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#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - फखरी 0ய" ( श्रील प्रभुपद जी ने वह अन्तगप्रीय कृणभावनामृत = ्ध्यान कभी किया नही जाता, वह हो जाता हे। IISKCON TTIITTTTFI श्री शिवकृपानंद स्वामीजी कृण्णभक्ति वराने क लिए। अतः भत्तगग भगवनरव कीति प्रचार कखे जनता की सहायता कोशार भीदस प्रचर कार्वमेभकां की परिपृण  जनता -71P77I IWTYFTT TTT कथन उपा्थन करे भगवान शीकण म प्रति बढाएग। इस कहते ह अन्तरप्रीय  कृणभावनामृत सय {3ma ಹmiay ನ Meditation is never done itjust happens Shree Shivkrupanand Swamiji মুদ্রসান বিনন "सबके पास समान आंखें हें लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं। " बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती हे। फखरी 0ய" ( श्रील प्रभुपद जी ने वह अन्तगप्रीय कृणभावनामृत = ्ध्यान कभी किया नही जाता, वह हो जाता हे। IISKCON TTIITTTTFI श्री शिवकृपानंद स्वामीजी कृण्णभक्ति वराने क लिए। अतः भत्तगग भगवनरव कीति प्रचार कखे जनता की सहायता कोशार भीदस प्रचर कार्वमेभकां की परिपृण  जनता -71P77I IWTYFTT TTT कथन उपा्थन करे भगवान शीकण म प्रति बढाएग। इस कहते ह अन्तरप्रीय  कृणभावनामृत सय {3ma ಹmiay ನ Meditation is never done itjust happens Shree Shivkrupanand Swamiji মুদ্রসান বিনন "सबके पास समान आंखें हें लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं। " बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती हे। - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
☝अनमोल ज्ञान - गण गण शुभोद्य गण वपन गणात गणात নীন নীন शान्तिः सामर्थ्यस्य मलम।   oloe शतिहसामर्थ्यकोजडहे। महाराज पररट दिनाय हर्दिक शभेळ्ा ४थीस्वामी समर्थ।| जिसका मन स्थिर है वही सही निर्णय लेता है। और सही निर्णय ही 9 वास्तविक शक्ति बनता है। 999 गण गण शुभोद्य गण वपन गणात गणात নীন নীন शान्तिः सामर्थ्यस्य मलम।   oloe शतिहसामर्थ्यकोजडहे। महाराज पररट दिनाय हर्दिक शभेळ्ा ४थीस्वामी समर्थ।| जिसका मन स्थिर है वही सही निर्णय लेता है। और सही निर्णय ही 9 वास्तविक शक्ति बनता है। 999 - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - कोई आपको न समझे तो टेशन मत लेना क्योकि अच्छे लोग और अच्छी कितावे हर किसी को समझ नहीं आती  !! लिफ पानी के जब घडे थेःः हम बीमारी से॰ दूरखडे ಭ೦ अब हमारे पास आरो हे॰ और बीमारियां हजारों हे॰॰ वक्त और विश्वासा    Oai Iere I் जिसे जीना आता हे वह emgi  के भी खुश  बिना किसी सुविधा  সিলযা;  जिसे जीना नही आता वह सभी सुविधाओ के होते हुए भी॰ संगत का विशेष ध्यान रखें मिलेगा  दुःखी क्योकि सफलता 