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#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - লিব गुरु सानिध्य पाने के सर्वस्व खोना पडता है। जब अपना सवस्व खो देते हैं अपनी शरीर रुपी धागर 79 (गागर) संपूर्ण रिक्त हो जाती है और फिर गुरु  कृपा का अमृत धागर मे पडना प्रारम्भ होता है और फिर शरीर माधव कहत शरीर नहीं रह जाता ' अमृतकलश ' बन लोभ, कोध और काम जाता है। ये नरक के द्वार हें विनाश का कारण बनते ओरआता हिमालय का समर्पण योग :४ अतषइनकात्यागकरा ही मनुष्य के तिए कल्याणकारी हे। परम पूज्य श्री शिवकृपानद स्वामी जी जयश्रीकण्णा 3ao` ன ऊपर वाले की अदालत में वकीलों চমাব எas " की जरूरत नहीं होती; बहां सिर्फ মধে নিখাণ আানূলি লব্ধ সোনী ৪  না চমাব জ্লা ম মল ত্রা মকধনী ;1 নন ঐ সানৃনিণা दुआ और बददुआ की गवाही चलती एक दूसरे से जुड़ती हे तोवे हमारे भीतर एकता  कराती हे ओर हर्म संतुलन की की अनुभूति  है अपने कर्मों काखाता साफ अवस्था मेले जाती ह। श्रीजी ४२ २०२६  रखिफ 4 GIIN 0 লিব गुरु सानिध्य पाने के सर्वस्व खोना पडता है। जब अपना सवस्व खो देते हैं अपनी शरीर रुपी धागर 79 (गागर) संपूर्ण रिक्त हो जाती है और फिर गुरु  कृपा का अमृत धागर मे पडना प्रारम्भ होता है और फिर शरीर माधव कहत शरीर नहीं रह जाता ' अमृतकलश ' बन लोभ, कोध और काम जाता है। ये नरक के द्वार हें विनाश का कारण बनते ओरआता हिमालय का समर्पण योग :४ अतषइनकात्यागकरा ही मनुष्य के तिए कल्याणकारी हे। परम पूज्य श्री शिवकृपानद स्वामी जी जयश्रीकण्णा 3ao` ன ऊपर वाले की अदालत में वकीलों চমাব எas " की जरूरत नहीं होती; बहां सिर्फ মধে নিখাণ আানূলি লব্ধ সোনী ৪  না চমাব জ্লা ম মল ত্রা মকধনী ;1 নন ঐ সানৃনিণা दुआ और बददुआ की गवाही चलती एक दूसरे से जुड़ती हे तोवे हमारे भीतर एकता  कराती हे ओर हर्म संतुलन की की अनुभूति  है अपने कर्मों काखाता साफ अवस्था मेले जाती ह। श्रीजी ४२ २०२६  रखिफ 4 GIIN 0 - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - C जीवन का लक्ष्य आत्मा का साक्षात्कार नही मोक्ष  होना चाहिए। श्री शिवकृपानद स्वामीजी C The Boal ol tife should nor bo realisation otthe soul but Uberation Imokshal Shree Shivkrupanand Swamilh 0೦೬ C जीवन का लक्ष्य आत्मा का साक्षात्कार नही मोक्ष  होना चाहिए। श्री शिवकृपानद स्वामीजी C The Boal ol tife should nor bo realisation otthe soul but Uberation Imokshal Shree Shivkrupanand Swamilh 0೦೬ - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - मेने माथ्यम को कभी तीला नहीकी की साकार MAHASHLVRATRE 2026  अवतार वे भगवान मानने के योग्य है या नहीं। साधारणतः शिष्य गुरु को तोलते हे ओर 6   से निराकारतक की यात्रा ಘ  (s  (  న " यह तौलने में ही सारी उम्र बीत जाती ह। ட   ~ "ಲ   मेर दृष्टिकोण थोड़ा विशाल था। प्रत्येक 6 आत्मा " के संदेश की { मनुष्य रमें ही परमात्मा का अंश होता ~ ~ { तो सदग़ुरु भी शरीरधारी श्रृंखला है। Slr 0e 6 0 { भी  परात्मा का अंश होगा ही। उसी ~ n =5 {ಘ अंश को मेने भगवान यानकर अपने ~ " अवतार" के जिवनकाल  B 0 n [ ~ आपको पूर्ण समर्पित  दिया ओर ನa  ( P"/ ऐसा करने में उनका शरीर ओर शरीर के बाद ही लोग उसे जान  {ು ] 6 के दोष मेरे मार्ग में बाधक नहीं हुए a और मैं सदग़ुरु के शरीर के माध्यम पाते है। 