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#☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
☝अनमोल ज्ञान - एखाद परिस्थिति रम॰ एखादे क्षण म 44 044 ननुष्य को क्षणिक गुरसा आ सकता गैका कर्ताभाव जहा वितीन हो जाए वह  है लेकिन उसका बुरा प्रभाव मनुष्य के a চনী ৮1 S e शिवकृपानंद स्वामीजी  सेथी खराव स्थिति ह ~ वेरभावा U निर्मित ढुआ यह सतत गुस्सा कसे राक्षस ह। बरभाव का लाभ उठाकर बुरी आत्मए प्रवेश करती ह சEe और बैरभाव में मनुथ्य का अपने क्म TF r யrer कठपुतली  के   नाथो दूसरों  हो जाते हा इसलिए मनुष्य को डससे  बचना चहिए। किसी य्यक्तिविशेव पर सतत गु़स्सा करे से ही उसके प्रति  आप सदगुरु में परमात्मा तब तक नहीं अवतार " की साकार देख सकते जब तक आप एक पवित्र आत्मा न हों। शिष्य बनना इतना सेनिराकार तक की यात्रा  आसान नही ह। क्योकि शिष्य बनना Ine यानी अपना ' अहंकार त्यागना हःजो moment the ! sense of beinB ine आत्मा " के संदेश की doer dlsappears ten thatIs सरल नहीं हे। यह कठिन कार्यभी meditation में रहने से संभव ह।जब Shree Shivkrupanand Swamll सतत सान्निध्य श्रृंखला है।  कोई मनुष्य सदग़ुरु से चित्त के माध्यम अती पवित्रव शुद्ध आत्मा को  से जुड़ा  होता हे॰तो धीरे॰धीरे वह अपने सदगुरु के विचार, आचार, संस्कार भी माध्यमवनाकरपरमात्मा ग्रहण करने लग जाता ह आरउसका " अवतार' के रूपर्में प्रगट होता * समर्पण अपने सदग़ुरु के प्रति कब हो गया इसका पता भी उसे नहीं चलता। 61 स्वामी परम पूज्य श्री शिवकृपानंद बाबी स्वामीजी आत्मा की आवाज सोत एखाद परिस्थिति रम॰ एखादे क्षण म 44 044 ननुष्य को क्षणिक गुरसा आ सकता गैका कर्ताभाव जहा वितीन हो जाए वह  है लेकिन उसका बुरा प्रभाव मनुष्य के a চনী ৮1 S e शिवकृपानंद स्वामीजी  सेथी खराव स्थिति ह ~ वेरभावा U निर्मित ढुआ यह सतत गुस्सा कसे राक्षस ह। बरभाव का लाभ उठाकर बुरी आत्मए प्रवेश करती ह சEe और बैरभाव में मनुथ्य का अपने क्म TF r யrer कठपुतली  के   नाथो दूसरों  हो जाते हा इसलिए मनुष्य को डससे  बचना चहिए। किसी य्यक्तिविशेव पर सतत गु़स्सा करे से ही उसके प्रति  आप सदगुरु में परमात्मा तब तक नहीं अवतार " की साकार देख सकते जब तक आप एक पवित्र आत्मा न हों। शिष्य बनना इतना सेनिराकार तक की यात्रा  आसान नही ह। क्योकि शिष्य बनना Ine यानी अपना ' अहंकार त्यागना हःजो moment the ! sense of beinB ine आत्मा " के संदेश की doer dlsappears ten thatIs सरल नहीं हे। यह कठिन कार्यभी meditation में रहने से संभव ह।जब Shree Shivkrupanand Swamll सतत सान्निध्य श्रृंखला है।  कोई मनुष्य सदग़ुरु से चित्त के माध्यम अती पवित्रव शुद्ध आत्मा को  से जुड़ा  होता हे॰तो धीरे॰धीरे वह अपने सदगुरु के विचार, आचार, संस्कार भी माध्यमवनाकरपरमात्मा ग्रहण करने लग जाता ह आरउसका " अवतार' के रूपर्में प्रगट होता * समर्पण अपने सदग़ुरु के प्रति कब हो गया इसका पता भी उसे नहीं चलता। 61 स्वामी परम पूज्य श्री शिवकृपानंद बाबी स्वामीजी आत्मा की आवाज सोत - ShareChat