4743...!! हमेशा अच्छे विचारों से आती है बहुत सस्ती हे इस  खुशी दुनिया में , बल्कि हम ही ढूंढते और अच्छे विचार हे उसे महँगी ्मे। दुकानों  अच्छे लोगों के संपर्क से आते हैें। कोई आपको न समझे तो टेशन मत लेना क्योकि अच्छे लोग और अच्छी कितावे हर किसी को समझ नहीं आती  !! लिफ पानी के जब घडे थेःः हम बीमारी से॰ दूरखडे ಭ೦ अब हमारे पास आरो हे॰ और बीमारियां हजारों हे॰॰ वक्त और विश्वासा    Oai Iere I் जिसे जीना आता हे वह emgi  के भी खुश  बिना किसी सुविधा  সিলযা;  जिसे जीना नही आता वह सभी सुविधाओ के होते हुए भी॰ संगत का विशेष ध्यान रखें मिलेगा  दुःखी क्योकि सफलता 4743...!! हमेशा अच्छे विचारों से आती है बहुत सस्ती हे इस  खुशी दुनिया में , बल्कि हम ही ढूंढते और अच्छे विचार हे उसे महँगी ्मे। दुकानों  अच्छे लोगों के संपर्क से आते हैें। - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #☝अनमोल ज्ञान
🧘सदगुरु जी🙏 - ஈரி ६ आज का विचार कृण्ण को वेणु बजात देख स्वर्ग क दवताओ को  पनिया उनके विमाना मे ही मृर्रित ढो जाती ढ। यद  देखकर गोपिया बहती ह " दाया कितनी साभाग्यशाल বননো কা মিবী] বনি কৃত্াসন স মডিন র  जाएतो भी उनफे पति उन्ह सभाल लतहॅ। लीजिए आज आप चाहे जितना झूठ बोल च के विरो मयर्दै दमैथैथी ऐरीनीमी कवोर्गी  रमार पति संशय करने लगत ४ आर करने चाहे जितना घमंड दिखा लीजिए लगत रकी ढमार मन कभा घरम लगता री नदा। कितना बड ;mnm |  ` दुभाग्य - चाहे किसी को कितना भी अपमानित कर दीजिए ~ छोटी है पर गहरी हैं ।। Idq चाहे कितनी भी चालाकिया कर लीजिए जावन मे सिफउन लोगो कोचुनोजो आपचे মানবিব থাে ক নি০ আ্ড 61_!  कर्म घूम " जिस दिन ये सारे फिर कर वापस आएंगे उस दिन कई गुना बढ़कर ही आपके पास  नमस्कार आऐंगे . और आप झेल नहों पाएंगे . सोचा कुछ কিমা ক্তন্ত ೯357 ತ೯೯೯ इसलिए वक्त से डरिए और अपने कर्म अच्छे  कुछ यही जीवन है !! रखिए . ஈரி ६ आज का विचार कृण्ण को वेणु बजात देख स्वर्ग क दवताओ को  पनिया उनके विमाना मे ही मृर्रित ढो जाती ढ। यद  देखकर गोपिया बहती ह " दाया कितनी साभाग्यशाल বননো কা মিবী] বনি কৃত্াসন স মডিন র  जाएतो भी उनफे पति उन्ह सभाल लतहॅ। लीजिए आज आप चाहे जितना झूठ बोल च के विरो मयर्दै दमैथैथी ऐरीनीमी कवोर्गी  रमार पति संशय करने लगत ४ आर करने चाहे जितना घमंड दिखा लीजिए लगत रकी ढमार मन कभा घरम लगता री नदा। कितना बड ;mnm |  ` दुभाग्य - चाहे किसी को कितना भी अपमानित कर दीजिए ~ छोटी है पर गहरी हैं ।। Idq चाहे कितनी भी चालाकिया कर लीजिए जावन मे सिफउन लोगो कोचुनोजो आपचे মানবিব থাে ক নি০ আ্ড 61_!  कर्म घूम " जिस दिन ये सारे फिर कर वापस आएंगे उस दिन कई गुना बढ़कर ही आपके पास  नमस्कार आऐंगे . और आप झेल नहों पाएंगे . सोचा कुछ কিমা ক্তন্ত ೯357 ತ೯೯೯ इसलिए वक्त से डरिए और अपने कर्म अच्छे  कुछ यही जीवन है !! रखिए . - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏
☝अनमोल ज्ञान - TIE శI मन चंचल होता है इसलिए सदैव अपनी बुद्धि के द्वार खुले रखो ( कामुकता , क्रोध और लोभ का त्याग करो क्यांकि य व्यक्त क नाश का कारण हे। भीतर ही तुम्हारे  वो ज्ञान का खज़ाना है जिसे बाहर ढूंढ रहे हो TIE శI मन चंचल होता है इसलिए सदैव अपनी बुद्धि के द्वार खुले रखो ( कामुकता , क्रोध और लोभ का त्याग करो क्यांकि य व्यक्त क नाश का कारण हे। भीतर ही तुम्हारे  वो ज्ञान का खज़ाना है जिसे बाहर ढूंढ रहे हो - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #☝अनमोल ज्ञान
🧘सदगुरु जी🙏 - 3 মন ম पवित्र ध्वनिर्यों या शब्दों की पुनरावृत्ति एक लय उत्पन्न करती है, जो हमारी श्वास और हृदयगति से सामंजस्य कर हनें ध्यान की अवस्था में ले mmnmdw जाती हे। इस अवस्था हम अपने आंतरिक 9 आत्मा की सूक्ष्म तरंगों के प्रति अधिक WI| TIorITd "್ತ್ದಾಾ ताो ग्रहणशील हो जाते हैं और गहन चेतना का    fanntl अनुभव करते हे। श्री जी ७ २ २०२६ परमाल अगर रदय I0dd क्म करन क प्ररणा देता ० ती उस कर्म को पूरा करने  Jadi तिए वह सहयोग इसलिए   मुस्कुराता वही हे, सदा उसका सहयोग  व्यर्थ है कर जिसे पता हे इस दुनिपा में कोईभी॰   कार्य মকলনা নিিিল মিলযী रोने से हल नही होती।  उपयोग ना हो ते समस्या     धन वर्धहै মুসপা ஈ शीम दागवन म भगयान दरि फे परियको  और विनम्रता ना हो तो अलाफिफ " फफा गया ६। अलाफिफ काअर्यद " लाफ সবনো  सभिनन जाना 7 की यद பTன7=1 कोई व्यनिः फिसी दूसर च्यत्तिः फो फछ दैता ा॰ C{le दसर व्यकत उसका पक्षपानी दी जाता ढ। किन्त भगवान फण लिए बिना ढी दियताओं  বা 9Iা ঠুন ` আঁ নিনা 4াঃ #9 ম্েন `০  शसग को वध करतद। साथदीा साधनिन சரர் 71 7ப=775 34-1 ~7# #= देते ७ eतः भगवान का नरित अलाकिक ह। - 3 মন ম पवित्र ध्वनिर्यों या शब्दों की पुनरावृत्ति एक लय उत्पन्न करती है, जो हमारी श्वास और हृदयगति से सामंजस्य कर हनें ध्यान की अवस्था में ले mmnmdw जाती हे। इस अवस्था हम अपने आंतरिक 9 आत्मा की सूक्ष्म तरंगों के प्रति अधिक WI| TIorITd "್ತ್ದಾಾ ताो ग्रहणशील हो जाते हैं और गहन चेतना का    fanntl अनुभव करते हे। श्री जी ७ २ २०२६ परमाल अगर रदय I0dd क्म करन क प्ररणा देता ० ती उस कर्म को पूरा करने  Jadi तिए वह सहयोग इसलिए   मुस्कुराता वही हे, सदा उसका सहयोग  व्यर्थ है कर जिसे पता हे इस दुनिपा में कोईभी॰   कार्य মকলনা নিিিল মিলযী रोने से हल नही होती।  