61 स्वामी " " परमात्मा को समर्पित हो सका। किसी a बाबा तनतामत काव + م  أ n { = . पतर गून्यता साध ली ता मलि स्व निढद। सेवा आम्मा का सुख है बशर्त सेना का प्रदशनन किग जाए। सेवकखे Mಕqe' ~nImaG प्राप्तहाता ह। पह सवाभाव एक आत्मा का पवित्र भावहे। ।बाबा खामीजी। मेने माथ्यम को कभी तीला नहीकी की साकार MAHASHLVRATRE 2026  अवतार वे भगवान मानने के योग्य है या नहीं। साधारणतः शिष्य गुरु को तोलते हे ओर 6   से निराकारतक की यात्रा ಘ  (s  (  న यह तौलने में ही सारी उम्र बीत जाती ह। ட   ~ "ಲ   मेर दृष्टिकोण थोड़ा विशाल था। प्रत्येक 6 आत्मा " के संदेश की { मनुष्य रमें ही परमात्मा का अंश होता ~ ~ { तो सदग़ुरु भी शरीरधारी श्रृंखला है। Slr 0e 6 0 { भी  परात्मा का अंश होगा ही। उसी ~ n =5 {ಘ अंश को मेने भगवान यानकर अपने ~ " अवतार" के जिवनकाल  B 0 n [ ~ आपको पूर्ण समर्पित  दिया ओर ನa  ( P"/ ऐसा करने में उनका शरीर ओर शरीर के बाद ही लोग उसे जान  {ು ] 6 के दोष मेरे मार्ग में बाधक नहीं हुए a और मैं सदग़ुरु के शरीर के माध्यम पाते है। 61 स्वामी परमात्मा को समर्पित हो सका। किसी a बाबा तनतामत काव + م  أ n { = . पतर गून्यता साध ली ता मलि स्व निढद। सेवा आम्मा का सुख है बशर्त सेना का प्रदशनन किग जाए। सेवकखे Mಕqe' ~nImaG प्राप्तहाता ह। पह सवाभाव एक आत्मा का पवित्र भावहे। ।बाबा खामीजी। - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - साई बाबा सकाळ मुझे सदा जीवित ही जानो प्रारच्व महणजे नशित किंचा भाग्य असा अर्थ हीत नाही आपल्या चागण्या चोलण्यातून अनुभव करो सत्य पहचनो . आणि कृतीतूनच आपण आपले प्रारचा घडdत असता क्मी हिसतशषअसते आपले कर्मीजिर चांगले अरातील तरप्रारच्य निशितच चांगलेच Usत श्री र्वामी समर्थ ~ মামতশে ক্রনৌ 61 সনব্ধ ন্েং সশন্ধ লম अभिमान ओर अहंकार एक विशष লব্ধয সানী ৪; সা চমায় आवृत्ति ऊर्जा से मेल खा सकती ह। जवये आवृत्तिया  को पूर्णतः त्याग दो। एक दूसरे से जुड़ती हे तो वे हमारे भीतर एकता " की अनुभूति कराती हे और हर्में संतुलन की आध्यात्मिक বুদ্ধায अवस्था में ले जाती हे। श्रीजी ४२ २०२६ उन्नति शीघ्र होगी। साई बाबा सकाळ मुझे सदा जीवित ही जानो प्रारच्व महणजे नशित किंचा भाग्य असा अर्थ हीत नाही आपल्या चागण्या चोलण्यातून अनुभव करो सत्य पहचनो . आणि कृतीतूनच आपण आपले प्रारचा घडdत असता क्मी हिसतशषअसते आपले कर्मीजिर चांगले अरातील तरप्रारच्य निशितच चांगलेच Usत श्री र्वामी समर्थ ~ মামতশে ক্রনৌ 61 সনব্ধ ন্েং সশন্ধ লম अभिमान ओर अहंकार एक विशष লব্ধয সানী ৪; সা চমায় आवृत्ति ऊर्जा से मेल खा सकती ह। जवये आवृत्तिया  को पूर्णतः त्याग दो। एक दूसरे से जुड़ती हे तो वे हमारे भीतर एकता " की अनुभूति कराती हे और हर्में संतुलन की आध्यात्मिक বুদ্ধায अवस्था में ले जाती हे। श्रीजी ४२ २०२६ उन्नति शीघ्र होगी। - ShareChat
