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#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🧘सदगुरु जी🙏 - Expectation is the root of all heartache: वक़्त का पासा कभी भी We suffer not always because of what happens; but because of what we पलट सकता है, इसलिए expected to happen We build stories in जो तू hope our minds affach to outcomes; वही सितम कर and when reality chooses @ different it hurts भी सह सके। path; eautiful life @ FB/ BuddhismPageFB| परमात्मा की वाई फाई इतनी हाई_ फाई है कि जहाँ भी ध्यान करो जगह नेटवर्क आता है ! बातों से दिए गए तानों के जख्म बडे गहरे होते है.. दोस्त.. कत्ल भी हो जाते हैं और खंजर भी 6 f47.. परिवारका हाथ चलिए लोगों के पैर uer? V पकड़ने कीजरूरत a ua f..!! कितना बड़ा हेःयह ज़रूरी नहीं॰ E घर कितना खुशहाल ह४यही मायने रखता हे। कदरन करने पर उपरवाला छीन ही लेता हे॰ आपके जीवन नेखुशिया ही खुशियां वक्त भी औरशख्स भी॰ होआरघरमेसुखसमृद्धि बनी रहे यही ईश्वरसेकामना हमेरी Expectation is the root of all heartache: वक़्त का पासा कभी भी We suffer not always because of what happens; but because of what we पलट सकता है, इसलिए expected to happen We build stories in जो तू hope our minds affach to outcomes; वही सितम कर and when reality chooses @ different it hurts भी सह सके। path; eautiful life @ FB/ BuddhismPageFB| परमात्मा की वाई फाई इतनी हाई_ फाई है कि जहाँ भी ध्यान करो जगह नेटवर्क आता है ! बातों से दिए गए तानों के जख्म बडे गहरे होते है.. दोस्त.. कत्ल भी हो जाते हैं और खंजर भी 6 f47.. परिवारका हाथ चलिए लोगों के पैर uer? V पकड़ने कीजरूरत a ua f..!! कितना बड़ा हेःयह ज़रूरी नहीं॰ E घर कितना खुशहाल ह४यही मायने रखता हे। कदरन करने पर उपरवाला छीन ही लेता हे॰ आपके जीवन नेखुशिया ही खुशियां वक्त भी औरशख्स भी॰ होआरघरमेसुखसमृद्धि बनी रहे यही ईश्वरसेकामना हमेरी - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - शलत लग அளாகூசி शशर्मिदा नही होते॰ ब्ही लोग केवल ঐআাম নী৪ সন&ঁ ర फरवरी ?0 ऐसा देखा जाता है की अलग ्अलग समय मे इस जगत में अलग अलग गुण बढ़ जाते हैं। कभी सत्त्वगुण ढ जाता है तो संसार मे देवताओं का शासन हो जाता ढ। कभी रजोगुण और तमोगुण बढ़ जाते हैं तो असुरों और यक्ष राक्षसों का साम्राज्य हो जाता ह। और पुनः सत्त्वगुण बढ़ जाने पर फिर देवताओं का राज्य हो जाता है। इस तरह भगवान सभी जीवों के प्रति समान भाव प्रकट रते हें और किसी से पक्षपात नही करते। श्रीश्रीमद राधागाविन्द दास गार्वामी महाराज  संगीत, जैसे जैज़, आकस्मिक रूपसेरचा गया भी आत्मा से जुड़ाव को प्रोत्साहित कर सकता 81 सहजता और वर्तमान में रहनेकी इसमें प्रेरणा होती है। संगीतकार जब इस प्रवाह में होते हैं॰ तोवे एक ऐसे स्रोत से जुड़ते हैंजो मन के नियंत्रण सेपरे होता है। यह प्रवाह एक आध्यात्मिक अनुभव के है॰ जहाँ आत्मा समा और संगीत केबीच कीसीमाएँ मिट जाती हें और आत्मा की शुद्ध अभिव्यक्ति प्रकट होती है। श्रीजी १० २ २०२६ यूंतो शब्दों के मतलब कई निकलते है मगरभावनाओं का मतलब सिर्फ़ एक होत़ा है, अपनत्व, सेह परवाह || शलत लग அளாகூசி शशर्मिदा नही होते॰ ब्ही लोग केवल ঐআাম নী৪ সন&ঁ ర फरवरी ?0 ऐसा देखा जाता है की अलग ्अलग समय मे इस जगत में अलग अलग गुण बढ़ जाते हैं। कभी सत्त्वगुण ढ जाता है तो संसार मे देवताओं का शासन हो जाता ढ। कभी रजोगुण और तमोगुण बढ़ जाते हैं तो असुरों और यक्ष राक्षसों का साम्राज्य हो जाता ह। और पुनः सत्त्वगुण बढ़ जाने पर फिर देवताओं का राज्य हो जाता है। इस तरह भगवान सभी जीवों के प्रति समान भाव प्रकट रते हें और किसी से पक्षपात नही करते। श्रीश्रीमद राधागाविन्द दास गार्वामी महाराज  संगीत, जैसे जैज़, आकस्मिक रूपसेरचा गया भी आत्मा से जुड़ाव को प्रोत्साहित कर सकता 81 सहजता और वर्तमान में रहनेकी इसमें प्रेरणा होती है। संगीतकार जब इस प्रवाह में होते हैं॰ तोवे एक ऐसे स्रोत से जुड़ते हैंजो मन के नियंत्रण सेपरे होता है। यह प्रवाह एक आध्यात्मिक अनुभव के है॰ जहाँ आत्मा समा और संगीत केबीच कीसीमाएँ मिट जाती हें और आत्मा की शुद्ध अभिव्यक्ति प्रकट होती है। श्रीजी १० २ २०२६ यूंतो शब्दों के मतलब कई निकलते है मगरभावनाओं का मतलब सिर्फ़ एक होत़ा है, अपनत्व, सेह परवाह || - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
☝अनमोल ज्ञान - अनुष्ठान दिवस ४१ प्रेमानंद महाराजः टोकन बदला =- गाज्तखब्यचास्चासगा की साकार अवतार ரசார ரா से निराकार तक की यात्रा परमान्सासो अपनती मौफ़णनुसारहमे ज्तिस् के संदेश की आत्मा र्ममे ज्िन्म दिसाह उस्ती फर्मानसार নিবসসালননন সচীচসায়ছিলম श्रृंखला है। हयों ब्ह्य गहर्ल रों उठकर परसात्रमा ध्यान  सधना ओोर षार्थनाकरकी यहिएफि॰ आष्ा के रूप के साथ फाथिनहमारे लिएसोभार्यशालीहोहसा अवतार ಔರಢೈಈಕರೆ ತ್ೊತರತ ಚರಘದೊಳತು केवल और केवल प्रेम भाव से ಶರಖತಪಾತಳrಚಳr mಳಾದಂಳಶ೯ರೈಫ್ মীভনী কি্স্নয সকননবনী নলী সবমলদনী ही समरस हो सकते है।  चाहिए किहमों औरहमारी पथनाकरनत দীিরিীক্রীসসমসননতীন্তনডবসন নানা মামী রল! யசg  ரர भविष्य में ४ टेवचोलौज आने वाली ITT ~I I ही मशीनों से होगा, और कार्य सारा बेरोजगारी कीसमस्या आसकती हे आत्म -धर्ग की ख्योति जलते छी , सर्व सामान्य मनृष्य से आपको विशोष की आवश्यकता होगी बनने HF बहरी भेन कपने क्षागु मिट जाते हें । विशेष मनुष्य शरीर से नहीं आत्मा से गेरे सतगुरू" नियमित बन सकते हो 39 4 साधना करतेहो॰तो आपके शरीर م आसपास औसा का निर्माण होगा आपका औरा ही भविष्यमें आपको समाज म विशेष व्यक्ति बनाएगा , 3ారాశా आात्मा को Araqaa आप महक रही हे जिन्दगी एक विशेष आत्मा चाले व्यक्ति बरक बन सकत ह। ने गुरुदेव से पुछा आदमी मेहनत साधक से आगे बढ़ता है या भाग्य से? गुरुदेव कहा आपका बैंक में लाकर तो होगा? आज शी आपके रहगतो से उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मेनेजर के पास वाली RWII आापका हरवचन जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला भाग्य नही खुल सकता। आप कर्मयोगी हैं ओर मैनेजर भगवान। आप को अपनी चाभी अफो वाल बाते ब्यक्िमेईश्वर को देखना ऐम ह भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर M3mrdnmannitinನ ऐसी हमे सोगात शी  वाला कब अपनी चाभी लगा दे। कहीं ऐसा न हो की भगवान अपनी भाग्यवाली HAPpl 1- चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाभी न लगा पायें और ताला खुलने से रह आया पालिकच्यानयोनपगन अनुष्ठान दिवस ४१ प्रेमानंद महाराजः टोकन बदला =- गाज्तखब्यचास्चासगा की साकार अवतार ரசார ரா से निराकार तक की यात्रा परमान्सासो अपनती मौफ़णनुसारहमे ज्तिस् के संदेश की आत्मा र्ममे ज्िन्म दिसाह उस्ती फर्मानसार নিবসসালননন সচীচসায়ছিলম श्रृंखला है। हयों ब्ह्य गहर्ल रों उठकर परसात्रमा ध्यान  सधना ओोर षार्थनाकरकी यहिएफि॰ आष्ा के रूप के साथ फाथिनहमारे लिएसोभार्यशालीहोहसा अवतार ಔರಢೈಈಕರೆ ತ್ೊತರತ ಚರಘದೊಳತು केवल और केवल प्रेम भाव से ಶರಖತಪಾತಳrಚಳr mಳಾದಂಳಶ೯ರೈಫ್ মীভনী কি্স্নয সকননবনী নলী সবমলদনী ही समरस हो सकते है।  चाहिए किहमों औरहमारी पथनाकरनत দীিরিীক্রীসসমসননতীন্তনডবসন নানা মামী রল! யசg  ரர भविष्य में ४ टेवचोलौज आने वाली ITT ~I I ही मशीनों से होगा, और कार्य सारा बेरोजगारी कीसमस्या आसकती हे आत्म -धर्ग की ख्योति जलते छी , सर्व सामान्य मनृष्य से आपको विशोष की आवश्यकता होगी बनने HF बहरी भेन कपने क्षागु मिट जाते हें । विशेष मनुष्य शरीर से नहीं आत्मा से गेरे सतगुरू" नियमित बन सकते हो 39 4 साधना करतेहो॰तो आपके शरीर م आसपास औसा का निर्माण होगा आपका औरा ही भविष्यमें आपको समाज म विशेष व्यक्ति बनाएगा , 3ారాశా आात्मा को Araqaa आप महक रही हे जिन्दगी एक विशेष आत्मा चाले व्यक्ति बरक बन सकत ह। ने गुरुदेव से पुछा आदमी मेहनत साधक से आगे बढ़ता है या भाग्य से? गुरुदेव कहा आपका बैंक में लाकर तो होगा? आज शी आपके रहगतो से उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मेनेजर के पास वाली RWII आापका हरवचन जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला भाग्य नही खुल सकता। आप कर्मयोगी हैं ओर मैनेजर भगवान। आप को अपनी चाभी अफो वाल बाते ब्यक्िमेईश्वर को देखना ऐम ह भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर M3mrdnmannitinನ ऐसी हमे सोगात शी  वाला कब अपनी चाभी लगा दे। कहीं ऐसा न हो की भगवान अपनी भाग्यवाली HAPpl 1- चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाभी न लगा पायें और ताला खुलने से रह आया पालिकच्यानयोनपगन - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - साई Cப ா  Ga पारतीय अव्यात्मिक ग़ुरू योगी फकीर सत बुद्धि का मार्ग ओर भाव का मार्ग दोनों एकदम  bacom  salbabashirdnl विरुद्घ दिशा में चलते ्हे। बुद्धि सदैव ही निरीक्षण  करती है, भाव सदेव अनुभूति' करता है। शिवकृपानंद स्वामीजी  अधूरा ज्ञान निरर्थक है . The intellectual path and the emotional path Bo in absolurely opposite directions The intellect always observes and inspects मुश्किलों से दूर भागने से while feelings and emotions always lead 1o 'spirituat experishreee Shivkrupanand Swamiji  भीगने का अगर शोक हो तो तुम उनसे बच नहीं सकते।  