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#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - अनुभव ओर कर्म ये दो हमारे गुरु है॰ दोनो ही साथ चलते हे! सीखो गुरु से ज्ञान कर्म परिस्थिति लडना सिखाता | ओर अनुभव जीत हासिल करनानll पिता से संपर्ष सीखो  हरिशरणम और माँ से संस्कार संसार मे केवल मनुष्य ही बाकिजो बचा एकमात्र ऐसा प्राणी है, जिसका जहर उसके दांतो में वो ये दुनिया सीखा देगी नहीं, बातो में है... CIed फखर । वैुण्ठ ोर्ह क़नतिहै  भगवान कपिलदेव त १फूम काभी फोई विवह नही हुशा शार श्री जीवन की सबसे महंगी गवान तिहदेव फो देपका ल४मा जीभी ठा गई। भगवान चीज है हुमारा.. शरीग़म कुहुत ग़ुन्दा हे किनु एक त्री 7 अधिफ  वर्तमान उन्हाने कभा खीकार नहा को। अजीब सौदागर है यह वक़्त भी अकेले श्रीकण्ण ही हे जिन्हान एफ साध जवानी का लालच देकर बचपन ले गया দব্ব-Tমম ঘুবানখা  বিবার দিবা|  नो एक बार चला जाए और अमीरी का लालच देकर जवानी ` गया अव तो त्रा॰जाति को मान लेन। चाहिए शतः तो सारी दुनिया की सपत्ति ७ उनक लिए आागध्या म सवाततम श्रीकृण गह अन्य नही। देकर भी हुम उसे खरीद MI3a Milt Mlla TரTTITர नहीसकत 1097 ` अनुभव ओर कर्म ये दो हमारे गुरु है॰ दोनो ही साथ चलते हे! सीखो गुरु से ज्ञान कर्म परिस्थिति लडना सिखाता | ओर अनुभव जीत हासिल करनानll पिता से संपर्ष सीखो  हरिशरणम और माँ से संस्कार संसार मे केवल मनुष्य ही बाकिजो बचा एकमात्र ऐसा प्राणी है, जिसका जहर उसके दांतो में वो ये दुनिया सीखा देगी नहीं, बातो में है... CIed फखर । वैुण्ठ ोर्ह क़नतिहै  भगवान कपिलदेव त १फूम काभी फोई विवह नही हुशा शार श्री जीवन की सबसे महंगी गवान तिहदेव फो देपका ल४मा जीभी ठा गई। भगवान चीज है हुमारा.. शरीग़म कुहुत ग़ुन्दा हे किनु एक त्री 7 अधिफ  वर्तमान उन्हाने कभा खीकार नहा को। अजीब सौदागर है यह वक़्त भी अकेले श्रीकण्ण ही हे जिन्हान एफ साध जवानी का लालच देकर बचपन ले गया দব্ব-Tমম ঘুবানখা  বিবার দিবা|  नो एक बार चला जाए और अमीरी का लालच देकर जवानी ` गया अव तो त्रा॰जाति को मान लेन। चाहिए शतः तो सारी दुनिया की सपत्ति ७ उनक लिए आागध्या म सवाततम श्रीकृण गह अन्य नही। देकर भी हुम उसे खरीद MI3a Milt Mlla TரTTITர नहीसकत 1097 ` - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - यही सामंजस्यपूर्ण अवस्था है जहाँ हम अक्सर अंतर्दृष्टि और यहाँ तक कि गहन स्पष्टता, उपचार का अनुभव करते हैं। इन क्षणों में हम  अपने वास्तविक स्वरूप को छूते हैं ~ उस सत्य को जो हमें हमारी दिव्य की याद दिलाता प्रकृति है। श्री जी ५. २. २०२६ सारा संसार दिव्यता सेभरा पड़ा है , लिए आत्मज्ञानरूपी आँख की आवश्यकता होती है। बस उसे देखने के यही सामंजस्यपूर्ण अवस्था है जहाँ हम अक्सर अंतर्दृष्टि और यहाँ तक कि गहन स्पष्टता, उपचार का अनुभव करते हैं। इन क्षणों में हम  अपने वास्तविक स्वरूप को छूते हैं ~ उस सत्य को जो हमें हमारी दिव्य की याद दिलाता प्रकृति है। श्री जी ५. २. २०२६ सारा संसार दिव्यता सेभरा पड़ा है , लिए आत्मज्ञानरूपी आँख की आवश्यकता होती है। बस उसे देखने के - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - থী মাৎ মমথ !!! हसरी असावी, WIC)I( बाप्पाची मर्ती नजरेसमोर दिसावी, मुखी असावे बाप्पाचे नाव सोपे होईल सारे काम सकष्टी चतुर्थीच्या हार्दीक शुभेच्छा. गुरुवारची शुभ सकाळ साई बाब मेरी अभिलाषा केवल হলনী ঔ ক্ি ক্ীৎ मेरे मन का हर तार जोड़ उस मालिक से ೩ मुझे ही अपने विचारों तथा कर्मों का मुख्य ध्येय बना ला और तब तुम्हें निस्संदेह দমোথ ন্ী সাদি ೯ vMl থী মাৎ মমথ !!! हसरी असावी, WIC)I( बाप्पाची मर्ती नजरेसमोर दिसावी, मुखी असावे बाप्पाचे नाव सोपे होईल सारे काम सकष्टी चतुर्थीच्या हार्दीक शुभेच्छा. गुरुवारची शुभ सकाळ साई बाब मेरी अभिलाषा केवल হলনী ঔ ক্ি ক্ীৎ मेरे मन का हर तार जोड़ उस मालिक से ೩ मुझे ही अपने विचारों तथा कर्मों का मुख्य ध्येय बना ला और तब तुम्हें निस्संदेह দমোথ ন্ী সাদি ೯ vMl - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - লিব गुरु सानिध्य पाने के सर्वस्व खोना पडता है। जब अपना सवस्व खो देते हैं अपनी शरीर रुपी धागर 79 (गागर) संपूर्ण रिक्त हो जाती है और फिर गुरु  कृपा का अमृत धागर मे पडना प्रारम्भ होता है और फिर शरीर माधव कहत शरीर नहीं रह जाता ' अमृतकलश ' बन लोभ, कोध और काम जाता है। ये नरक के द्वार हें विनाश का कारण बनते ओरआता हिमालय का समर्पण योग :४ अतषइनकात्यागकरा ही मनुष्य के तिए कल्याणकारी हे। परम पूज्य श्री शिवकृपानद स्वामी जी जयश्रीकण्णा 3ao` ன ऊपर वाले की अदालत में वकीलों চমাব எas " की जरूरत नहीं होती; बहां सिर्फ মধে নিখাণ আানূলি লব্ধ সোনী ৪  না চমাব জ্লা ম মল ত্রা মকধনী ;1 নন ঐ সানৃনিণা दुआ और बददुआ की गवाही चलती एक दूसरे से जुड़ती हे तोवे हमारे भीतर एकता  कराती हे ओर हर्म संतुलन की की अनुभूति  है अपने कर्मों काखाता साफ अवस्था मेले जाती ह। श्रीजी ४२ २०२६  रखिफ 4 GIIN 0 লিব गुरु सानिध्य पाने के सर्वस्व खोना पडता है। जब अपना सवस्व खो देते हैं अपनी शरीर रुपी धागर 79 (गागर) संपूर्ण रिक्त हो जाती है और फिर गुरु  कृपा का अमृत धागर मे पडना प्रारम्भ होता है और फिर शरीर माधव कहत शरीर नहीं रह जाता ' अमृतकलश ' बन लोभ, कोध और काम जाता है। ये नरक के द्वार हें विनाश का कारण बनते ओरआता हिमालय का समर्पण योग :४ अतषइनकात्यागकरा ही मनुष्य के तिए कल्याणकारी हे। परम पूज्य श्री शिवकृपानद स्वामी जी जयश्रीकण्णा 3ao` ன ऊपर वाले की अदालत में वकीलों চমাব எas " की जरूरत नहीं होती; बहां सिर्फ মধে নিখাণ আানূলি লব্ধ সোনী ৪  না চমাব জ্লা ম মল ত্রা মকধনী ;1 নন ঐ সানৃনিণা दुआ और बददुआ की गवाही चलती एक दूसरे से जुड़ती हे तोवे हमारे भीतर एकता  कराती हे ओर हर्म संतुलन की की अनुभूति  है अपने कर्मों काखाता साफ अवस्था मेले जाती ह। श्रीजी ४२ २०२६  रखिफ 4 GIIN 0 - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - C जीवन का लक्ष्य आत्मा का साक्षात्कार नही मोक्ष  होना चाहिए। श्री शिवकृपानद स्वामीजी C The Boal ol tife should nor bo realisation otthe soul but Uberation Imokshal Shree Shivkrupanand Swamilh 0೦೬ C जीवन का लक्ष्य आत्मा