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🧘सदगुरु जी🙏 - 'সমুসুনিচানা সমিল; মম চা E মা নিঃা H'e m7 ಟ1T K S hlaue rirl k a कि जगत म कता भा सदगुरु कदिव्य चतन्य का अनभृति সনমুনি চানা আঁকচ মম ঢা Eানা নিংা 9 R'<rdದi <l-drrur 0 6  1 आपक अदरनिःस्चायभाव प्रगट हआही য় চ নিৎ সাম সামিচ নাযএয पल ~ುೆ ue স4 ঢ আ্ন পনং ঐ ভম |ad ~ মা ঘব্চে নিঃস্পাথ এম লাগল ঢমা ঢা 4ப" ச 4a- এরমে্নং ক ঘান মগল ELসসাম E1 TT = 71a சசசா ஈா  সনুমুনি আমতী মাল lವ e সনমুনি আমক ঘালন ঢ91 আমেমাখাা সমকা মাল ভুসা ৭ লা মলন কা সনুসা সনুখুনি মমোশো ঘযা অন্ুসুনি ঢ -9 এমেশ্লব ঊ সনুমুনি 61 ৭ কাণ শকি করযা /1 UIIWET  0٥ तब हीोना हःजब মাংমরেম ঢ বম মুঃস থামা' ২া না মুঃস খময अनभनि ப কবানা 131 सकानह সুতম া এিণকসানভ শোনা স 9#-5 0 মি তা ऐेसा अनभय तब होता फजब अंताकरण शल्होचहम शरीरसे अलग होंगे। बह्य सत्यं को साकार अवतार {u से निराकारतक की यात्रा के संदेश की आत्मा " a मौन श्रृंखला है।  अवतार " का जिवनकाल तो एक दिव्य सुंगन्ध जैसा होता  हो जाओ हे। बहुत कम पवित्र आत्मा ही देगा सुनाई भी॰ सुंगन्धबलेबषातीस्वैामी अन्दरको यह 4 37 2ಾ  od l( 'সমুসুনিচানা সমিল; মম চা E মা নিঃা H'e m7 ಟ1T K S hlaue rirl k a कि जगत म कता भा सदगुरु कदिव्य चतन्य का अनभृति সনমুনি চানা আঁকচ মম ঢা Eানা নিংা 9 R'<rdದi <l-drrur 0 6  1 आपक अदरनिःस्चायभाव प्रगट हआही য় চ নিৎ সাম সামিচ নাযএয पल ~ುೆ ue স4 ঢ আ্ন পনং ঐ ভম |ad ~ মা ঘব্চে নিঃস্পাথ এম লাগল ঢমা ঢা 4ப" ச 4a- এরমে্নং ক ঘান মগল ELসসাম E1 TT = 71a சசசா ஈா  সনুমুনি আমতী মাল lವ e সনমুনি আমক ঘালন ঢ91 আমেমাখাা সমকা মাল ভুসা ৭ লা মলন কা সনুসা সনুখুনি মমোশো ঘযা অন্ুসুনি ঢ -9 এমেশ্লব ঊ সনুমুনি 61 ৭ কাণ শকি করযা /1 UIIWET  0٥ तब हीोना हःजब মাংমরেম ঢ বম মুঃস থামা' ২া না মুঃস খময अनभनि ப কবানা 131 सकानह সুতম া এিণকসানভ শোনা স 9#-5 0 মি তা ऐेसा अनभय तब होता फजब अंताकरण शल्होचहम शरीरसे अलग होंगे। बह्य सत्यं को साकार अवतार {u से निराकारतक की यात्रा के संदेश की आत्मा " a मौन श्रृंखला है।  अवतार " का जिवनकाल तो एक दिव्य सुंगन्ध जैसा होता  हो जाओ हे। बहुत कम पवित्र आत्मा ही देगा सुनाई भी॰ सुंगन्धबलेबषातीस्वैामी अन्दरको यह 4 37 2ಾ  od l( - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - मनष्य की भविष्य की आशका ही मनुष्य का वर्तमान खराब कर देती है। (बाबा स्वामी जी) हम बुरे हैं इसलिए हमारे पास बुरे लोगाह। अगरहम थ्यान करेंगे ~i3a<3 पबित्र करेंगे तो हमारे आसपास बुरे लोग आपँगेही नहीं औरह्में भी अच्छे। पवित्र ओर शांत लोगों की सामूहिकता प्रप्तहो जाएगी श्री शिवकृपानंद स्वामीजी   हिमालय कासमर्पणा योग ~l   1242 मनष्य की भविष्य की आशका ही मनुष्य का वर्तमान खराब कर देती है। (बाबा स्वामी जी) हम बुरे हैं इसलिए हमारे पास बुरे लोगाह। अगरहम थ्यान करेंगे ~i3a<3 पबित्र करेंगे तो हमारे आसपास बुरे लोग आपँगेही नहीं औरह्में भी अच्छे। पवित्र ओर शांत लोगों की सामूहिकता प्रप्तहो जाएगी श्री शिवकृपानंद स्वामीजी   हिमालय कासमर्पणा योग ~l   1242 - ShareChat
