2️⃣2️⃣❗0️⃣2️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣6️⃣
*♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*
*!! सच्ची भक्ति का फल !!*
~~~~~~~~~~~~~~~~~
एक छोटे से गाँव में एक वृद्ध ब्राह्मण रहता था। उसका नाम हरिदास था। वह अत्यंत गरीब था, परंतु भगवान पर उसकी अटूट श्रद्धा थी। प्रतिदिन वह प्रातःकाल स्नान कर मंदिर जाता और पूर्ण मनोयोग से पूजा करता। उसके पास चढ़ाने के लिए न तो महंगे फूल थे और न ही मिठाइयाँ, केवल एक लोटा जल और मन से निकली प्रार्थना।
गाँव के कुछ धनी लोग उसका उपहास उड़ाते थे। वे कहते, “इतनी साधारण पूजा से क्या मिलेगा?” पर हरिदास शांत रहता। वह कहता, “भगवान को वस्तु नहीं, भावना प्रिय होती है।”
एक वर्ष गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। खेत सूख गए, कुएँ खाली हो गए, और लोग परेशान हो उठे। सभी ने बड़े-बड़े यज्ञ और अनुष्ठान कराए, पर वर्षा नहीं हुई। अंततः गाँव के बुजुर्गों ने हरिदास से प्रार्थना की कि वह भी ईश्वर से प्रार्थना करे।
हरिदास मंदिर गया। उसने वही साधारण जल अर्पित किया और folded हाथों से बोला, “प्रभु, यदि मेरी भक्ति सच्ची है तो इन सबकी पीड़ा दूर कीजिए।” उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, पर मन में पूर्ण विश्वास था।
कहते हैं, उसी संध्या आकाश में बादल घिर आए। तेज वर्षा हुई और सूखी धरती फिर से हरी हो उठी। गाँव वाले आश्चर्यचकित रह गए। उन्हें समझ में आया कि ईश्वर के लिए धन या दिखावा नहीं, सच्चा हृदय महत्वपूर्ण है।
उस दिन से गाँव में परिवर्तन आ गया। लोग बाहरी आडंबर छोड़कर सच्चे मन से पूजा करने लगे। उन्होंने यह भी सीखा कि संकट के समय एक-दूसरे की सहायता करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
*शिक्षा:-*
सच्ची श्रद्धा, निष्कपट हृदय और परोपकार की भावना ही ईश्वर तक पहुँचने का सच्चा मार्ग है। बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि निर्मल मन से की गई प्रार्थना ही फल देती है।
*सदैव प्रसन्न रहिये - जो प्राप्त है, पर्याप्त है।*
*जिसका मन मस्त है - उसके पास समस्त है।।*
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ #☝ मेरे विचार #📒 मेरी डायरी

