहिणी - ओ, वा, वी, वू 5. मृगशिरा - वे, वो, का, की 6. आर्द्रा - कु, घ, ङ, छ 7. पुनर्वसु - के, को, हा, ही 8. पुष्य - हु, हे, हो, ड 9. आश्लेषा - डी, डू, डे, डो 10. मघा - मा, मी, मू, मे 11. पूर्वाफाल्गुनी - मो, टा, टी, टू 12. उत्तराफाल्गुनी - टे, टो, पा, पी 13. हस्त - पू, ष, ण, ठ 14. चित्रा - पे, पो, रा, री 15. स्वाति - रू, रे, रो, ता 16. विशाखा - ती, तू, ते, तो 17. अनुराधा - ना, नी, नू, ने 18. ज्येष्ठा - नो, या, यी, यू 19. मूल - ये, यो, भा, भी 20. पूर्वाषाढ़ा - भू, धा, फा, ढा 21. उत्तराषाढ़ा - भे, भो, जा, जी 22. श्रवण - खी, खू, खे, खो 23. धनिष्ठा - गा, गी, गु, गे 24. शतभिषा - गो, सा, सी, सू 25. पूर्वाभाद्रपदा - से, सो, दा, दी 26. उत्तराभाद्रपदा - दू, थ, झ, ञ 27. रेवती - दे, दो, चा, ची *वर्ण अनुसार नाम रखने के नियम:* - ब्राह्मण वर्ण: उपनाम - शर्मा, नाम - मंगल सूचक (जैसे - शुभम, मंगल) - क्षत्रिय वर्ण: उपनाम - वर्मा, नाम - बलवाचक (जैसे - विक्रम, विजय) - वैश्य वर्ण: उपनाम - गुप्ता, नाम - धन-धान्य सूचक (जैसे - धनंजय, संपत्ति) - शूद्र वर्ण: उपनाम - दास, नाम - सेवा वाचक (जैसे - सेवक, श्रमिक) इन नियमों का पालन करके आप अपने बच्चे के लिए एक सार्थक और शुभ नाम रख सकते हैं। #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️सितारों की चाल🌠
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पंचक ज्ञान: #✡️सितारों की चाल🌠 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
✡️सितारों की चाल🌠 - पंचक ज्ञानः पंचक पांच नक्षत्रों का समूह है, जिसर्में थनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद, और रेवती शामिल हैं। इन नक्षत्रों में कुछ विशेष कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योकि ये कार्य अशुभ फल दे सकते हैं। *पंचक के दौरान त्याज्य कार्यः* *्तृण काष्ठादि का संग्रह*ः पंचक के दौरान लऋ, घास, वनस्पतिर्यों का संग्रह नहीं करना चाहिए। इससे या अन्य घर र्में दरिद्रता आ सकती है। २. *दक्षिण दिशा की यात्रा*ः पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इससे यात्रा ्में बाधाएं आ सकती हैं और अशुभ फल मिल सकता है। ३. *ग्रह छादन*: पंचक के दौरान घर की छत या अन्य संरचनाओं का निर्माण या मरम्मत नहीं करनी चाहिए। इससे घर र्में अशांति और दरिद्रता आ सकती है। *खाट बुनना*ः पंचक के दौरान खाट या अन्य लऋ के फर्नीचर का निर्माण नहीं करना चाहिए। इससे घर ्में अशांति और दख्रिता आ सकती है। *पंचक के दौरान क्या कर्रेः* १. *धार्मिक कार्य*ः पंचक के दौरान धार्मिक कार्य पूजा पाठ, और अन्य शुभ कार्य करने चाहिए।  २. *विश्राम *ः पंचक के दौरान विश्राम करना और आराम करना चाहिए। ३. *सावधानी*: पंचक के दौरान सावधानी से कार्य करना चाहिए और किसी भी नए कार्य की शुरुआत नहीं करनी  चाहिए।  