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🧘सदगुरु जी🙏 - என்ரான்ரிாகர்த்ரர்சரார 0 समर्पण சர்சர்ரச்சர் 177/ जद पित्त सरक्त हेगा तभी सनक्त 4 पदिन पित्त  বুময ন ম্দী ৭ বিন ভানন ম বিন নঃ চীনা ট1 சரச்7ர்சர்சரராசார ঘািবকৃণান বোদানী       ஏ77 चरणाने तुमहारे  जुका मेर मस्तकरे 14 तबरे ,چ9 அ்பக்சிாசர்சரரர்ச हमारी जिंदगी नेदस्तकरे आत्मसाक्षात्कार के बाद परीक्षण से आत्मपराक्षण আঁনে মোবিল ক্া মবন বন্বাক্ষা লেনা 71 कीयात्रा प्ारभ होती ह। जद पित्त सनक्त होगा तभी सनक्त व पवित पित  शिवकृपानंद स्वामीजी  प्रकार औसकेरपने आपक आस्तपास फतगा | जय बाबा खामी என்ரான்ரிாகர்த்ரர்சரார 0 समर्पण சர்சர்ரச்சர் 177/ जद पित्त सरक्त हेगा तभी सनक्त 4 पदिन पित्त  বুময ন ম্দী ৭ বিন ভানন ম বিন নঃ চীনা ট1 சரச்7ர்சர்சரராசார ঘািবকৃণান বোদানী       ஏ77 चरणाने तुमहारे  जुका मेर मस्तकरे 14 तबरे ,چ9 அ்பக்சிாசர்சரரர்ச हमारी जिंदगी नेदस्तकरे आत्मसाक्षात्कार के बाद परीक्षण से आत्मपराक्षण আঁনে মোবিল ক্া মবন বন্বাক্ষা লেনা 71 कीयात्रा प्ारभ होती ह। जद पित्त सनक्त होगा तभी सनक्त व पवित पित  शिवकृपानंद स्वामीजी  प्रकार औसकेरपने आपक आस्तपास फतगा | जय बाबा खामी - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - फरवरी 3 বিবাবেবে বৈো নাব ন মঘ মূরব মওনন্ন মনা =5-#=#777=7 अतः उसम  तूय स अत्यन्त भिन्न ह। मेघ काला होनाहै चमरता  77 1ஈச்சர் +577 उसी ता्ह मावादेवी भी भगवान की शत्ति = विन्तु उसका स्वभाव भावान के स्वभाव  ٥٥ ٢ fೂtI ೩ ೫ಣ ೫77ಣ್ F 7 VFmTanaund | C +e r चन्मय नही ह और बढ रम ससार मे कृण्  41 गो ढक देनी ह और जीवों कोकृण्ण से बहिमुख  रना देती ८ 11" {7೪  बस इस बत कासवर हकि॰. जिसने अपना बुग़ वक़्त अकेले  8' उस जगह परहमेशा खामोश खना झेला हो कोडी के लोग अपनी हेसियत जही फिर उसे किसी के आनेन्जाने का के गण गाते हे। rtelra 9 नही होताः সমা 1  3m { V3v  वो खुद ही अपनी दुनिया सभालना " सीख जाता हे। फरवरी 3 বিবাবেবে বৈো নাব ন মঘ মূরব মওনন্ন মনা =5-#=#777=7 अतः उसम  तूय स अत्यन्त भिन्न ह। मेघ काला होनाहै चमरता  77 1ஈச்சர் +577 उसी ता्ह मावादेवी भी भगवान की शत्ति = विन्तु उसका स्वभाव भावान के स्वभाव  ٥٥ ٢ fೂtI ೩ ೫ಣ ೫77ಣ್ F 7 VFmTanaund | C +e r चन्मय नही ह और बढ रम ससार मे कृण्  41 गो ढक देनी ह और जीवों कोकृण्ण से बहिमुख  रना देती ८ 11" {7೪  बस इस बत कासवर हकि॰. जिसने अपना बुग़ वक़्त अकेले  8' उस जगह परहमेशा खामोश खना झेला हो कोडी के लोग अपनी हेसियत जही फिर उसे किसी के आनेन्जाने का के गण गाते हे। rtelra 9 नही होताः সমা 1  3m { V3v  वो खुद ही अपनी दुनिया सभालना " सीख जाता हे। - ShareChat