कभी सतगुरु के चरणों में आकर बादल तो कभी॰कभी बेठ  जाना बरसते हें मगर सतगुरु की कृपषा तो हर पल बरसती हे। जय हो सदगुरु बाबा स्वामीजी Il साई Cப ா  Ga पारतीय अव्यात्मिक ग़ुरू योगी फकीर सत बुद्धि का मार्ग ओर भाव का मार्ग दोनों एकदम  bacom  salbabashirdnl विरुद्घ दिशा में चलते ्हे। बुद्धि सदैव ही निरीक्षण  करती है, भाव सदेव अनुभूति' करता है। शिवकृपानंद स्वामीजी  अधूरा ज्ञान निरर्थक है . The intellectual path and the emotional path Bo in absolurely opposite directions The intellect always observes and inspects मुश्किलों से दूर भागने से while feelings and emotions always lead 1o 'spirituat experishreee Shivkrupanand Swamiji  भीगने का अगर शोक हो तो तुम उनसे बच नहीं सकते।  कभी सतगुरु के चरणों में आकर बादल तो कभी॰कभी बेठ  जाना बरसते हें मगर सतगुरु की कृपषा तो हर पल बरसती हे। जय हो सदगुरु बाबा स्वामीजी Il - ShareChat
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☝अनमोल ज्ञान - Guzutaltva शब्द कप हों और अनुभव गहर - बही आध्यात्म हे। शरीर तो फूल है। फूल की सुगंध ही ' आत्मा' है, जो है पर दिखती नहीं।  श्री शिवकृपानंद स्वामीजी  { Gwwztaltva   The body is a flower The fragrance of the flower is the 'soul; which is present but is invisible Shree Shivkrupanand Swamiji n Guzutaltva शब्द कप हों और अनुभव गहर - बही आध्यात्म हे। शरीर तो फूल है। फूल की सुगंध ही ' आत्मा' है, जो है पर दिखती नहीं।  श्री शिवकृपानंद स्वामीजी  { Gwwztaltva   The body is a flower The fragrance of the flower is the 'soul; which is present but is invisible Shree Shivkrupanand Swamiji n - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - सदगुरु खीकारभाव का समुद्रहोते हे और बही भाव शिष्यमें स्थापित हा यह उनका प्रयल रहता है । आप आपके चित्त को पवित्र रखने में , शुद्ध रखने में सफल हो जाओ  बाकी सब अपने आप मिल जाएगा  शिवकृपानद स्तामीला  सदगुर > सदगुरु खीकारभाव का समुद्रहोते हे और बही भाव शिष्यमें स्थापित हा यह उनका प्रयल रहता है । आप आपके चित्त को पवित्र रखने में , शुद्ध रखने में सफल हो जाओ  बाकी सब अपने आप मिल जाएगा  शिवकृपानद स्तामीला  सदगुर > - ShareChat
#☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
☝अनमोल ज्ञान - हमें पहले ध्यान की पहचान अपने राधे शरीर को कराना होती है। सर्वप्रथन तो राधे स्नानआदि करके अपने शरीरको स्वच्छ और पवित्र करलें। बादमें अपने आराध्य का फोटो पश्चिम दिशाकी ओर मुँह करके रखें। यानी आप जब उसके सामने बैठें तो आपका मुँह पूर्व की दिशा की ओरहो। फ़ोटो को किसी (zff) पर स्थापित करें टेबल या 3ತf ।उस फोटो को प्रथम गुलाब जल से पोछें। बादमें उसेतिलक करें और उसके सामने दीपक जलाएँ गाय केधी काया तिल केतेलका और बादमें दरी परअपना एक ٠3٦~ SசS आत्मा भी अंदर  सिद्धासन में या वज्रासन में आसन पर பu  i बैठें , एक निच्छित समय पर बैठें एक औरउस परमात्मासे मिलने कारास्ता निचच्छित समय तक बैठें  3<FI भाग - ६ ೦ आपक u 2೦( ೆ हमें पहले ध्यान की पहचान अपने राधे शरीर को कराना होती है। सर्वप्रथन तो राधे स्नानआदि करके अपने शरीरको स्वच्छ और पवित्र करलें। बादमें अपने आराध्य का फोटो पश्चिम दिशाकी ओर मुँह करके रखें। यानी आप जब उसके सामने बैठें तो आपका मुँह पूर्व की दिशा की ओरहो। फ़ोटो को किसी (zff) पर स्थापित करें टेबल या 3ತf ।