उपयोग ना हो ते समस्या     धन वर्धहै মুসপা ஈ शीम दागवन म भगयान दरि फे परियको  और विनम्रता ना हो तो अलाफिफ " फफा गया ६। अलाफिफ काअर्यद " लाफ সবনো  सभिनन जाना 7 की यद பTன7=1 कोई व्यनिः फिसी दूसर च्यत्तिः फो फछ दैता ा॰ C{le दसर व्यकत उसका पक्षपानी दी जाता ढ। किन्त भगवान फण लिए बिना ढी दियताओं  বা 9Iা ঠুন ` আঁ নিনা 4াঃ #9 ম্েন `০  शसग को वध करतद। साथदीा साधनिन சரர் 71 7ப=775 34-1 ~7# #= देते ७ eतः भगवान का नरित अलाकिक ह। - - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - a अनयन दिल २४ பசபகா சகன75 சாக க फेलिए होता ४ पेरे माष्म काणन्मशी दूसर्रो +े  ६ख द८ भोगने के लिएही होता ह। चे परमात्मा केै চীল ৪ সমী সসোলসাল্মীমাল; সবস  77 परमात्मामय होने ६। परमात्मातो वि्वपेतना शकति६ फशक्तिषर्नकै भीतरसे सदेव गती ऋती  ^!~*-7~-- 5 Hmmkl a dmla3o[ಬ -77 fக சரச सशकरमा आाभामण्ल नदव िपमान ऋता 6 "शिखर पर कोई मार्ग नहीं जाता हे। ी शिवकपानंद स्वामीजी < una1 वहाँ अपना मार्ग छोड़कर ही जाना पड़ता है | शिखर पर पहुंचे हुए लोगों समर्पण ध्यान योग गुरुलोक एक अलग ही विश्व है | पवित्र एव शद् आत्माओं की सामहिकता  क इस मार्ग में प्रत्येक धर्म मार्गदर्शक भी है भेने गुरुकृपा ने खू॰ आनद प्राप्त फिया ओर बाधक भी हे। जबतक आप अपने अच्छी अच्छी आनुभूतिया उई। अब मुदो यह सब  आपको योटकरही आनद भिल पाता ६। अ॰ यह से मुक्त  नहीं होते हमें பப मुझे रखकर आनद नर्ही आता बॉटकर   आत्मज्ञान लिए ही आता हे। इसलिए आपको कल्पना नही हे कि॰ की सहायता प्रवेश के गुरुओं HII मै आपके बिच कितना खुश ओर प्रसन्न ढू। आप नहीं होती हे। एक अंतिम पड़ाव पर अच्छे॰से॰मेरी बाते सुन र्हे हे॰ निपमित आर्हे हे इससे भुझे नहुत प्रसन्नता होती हे। ओर आत्मञ्तान  पहुँचकर धर्म के बंधन से भी आत्मा सही आत्माओं तक पढुँच ख्ा हे और चह पढुँचाने  मुक्त हो जाती है | क्योंकि आत्मा का का माप्यम बनने का अवसर मुझ्े मिल रहा 6 यह बात मेरे आत्मा को एक समाधान देती । अब एक धर्म हे आत्मधर्म আপ ভ্রম এব্র কা নিবস মসস্ন লী  வபச1 51 लगता 6 कि आपके जीवन मे पह कमी 6 तो आप वही  लोगो को TETT करो। पारभ বান हिमालय का समर्पण योग" भाग ५ परम पूज्य सदगुरु श्री शिवकृपानंद स्वामीजी  0 समर्पण योग भाग ५२५० a अनयन दिल २४ பசபகா சகன75 சாக க फेलिए होता ४ पेरे माष्म काणन्मशी दूसर्रो +े  ६ख द८ भोगने के लिएही होता ह। चे परमात्मा केै চীল ৪ সমী সসোলসাল্মীমাল; সবস  77 परमात्मामय होने ६। परमात्मातो वि्वपेतना शकति६ फशक्तिषर्नकै भीतरसे सदेव गती ऋती  ^!