का साक्षात्कार नही मोक्ष  होना चाहिए। श्री शिवकृपानद स्वामीजी C The Boal ol tife should nor bo realisation otthe soul but Uberation Imokshal Shree Shivkrupanand Swamilh 0೦೬ - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - मेने माथ्यम को कभी तीला नहीकी की साकार MAHASHLVRATRE 2026  अवतार वे भगवान मानने के योग्य है या नहीं। साधारणतः शिष्य गुरु को तोलते हे ओर 6   से निराकारतक की यात्रा ಘ  (s  (  న " यह तौलने में ही सारी उम्र बीत जाती ह। ட   ~ "ಲ   मेर दृष्टिकोण थोड़ा विशाल था। प्रत्येक 6 आत्मा " के संदेश की { मनुष्य रमें ही परमात्मा का अंश होता ~ ~ { तो सदग़ुरु भी शरीरधारी श्रृंखला है। Slr 0e 6 0 { भी  परात्मा का अंश होगा ही। उसी ~ n =5 {ಘ अंश को मेने भगवान यानकर अपने ~ " अवतार" के जिवनकाल  B 0 n [ ~ आपको पूर्ण समर्पित  दिया ओर ನa  ( P"/ ऐसा करने में उनका शरीर ओर शरीर के बाद ही लोग उसे जान  {ು ] 6 के दोष मेरे मार्ग में बाधक नहीं हुए a और मैं सदग़ुरु के शरीर के माध्यम पाते है। 61 स्वामी " " परमात्मा को समर्पित हो सका। किसी a बाबा तनतामत काव + م  أ n { = . पतर गून्यता साध ली ता मलि स्व निढद। सेवा आम्मा का सुख है बशर्त सेना का प्रदशनन किग जाए। सेवकखे Mಕqe' ~nImaG प्राप्तहाता ह। पह सवाभाव एक आत्मा का पवित्र भावहे। ।बाबा खामीजी। मेने माथ्यम को कभी तीला नहीकी की साकार MAHASHLVRATRE 2026  अवतार वे भगवान मानने के योग्य है या नहीं। साधारणतः शिष्य गुरु को तोलते हे ओर 6   से निराकारतक की यात्रा ಘ  (s  (  న यह तौलने में ही सारी उम्र बीत जाती ह। ட   ~ "ಲ   मेर दृष्टिकोण थोड़ा विशाल था। प्रत्येक 6 आत्मा " के संदेश की { मनुष्य रमें ही परमात्मा का अंश होता ~ ~ { तो सदग़ुरु भी शरीरधारी श्रृंखला है। Slr 0e 6 0 { भी  परात्मा का अंश होगा ही। उसी ~ n =5 {ಘ अंश को मेने भगवान यानकर अपने ~ " अवतार" के जिवनकाल  B 0 n [ ~ आपको पूर्ण समर्पित  दिया ओर ನa  ( P"/ ऐसा करने में उनका शरीर ओर शरीर के बाद ही लोग उसे जान  {ು ] 6 के दोष मेरे मार्ग में बाधक नहीं हुए a और मैं सदग़ुरु के शरीर के माध्यम पाते है। 61 स्वामी परमात्मा को समर्पित हो सका। किसी a बाबा तनतामत काव + م  أ n { = . पतर गून्यता साध ली ता मलि स्व निढद। सेवा आम्मा का सुख है बशर्त सेना का प्रदशनन किग जाए। सेवकखे Mಕqe' ~nImaG प्राप्तहाता ह। पह सवाभाव एक आत्मा का पवित्र भावहे। ।बाबा खामीजी। - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - साई बाबा सकाळ मुझे सदा जीवित ही जानो प्रारच्व महणजे नशित किंचा भाग्य असा अर्थ हीत नाही आपल्या चागण्या चोलण्यातून अनुभव करो सत्य पहचनो . आणि कृतीतूनच आपण आपले प्रारचा घडdत असता क्मी हिसतशषअसते आपले कर्मीजिर चांगले अरातील तरप्रारच्य निशितच चांगलेच Usत श्री र्वामी समर्थ ~ মামতশে ক্রনৌ 61 সনব্ধ ন্েং সশন্ধ লম अभिमान ओर अहंकार एक विशष লব্ধয সানী ৪; সা চমায় आवृत्ति ऊर्जा से मेल खा सकती ह। जवये आवृत्तिया  को पूर्णतः त्याग दो। एक दूसरे से जुड़ती हे तो वे हमारे भीतर एकता " की अनुभूति कराती हे और हर्में