उस फोटो को प्रथम गुलाब जल से पोछें। बादमें उसेतिलक करें और उसके सामने दीपक जलाएँ गाय केधी काया तिल केतेलका और बादमें दरी परअपना एक ٠3٦~ SசS आत्मा भी अंदर  सिद्धासन में या वज्रासन में आसन पर பu  i बैठें , एक निच्छित समय पर बैठें एक औरउस परमात्मासे मिलने कारास्ता निचच्छित समय तक बैठें  3<FI भाग - ६ ೦ आपक u 2೦( ೆ - ShareChat
#🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान
🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 - Gullన ्में बेठकर पूर्ण भाव से आकाश को ही एकांत  आण तक आकाश की ओर देखते कुछ देर  WIII OIIIUII रहो तो भी आपके विचार बंद हो जाएँगे ओर आपको असीम शांति का अनुभव होगा। सुख और दुःख एक ही "(TtTtT WTNri  सिक्के के दो पहलू हैं। VrH- leir जो सुख का अनुभव कर ٥٨ ٦٨٦٢ सकता है, वह दुःख का भी अनुभव कर सकता है। (बाबा स्वामी जी) 'Forgivenessopens the| door tograce: | Qurudev Shu Narayan Swamu_ ध्यान साधना करना பள = जिनक याने अपने जीवन की प्रत्येक आत्मा की मु समस्याओं से भागना नहीं है। (बाबा खामी जी। Gullన ्में बेठकर पूर्ण भाव से आकाश को ही एकांत  आण तक आकाश की ओर देखते कुछ देर  WIII OIIIUII रहो तो भी आपके विचार बंद हो जाएँगे ओर आपको असीम शांति का अनुभव होगा। सुख और दुःख एक ही "(TtTtT WTNri  सिक्के के दो पहलू हैं। VrH- leir जो सुख का अनुभव कर ٥٨ ٦٨٦٢ सकता है, वह दुःख का भी अनुभव कर सकता है। (बाबा स्वामी जी) 'Forgivenessopens the| door tograce: | Qurudev Shu Narayan Swamu_ ध्यान साधना करना பள = जिनक याने अपने जीवन की प्रत्येक आत्मा की मु समस्याओं से भागना नहीं है। (बाबा खामी जी। - ShareChat
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🧘सदगुरु जी🙏 - फरवरी जिंदगी के इस सफरमें 0 कभी कभी बच्चे मिट्टी के घर बनाते हैं और जितने आनन्द से बनाते हैं उससे कई अधिक आनन्द से उसे  ना बादशाह चलता है तोड़ देते है। ऐसा करने में उन्हें बहुत आनन्द आता है। उसी तरह भगवान हम जीवों को क्लेश देने के ना इक्का चलता है लिए सृष्टि का निर्माण और प्रलय नही करते। वे अपने आनन्द के लिए यह सब करते हे। "े खेल है कर्मोका" उन्हें असुरों से लडने मेभी अत्यधिक आनन्द समनदार की प्राथना मांग नही। समर्पण होती है। आता है। अतः वास्तव में देखा जाए तो यह अपनी नही परमाल्मा की मर्जी पर भरोसा फरता हे। दृष्टि से सभी जीवों के प्रति समान पहाँ सिर्फ कर्मोका सिक्का भगवान एक भाव रखते ह। (nTidn mirtMi [lai चलता है।।! पर चान फय ओम नमःशिवाय आँसुओं हम संगीत सुनते हैं, तो हम अक्सर ডা9 से अभिभूत हो जाते हैं केवल उसकी सुंदरता के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि वह हमारे भीतर के गहन सत्य से सामंजस्य करता है। সী তী २०२६ DCKUE  (' शिवसत्य शिव अनंत हे॰ शिव अनादि शिवशक्ति हे॰शिव शक्तिहि शिव औकारहेशिव बह्मया शुभ सामवार उठिए... जागिए॰ मुस्कुराइए और प्रभु को धन्यवाद दीजिए कि  होनाभी अच्छ Jlcl 3  और आप स्वस्थ हैं और अपनों नहींहोताः पताही नहीं 3TT2 గ్ీ  <8 8. चलतालोग कदरकर যা కాా ' फरवरी जिंदगी के इस सफरमें 0 कभी कभी बच्चे मिट्टी के घर बनाते हैं और जितने आनन्द से बनाते हैं उससे कई अधिक आनन्द से उसे  ना बादशाह चलता है तोड़ देते है। ऐसा करने में उन्हें बहुत आनन्द आता है। उसी तरह भगवान हम जीवों को क्लेश देने के ना इक्का चलता है लिए सृष्टि का निर्माण और प्रलय नही करते। वे अपने आनन्द के लिए यह सब करते हे। "े खेल है कर्मोका" उन्हें असुरों से लडने मेभी अत्यधिक आनन्द समनदार की प्राथना मांग नही। समर्पण होती है। आता है। अतः वास्तव में देखा जाए तो यह अपनी नही परमाल्मा की मर्जी पर भरोसा फरता हे। दृष्टि से सभी जीवों के प्रति समान पहाँ सिर्फ कर्मोका सिक्का भगवान एक भाव रखते ह। (nTidn mirtMi [lai चलता है।।! पर चान फय ओम नमःशिवाय आँसुओं हम संगीत सुनते हैं, तो हम अक्सर ডা9 से अभिभूत हो जाते हैं केवल उसकी सुंदरता के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि वह हमारे भीतर के गहन सत्य से सामंजस्य करता है। সী তী २०२६ DCKUE  (' शिवसत्य शिव अनंत हे॰ शिव अनादि शिवशक्ति हे॰शिव शक्तिहि शिव औकारहेशिव बह्मया शुभ सामवार उठिए... जागिए॰ मुस्कुराइए और प्रभु को धन्यवाद दीजिए कि  होनाभी अच्छ Jlcl 3  और आप स्वस्थ हैं और अपनों नहींहोताः पताही नहीं 3TT2 గ్ీ  <8 8. चलतालोग कदरकर যা కాా ' - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - फखरी 0ய" ( श्रील प्रभुपद जी ने वह अन्तगप्रीय कृणभावनामृत = ्ध्यान कभी किया नही जाता, वह हो जाता हे। IISKCON TTIITTTTFI श्री शिवकृपानंद स्वामीजी कृण्णभक्ति वराने क लिए। अतः भत्तगग भगवनरव कीति प्रचार कखे जनता की सहायता कोशार भीदस प्रचर कार्वमेभकां की परिपृण  जनता -71P77I IWTYFTT TTT कथन उपा्थन करे भगवान शीकण म प्रति बढाएग। इस कहते ह अन्तरप्रीय  कृणभावनामृत सय {3ma ಹmiay ನ Meditation is never done itjust happens Shree Shivkrupanand Swamiji মুদ্রসান বিনন "सबके पास समान आंखें हें लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं। " बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती हे। फखरी 0ய" ( श्रील प्रभुपद जी ने वह अन्तगप्रीय कृणभावनामृत = ्ध्यान कभी किया नही जाता, वह हो जाता हे। IISKCON TTIITTTTFI श्री शिवकृपानंद स्वामीजी कृण्णभक्ति वराने क लिए। अतः भत्तगग भगवनरव कीति प्रचार कखे जनता की सहायता कोशार भीदस प्रचर कार्वमेभकां की परिपृण  जनता -71P77I IWTYFTT TTT कथन उपा्थन करे भगवान शीकण म प्रति बढाएग। इस कहते ह अन्तरप्रीय  कृणभावनामृत सय {3ma ಹmiay ನ Meditation is never done itjust happens Shree Shivkrupanand Swamiji মুদ্রসান বিনন "सबके पास समान आंखें हें लेकिन सबके पास समान दृष्टिकोण नहीं। " बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती हे। - ShareChat