~*-7~-- 5 Hmmkl a dmla3o[ಬ -77 fக சரச सशकरमा आाभामण्ल नदव िपमान ऋता 6 "शिखर पर कोई मार्ग नहीं जाता हे। ी शिवकपानंद स्वामीजी < una1 वहाँ अपना मार्ग छोड़कर ही जाना पड़ता है | शिखर पर पहुंचे हुए लोगों समर्पण ध्यान योग गुरुलोक एक अलग ही विश्व है | पवित्र एव शद् आत्माओं की सामहिकता  क इस मार्ग में प्रत्येक धर्म मार्गदर्शक भी है भेने गुरुकृपा ने खू॰ आनद प्राप्त फिया ओर बाधक भी हे। जबतक आप अपने अच्छी अच्छी आनुभूतिया उई। अब मुदो यह सब  आपको योटकरही आनद भिल पाता ६। अ॰ यह से मुक्त  नहीं होते हमें பப मुझे रखकर आनद नर्ही आता बॉटकर   आत्मज्ञान लिए ही आता हे। इसलिए आपको कल्पना नही हे कि॰ की सहायता प्रवेश के गुरुओं HII मै आपके बिच कितना खुश ओर प्रसन्न ढू। आप नहीं होती हे। एक अंतिम पड़ाव पर अच्छे॰से॰मेरी बाते सुन र्हे हे॰ निपमित आर्हे हे इससे भुझे नहुत प्रसन्नता होती हे। ओर आत्मञ्तान  पहुँचकर धर्म के बंधन से भी आत्मा सही आत्माओं तक पढुँच ख्ा हे और चह पढुँचाने  मुक्त हो जाती है | क्योंकि आत्मा का का माप्यम बनने का अवसर मुझ्े मिल रहा 6 यह बात मेरे आत्मा को एक समाधान देती । अब एक धर्म हे आत्मधर्म আপ ভ্রম এব্র কা নিবস মসস্ন লী  வபச1 51 लगता 6 कि आपके जीवन मे पह कमी 6 तो आप वही  लोगो को TETT करो। पारभ বান हिमालय का समर्पण योग" भाग ५ परम पूज्य सदगुरु श्री शिवकृपानंद स्वामीजी  0 समर्पण योग भाग ५२५० - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
☝अनमोल ज्ञान - एखाद परिस्थिति रम॰ एखादे क्षण म 44 044 ननुष्य को क्षणिक गुरसा आ सकता गैका कर्ताभाव जहा वितीन हो जाए वह  है लेकिन उसका बुरा प्रभाव मनुष्य के a চনী ৮1 S e शिवकृपानंद स्वामीजी  सेथी खराव स्थिति ह ~ वेरभावा U निर्मित ढुआ यह सतत गुस्सा कसे राक्षस ह। बरभाव का लाभ उठाकर बुरी आत्मए प्रवेश करती ह சEe और बैरभाव में मनुथ्य का अपने क्म TF r யrer कठपुतली  के   नाथो दूसरों  हो जाते हा इसलिए मनुष्य को डससे  बचना चहिए। किसी य्यक्तिविशेव पर सतत गु़स्सा करे से ही उसके प्रति  आप सदगुरु में परमात्मा तब तक नहीं अवतार " की साकार देख सकते जब तक आप एक पवित्र आत्मा न हों। शिष्य बनना इतना सेनिराकार तक की यात्रा  आसान नही ह। क्योकि शिष्य बनना Ine यानी अपना ' अहंकार त्यागना हःजो moment the ! sense of beinB ine आत्मा " के संदेश की doer dlsappears ten thatIs सरल नहीं हे। यह कठिन कार्यभी meditation में रहने से संभव ह।जब Shree Shivkrupanand Swamll सतत सान्निध्य श्रृंखला है।  कोई मनुष्य सदग़ुरु से चित्त के माध्यम अती पवित्रव शुद्ध आत्मा को  से जुड़ा  होता हे॰तो धीरे॰धीरे वह अपने सदगुरु के विचार, आचार, संस्कार भी माध्यमवनाकरपरमात्मा ग्रहण करने लग जाता ह आरउसका " अवतार' के रूपर्में प्रगट होता * समर्पण अपने सदग़ुरु के प्रति कब हो गया इसका पता भी उसे नहीं चलता। 