संतुलन की आध्यात्मिक বুদ্ধায अवस्था में ले जाती हे। श्रीजी ४२ २०२६ उन्नति शीघ्र होगी। साई बाबा सकाळ मुझे सदा जीवित ही जानो प्रारच्व महणजे नशित किंचा भाग्य असा अर्थ हीत नाही आपल्या चागण्या चोलण्यातून अनुभव करो सत्य पहचनो . आणि कृतीतूनच आपण आपले प्रारचा घडdत असता क्मी हिसतशषअसते आपले कर्मीजिर चांगले अरातील तरप्रारच्य निशितच चांगलेच Usत श्री र्वामी समर्थ ~ মামতশে ক্রনৌ 61 সনব্ধ ন্েং সশন্ধ লম अभिमान ओर अहंकार एक विशष লব্ধয সানী ৪; সা চমায় आवृत्ति ऊर्जा से मेल खा सकती ह। जवये आवृत्तिया  को पूर्णतः त्याग दो। एक दूसरे से जुड़ती हे तो वे हमारे भीतर एकता " की अनुभूति कराती हे और हर्में संतुलन की आध्यात्मिक বুদ্ধায अवस्था में ले जाती हे। श्रीजी ४२ २०२६ उन्नति शीघ्र होगी। - ShareChat
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🧘सदगुरु जी🙏 - 'সমুসুনিচানা সমিল; মম চা E মা নিঃা H'e m7 ಟ1T K S hlaue rirl k a कि जगत म कता भा सदगुरु कदिव्य चतन्य का अनभृति সনমুনি চানা আঁকচ মম ঢা Eানা নিংা 9 R'<rdದi <l-drrur 0 6  1 आपक अदरनिःस्चायभाव प्रगट हआही য় চ নিৎ সাম সামিচ নাযএয पल ~ುೆ ue স4 ঢ আ্ন পনং ঐ ভম |ad ~ মা ঘব্চে নিঃস্পাথ এম লাগল ঢমা ঢা 4ப" ச 4a- এরমে্নং ক ঘান মগল ELসসাম E1 TT = 71a சசசா ஈா  সনুমুনি আমতী মাল lವ e সনমুনি আমক ঘালন ঢ91 আমেমাখাা সমকা মাল ভুসা ৭ লা মলন কা সনুসা সনুখুনি মমোশো ঘযা অন্ুসুনি ঢ -9 এমেশ্লব ঊ সনুমুনি 61 ৭ কাণ শকি করযা /1 UIIWET  0٥ तब हीोना हःजब মাংমরেম ঢ বম মুঃস থামা' ২া না মুঃস খময अनभनि ப কবানা 131 सकानह সুতম া এিণকসানভ শোনা স 9#-5 0 মি তা ऐेसा अनभय तब होता फजब अंताकरण शल्होचहम शरीरसे अलग होंगे। बह्य सत्यं को साकार अवतार {u से निराकारतक की यात्रा के संदेश की आत्मा " a मौन श्रृंखला है।  अवतार " का जिवनकाल तो एक दिव्य सुंगन्ध जैसा होता  हो जाओ हे। बहुत कम पवित्र आत्मा ही देगा सुनाई भी॰ सुंगन्धबलेबषातीस्वैामी अन्दरको यह 4 37 2ಾ  od l( 'সমুসুনিচানা সমিল; মম চা E মা নিঃা H'e m7 ಟ1T K S hlaue rirl k a कि जगत म कता भा सदगुरु कदिव्य चतन्य का अनभृति সনমুনি চানা আঁকচ মম ঢা Eানা নিংা 9 R'<rdದi <l-drrur 0 6  1 आपक अदरनिःस्चायभाव प्रगट हआही য় চ নিৎ সাম সামিচ নাযএয पल ~ುೆ ue স4 ঢ আ্ন পনং ঐ ভম |ad ~ মা ঘব্চে নিঃস্পাথ এম লাগল ঢমা ঢা 4ப" ச 4a- এরমে্নং ক ঘান মগল ELসসাম E1 TT = 71a சசசா ஈா  সনুমুনি আমতী মাল lವ e সনমুনি আমক ঘালন ঢ91 আমেমাখাা সমকা মাল ভুসা ৭ লা মলন কা সনুসা সনুখুনি মমোশো ঘযা অন্ুসুনি ঢ -9 এমেশ্লব ঊ সনুমুনি 61 ৭ কাণ শকি করযা /1 UIIWET  0٥ तब हीोना हःजब মাংমরেম ঢ বম মুঃস থামা' ২া না মুঃস খময अनभनि ப কবানা 131 सकानह সুতম া এিণকসানভ শোনা স 9#-5 0 মি তা ऐेसा अनभय तब होता फजब अंताकरण शल्होचहम शरीरसे अलग होंगे। बह्य सत्यं को साकार अवतार {u से निराकारतक की यात्रा के संदेश की आत्मा " a मौन श्रृंखला है।  अवतार " का जिवनकाल तो एक दिव्य सुंगन्ध जैसा होता  हो जाओ हे। बहुत कम पवित्र आत्मा ही देगा सुनाई भी॰ सुंगन्धबलेबषातीस्वैामी अन्दरको यह 4 37 2ಾ  od l( - ShareChat