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🧘सदगुरु जी🙏 - संगीत को उद्देश्यपूर्ण ढंग से सुनना हर्में मन की निरंतर बकबक से ऊपर उठने देता हे। मन जो विचाररों ओर चिंताओं की धारा से भरा रहता हे॰ अक्सर हर्मे गहन चेतना की अवस्थाओं तक  पहुँचने से रोकता हे।  श्रीजी २ २ २०२६  uPaal R, `il siir ೯ HHT೯, जो भीतरका अवलोकन करता | जो को समझता  दूसरों | ಞi' | सम्मान करता हः जिसके चित्त रमें को दुख देने का ज़रा सा भी भाव दूसरों | নমীনী ঘাদিক 6I शिवक साथ एक शद्द जुड़ता हे 91*1 शिव 4*1 शभू का ओरिजिनल शब्द हे अर्थात जो स्वय प्रकट हुआ हे । उसको उत्पन्न करने चाला कोई मातःपिता नही ह। वे गर्भ से जन्म नही लेते।  जन्म मृत्यु, पाप पुण्य से परेऐ।  वह अवतरित होते हे और एक ही जीवन मिला है हम आत्माओं के द्वारा सृषि परिवर्तन का कार्य कराते हे। इसे पाने में नहीं , ओशो शिवसूत्न पहयानने में लगाओ संगीत को उद्देश्यपूर्ण ढंग से सुनना हर्में मन की निरंतर बकबक से ऊपर उठने देता हे। मन जो विचाररों ओर चिंताओं की धारा से भरा रहता हे॰ अक्सर हर्मे गहन चेतना की अवस्थाओं तक  पहुँचने से रोकता हे।  श्रीजी २ २ २०२६  uPaal R, `il siir ೯ HHT೯, जो भीतरका अवलोकन करता | जो को समझता  दूसरों | ಞi' | सम्मान करता हः जिसके चित्त रमें को दुख देने का ज़रा सा भी भाव दूसरों | নমীনী ঘাদিক 6I शिवक साथ एक शद्द जुड़ता हे 91*1 शिव 4*1 शभू का ओरिजिनल शब्द हे अर्थात जो स्वय प्रकट हुआ हे । उसको उत्पन्न करने चाला कोई मातःपिता नही ह। वे गर्भ से जन्म नही लेते।  जन्म मृत्यु, पाप पुण्य से परेऐ।  वह अवतरित होते हे और एक ही जीवन मिला है हम आत्माओं के द्वारा सृषि परिवर्तन का कार्य कराते हे। इसे पाने में नहीं , ओशो शिवसूत्न पहयानने में लगाओ - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - साई बाबा ईश्वर रूपी माला जपो मन कभी विचलित नही होगा मन तुम्हे ध्यॉने से बँचाएगा। बह हजार बहाने खोजेगा। चबह कहेगा कि इतनी सुबह, इतनी सर्द सुबहः कहां उठ करजा रहे हो? थोड़ा विश्राम करलो। रात भरवेसे तोनींद న नही आई॰ ओर अब सुबह से ध्याना ज शिढी आत ह उाक वेसे तो्थके हो॰ अब आर थक जाओगे। शांत पडे़ रहो। कल चले 7v7775| 70' जल्दी भी क्या इतनी ~I कोई जीवन चूका जा रहा हजार बहाने मन खोजता ह। कभी कहता ह॰ शरीर ठीक नहीं तबियत जरा ठीक नहीं | कभी कहता ह॰ घर में काम हे। कभी कहता बाज़ार हे॰ CnaaFunar iuri ? साई बाबा ईश्वर रूपी माला जपो मन कभी विचलित नही होगा मन तुम्हे ध्यॉने से बँचाएगा। बह हजार बहाने खोजेगा। चबह कहेगा कि इतनी सुबह, इतनी सर्द सुबहः कहां उठ करजा रहे हो? थोड़ा विश्राम करलो। रात भरवेसे तोनींद న नही आई॰ ओर अब सुबह से ध्याना ज शिढी आत ह उाक वेसे तो्थके हो॰ अब आर थक जाओगे। शांत पडे़ रहो। कल चले 7v7775| 70' जल्दी भी क्या इतनी ~I कोई जीवन चूका जा रहा हजार बहाने मन खोजता ह। कभी कहता ह॰ शरीर ठीक नहीं तबियत जरा ठीक नहीं | कभी कहता ह॰ घर में काम हे। कभी कहता बाज़ार हे॰ CnaaFunar iuri ? - ShareChat