61 स्वामी परम पूज्य श्री शिवकृपानंद बाबी स्वामीजी आत्मा की आवाज सोत एखाद परिस्थिति रम॰ एखादे क्षण म 44 044 ननुष्य को क्षणिक गुरसा आ सकता गैका कर्ताभाव जहा वितीन हो जाए वह  है लेकिन उसका बुरा प्रभाव मनुष्य के a চনী ৮1 S e शिवकृपानंद स्वामीजी  सेथी खराव स्थिति ह ~ वेरभावा U निर्मित ढुआ यह सतत गुस्सा कसे राक्षस ह। बरभाव का लाभ उठाकर बुरी आत्मए प्रवेश करती ह சEe और बैरभाव में मनुथ्य का अपने क्म TF r யrer कठपुतली  के   नाथो दूसरों  हो जाते हा इसलिए मनुष्य को डससे  बचना चहिए। किसी य्यक्तिविशेव पर सतत गु़स्सा करे से ही उसके प्रति  आप सदगुरु में परमात्मा तब तक नहीं अवतार " की साकार देख सकते जब तक आप एक पवित्र आत्मा न हों। शिष्य बनना इतना सेनिराकार तक की यात्रा  आसान नही ह। क्योकि शिष्य बनना Ine यानी अपना ' अहंकार त्यागना हःजो moment the ! sense of beinB ine आत्मा " के संदेश की doer dlsappears ten thatIs सरल नहीं हे। यह कठिन कार्यभी meditation में रहने से संभव ह।जब Shree Shivkrupanand Swamll सतत सान्निध्य श्रृंखला है।  कोई मनुष्य सदग़ुरु से चित्त के माध्यम अती पवित्रव शुद्ध आत्मा को  से जुड़ा  होता हे॰तो धीरे॰धीरे वह अपने सदगुरु के विचार, आचार, संस्कार भी माध्यमवनाकरपरमात्मा ग्रहण करने लग जाता ह आरउसका " अवतार' के रूपर्में प्रगट होता * समर्पण अपने सदग़ुरु के प्रति कब हो गया इसका पता भी उसे नहीं चलता। 61 स्वामी परम पूज्य श्री शिवकृपानंद बाबी स्वामीजी आत्मा की आवाज सोत - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद C4hM' GolltVa  अगर हम अपने जीवनकाल में अंतर्मुखी हो कीचड़ में ही कीचड़ के साथ ही कमल खिलता है।  सकें तो परमात्मा को मानेंगे नहीं॰ जानेंगे  -श्री शिवकृपानंद स्वामीजी नहीं, पाएँगे  पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी पर মীন; 'ঘ্রীণিনী' দথ  कभी कभी जीवन मे कुछ परिस्थितियाँ ऐसी निर्माण हो जाती है कि उन परिस्थितियों में से निकलने का मार्ग नहीं रहता। ऐसे समय में भी॰ यह आपको सतुलित बनाती हे। प्रार्थना प्रार्थना मनुष्य को आत्मशाति व आत्म समाधान देती हे। बाबा स्वामी Gtun    The lotus stays in muck and blooms टाी अपनी आत्मा केीनहे आप देने की शुद्ध इच्छा रखो अगर हम अपने 6 only while being in the muck आत्मा आप आधा घटा Shree Shivkrupanand Swamiji जीवन में इतना గ সাণব্ধী साथ संवाद स्थापित करो। एक बार भीतर जाओ, एक बार भीतर केगगीर्ी  मिलेगा जो आपके जीवन में, ్  और एक  सागर में डुबो बार अपने आपकी देने की क्षमता से कई शरीर का सारा नियंत्रण उस आत्मा गुना अधिक होगा। के हवाले कर दो। आप देखोगे - सद्गुरु के सारे गुण आपके भीतर श्री शिवकृपानंद स्वामीज उतरते चले जाएँगे। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद - ShareChat