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रुबाई सरमद #सूफी काव्य
सूफी काव्य - "रुबाई" गिफ़्तार ए निगारी शुदः अस्त, बाज़ अज़़ फ़िक्र ओ ग़म ए॰्लालः अज़ारी शुदः अस्त | मन पीर- ओ- दिलम ज़ौक ए-्जवानी दारद हंगाम ए ख़ज़ां जोश ए-बहारी शुदः अस्त | दिल फिर से हुआ मेरा गिरफ्तार ए-निगार लगा है फिर कोई लाला तड़पाने अज़ार मैं पीर हूँ लेकिन है जवानी दिल में हंगाम ए ख़िज़ाँ जोश पे आई है बहार (सरमद) Want Motivational Videos App "रुबाई" गिफ़्तार ए निगारी शुदः अस्त, बाज़ अज़़ फ़िक्र ओ ग़म ए॰्लालः अज़ारी शुदः अस्त | मन पीर- ओ- दिलम ज़ौक ए-्जवानी दारद हंगाम ए ख़ज़ां जोश ए-बहारी शुदः अस्त | दिल फिर से हुआ मेरा गिरफ्तार ए-निगार लगा है फिर कोई लाला तड़पाने अज़ार मैं पीर हूँ लेकिन है जवानी दिल में हंगाम ए ख़िज़ाँ जोश पे आई है बहार (सरमद) Want Motivational Videos App - ShareChat