पंचक के दौरान इन बार्तों का ध्यान रखने से आप अशुभ फल से बच सकते हैं और अपने जीवन में सुखनशांति और समृद्धि ला सकते ्है। पंचक ज्ञानः पंचक पांच नक्षत्रों का समूह है, जिसर्में थनिष्ठा , शतभिषा , पूर्वाभाद्रपद , उत्तराभाद्रपद, और रेवती शामिल हैं। इन नक्षत्रों में कुछ विशेष कार्यों को करने से बचना चाहिए क्योकि ये कार्य अशुभ फल दे सकते हैं। *पंचक के दौरान त्याज्य कार्यः* *्तृण काष्ठादि का संग्रह*ः पंचक के दौरान लऋ, घास, वनस्पतिर्यों का संग्रह नहीं करना चाहिए। इससे या अन्य घर र्में दरिद्रता आ सकती है। २. *दक्षिण दिशा की यात्रा*ः पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। इससे यात्रा ्में बाधाएं आ सकती हैं और अशुभ फल मिल सकता है। ३. *ग्रह छादन*: पंचक के दौरान घर की छत या अन्य संरचनाओं का निर्माण या मरम्मत नहीं करनी चाहिए। इससे घर र्में अशांति और दरिद्रता आ सकती है। *खाट बुनना*ः पंचक के दौरान खाट या अन्य लऋ के फर्नीचर का निर्माण नहीं करना चाहिए। इससे घर ्में अशांति और दख्रिता आ सकती है। *पंचक के दौरान क्या कर्रेः* १. *धार्मिक कार्य*ः पंचक के दौरान धार्मिक कार्य पूजा पाठ, और अन्य शुभ कार्य करने चाहिए।  २. *विश्राम *ः पंचक के दौरान विश्राम करना और आराम करना चाहिए। ३. *सावधानी*: पंचक के दौरान सावधानी से कार्य करना चाहिए और किसी भी नए कार्य की शुरुआत नहीं करनी  चाहिए।  पंचक के दौरान इन बार्तों का ध्यान रखने से आप अशुभ फल से बच सकते हैं और अपने जीवन में सुखनशांति और समृद्धि ला सकते ्है। - ShareChat
#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️सितारों की चाल🌠
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ग्रहों के पीड़ित भाव और उनके प्रभाव: #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️सितारों की चाल🌠
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - ग्रहों के पीड़ित भाव १. *चंद्रमा - ६ भाव ्मे*ः सबसे ज्यादा तनाव देता है  में होना व्यक्ति को मानसिक तनाव, चंद्रमा का 6 भाव যিনা और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। १२ वे भाव मे*ः सबसे ज्यादा समस्याएं देता है २. *मंगल  मंगल का १२ वे भाव रमें होना व्यक्ति को आर्थिक नुकसान, संबंर्धों र्मे समस्याएं और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। चतुर्थ भाव मे*ः सबसे ज्यादा भ्रमित करता है *राहु  3 राहु का चतुर्थ भाव र्में होना व्यक्ति को मानसिक भ्रम, अनिश्चितता और घरेलू समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। *्केतु - प्रथम भाव मे*ः सबसे ज्यादा बाधाऐं देता है होना व्यक्ति को आत्मविश्वास की केतु का प्रथम भाव र्मे 1 कमी , स्वास्थ्य समस्याएं और संबंधों र्में बाधाओं का सामना पड़ सकता है। करना ५. *गुरु - आठवें भाव मे*ः सबसे ज्यादा दुख देता है गुरु का आठर्वे भाव र्मे होना व्यक्ति को आर्थिक नुकसान , स्वास्थ्य समस्याएं और संबर्धों र्में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ६. *सूर्य - सप्तम भाव मे*ः सबसे ज्यादा विवाद देता है सूर्य का सप्तम भाव में होना व्यक्ति को संबंर्धों में विवाद पारिवारिक समस्याएं और स्वास्थ्य समस्यारओं का सामना  करना पड़ सकता है। ७. *बुध - १२ वे मे*: सबसे ज्यादा कमजोर होता है बुध का १२ वे भाव में होना व्यक्ति को मानसिक कमजोरी , संचार समस्याएं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ग्रहों के पीड़ित भाव १. *चंद्रमा - ६ भाव ्मे*ः सबसे ज्यादा तनाव देता है  में होना व्यक्ति को मानसिक तनाव, चंद्रमा का 6 भाव যিনা और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। १२ वे भाव मे*ः सबसे ज्यादा समस्याएं देता है २. *मंगल  मंगल का १२ वे भाव रमें होना व्यक्ति को आर्थिक नुकसान, संबंर्धों र्मे समस्याएं और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। चतुर्थ भाव मे*ः सबसे ज्यादा भ्रमित करता है *राहु  3 राहु का चतुर्थ भाव र्में होना व्यक्ति को मानसिक भ्रम, अनिश्चितता और घरेलू समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। *्केतु - प्रथम भाव मे*ः सबसे ज्यादा बाधाऐं देता है होना व्यक्ति को आत्मविश्वास की केतु का प्रथम भाव र्मे 1 कमी , स्वास्थ्य समस्याएं और संबंधों र्में बाधाओं का सामना पड़ सकता है। करना ५. *गुरु - आठवें भाव मे*ः सबसे ज्यादा दुख देता है गुरु का आठर्वे भाव र्मे होना व्यक्ति को आर्थिक नुकसान , स्वास्थ्य समस्याएं और संबर्धों र्में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ६. *सूर्य - सप्तम भाव मे*ः सबसे ज्यादा विवाद देता है सूर्य का सप्तम भाव में होना व्यक्ति को संबंर्धों में विवाद पारिवारिक समस्याएं और स्वास्थ्य समस्यारओं का सामना  करना पड़ सकता है। ७. *बुध - १२ वे मे*: सबसे ज्यादा कमजोर होता है बुध का १२ वे भाव में होना व्यक्ति को मानसिक कमजोरी , संचार समस्याएं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। - ShareChat
राहु ग्रह का लग्न (1) भाव में प्रभाव: 1. *व्यक्तित्व और स्वभाव*: - राहु का लग्न में होना व्यक्ति को रहस्यमय, जिज्ञासु और अनिश्चित स्वभाव का बना सकता है। - ऐसा व्यक्ति अक्सर अपनी पहचान और प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित रहता है और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करता है। - राहु के प्रभाव से व्यक्ति में अद्वितीय और असामान्य गुण हो सकते हैं, जिससे वह समाज में दूसरों से अलग दिखाई देता है। 2. *मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य*: - राहु का लग्न में होना मानसिक अशांति और भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। व्यक्ति को मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद का सामना करना पड़ सकता है। - शारीरिक रूप से राहु का प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, विशेषकर सिर और मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। 3. *आर्थिक और पेशेवर जीवन*: - राहु का प्रभाव व्यक्ति को अचानक और अप्रत्याशित वित्तीय लाभ और हानि का सामना करा सकता है। - पेशेवर जीवन में राहु का प्रभाव व्यक्ति को नई और असामान्य तकनीकों, क्षेत्रों और कार्यों की ओर आकर्षित कर सकता है। व्यक्ति उच्च तकनीक, आईटी, अनुसंधान, और रहस्यमय क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकता है। 4. *संबंध और सामाजिक जीवन*: - राहु का लग्न में होना व्यक्ति के संबंधों में उतार-चढ़ाव ला सकता है। पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों में समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। - सामाजिक जीवन में राहु का प्रभाव व्यक्ति को कुछ खास और रहस्यमय मित्रों और संगठनों की ओर आकर्षित कर सकता है। #✡️सितारों की चाल🌠 #✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 #🔯ग्रह दोष एवं उपाय🪔 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