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#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - W6 uనuIllన JlflMHitlmuudlufrulml यह सृजनात्मक क्िया अत्यत उपचारात्मक होती ह क्याकि यहहर्म भीतरनो दव ढुणाहेउस ম সলবুন बाहरलाने ओरजागरूकता के प्रकाश करे देती हे। इस प्रक्रिया से हम अपने वास्तविक स्वरूप की अंतर्दष्टि प्राप्त करते ह को मुक्त करते हे ओर गहन संतोष  নে চ্য সানী तथा आत्म संवंध का अनुभव करते ह। श्रीजी १२ २ २०२६ W6 uనuIllన JlflMHitlmuudlufrulml यह सृजनात्मक क्िया अत्यत उपचारात्मक होती ह क्याकि यहहर्म भीतरनो दव ढुणाहेउस ম সলবুন बाहरलाने ओरजागरूकता के प्रकाश करे देती हे। इस प्रक्रिया से हम अपने वास्तविक स्वरूप की अंतर्दष्टि प्राप्त करते ह को मुक्त करते हे ओर गहन संतोष  নে চ্য সানী तथा आत्म संवंध का अनुभव करते ह। श्रीजी १२ २ २०२६ - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - साई बाबा খন সাদ ককে सुख नही मिलता जो सेवा करके मिलता है ஈ14777777 161 ff ಹrq T दिवय प्थिति कहलात ह 6 साई बाबा খন সাদ ককে सुख नही मिलता जो सेवा करके मिलता है ஈ14777777 161 ff ಹrq T दिवय प्थिति कहलात ह 6 - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏गुरु महिमा😇 - अनुष्ठान दिवस४३ Cur की साकार अवतार वर्तमान केप्रत्येक क्षण को ' आनंद केसाथ जियो। पता नही कीन ्सा क्षण हमारे जीवन का से निराकारतक की यात्रा आखिरी क्षणाही। श्री शिवकपानद स्वामीजी  के संदेश की आत्मा { श्रृंखला है। ৯মাথ নী अवतार निःस्वार्थ भाव सेप्रेम कर आसानी से हम जुड़ सकते নানা মামী है। 1 a న్ {ಿ      0 [ 0 11 1 1 ~ { { { 1=1  و {     ]] बुद्धि का मार्ग ओर भाव का मार्ग दोनों एकदम  2141 = +-- న బ ]న 0  న 00 57 7+= 1 న दिशा मे चलते ६। इटि सदेवही निरीक्षण  4846 హా  फार +7 7 करती ६ भाव सदेव ' अनुभूति करता ऐ।  1 ~ న रश्री शिवकृपानद स्वामीजी  GCI अनुष्ठान दिवस४३ Cur की साकार अवतार वर्तमान केप्रत्येक क्षण को ' आनंद केसाथ जियो। पता नही कीन ्सा क्षण हमारे जीवन का से निराकारतक की यात्रा आखिरी क्षणाही। श्री शिवकपानद स्वामीजी  के संदेश की आत्मा { श्रृंखला है। ৯মাথ নী अवतार निःस्वार्थ भाव सेप्रेम कर आसानी से हम जुड़ सकते নানা মামী है। 1 a న్ {ಿ      0 [ 0 11 1 1 ~ { { { 1=1  و {     ]] बुद्धि का मार्ग ओर भाव का मार्ग दोनों एकदम  2141 = +-- న బ ]న 0  న 00 57 7+= 1 న दिशा मे चलते ६। इटि सदेवही निरीक्षण  4846 హా  फार +7 7 करती ६ भाव सदेव ' अनुभूति करता ऐ।  1 ~ న रश्री शिवकृपानद स्वामीजी  GCI - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 0 चतुराई चौपट करे ज्ञानी   गोते भोले भाले   लोगन को खाए; ೧೧ नारायण मिल আাৎ !! 0 चतुराई चौपट करे ज्ञानी   गोते भोले भाले   लोगन को खाए; ೧೧ नारायण मिल আাৎ !! - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - 0 09ப -4  و CFTFLDUT  मका अहकार शरीर निर्मित हे। ಚCನನ वढ सामूरिकता के समुद मे जाए बिना समाप्त  नही ही सकता ६। -1 प्रूष्पशी िवकृपनद स्वामीण   Aaare মাল:  সামোনেক মন ` +r +71 9 आप खराव से खराव जगह भी हे॰ बुरे से बुरे लोगों के चीच मे भी हे तो भी आपका  चित्त अगर गुरु के ऊपर हे तो आपर्मे तो आयेगा, आपके आसपास में॰भी॰ 020 एक लाय्यात्मिल गागा बदताव आयेगा। Doa अनुष्ठान ादवस४२ /u गुठजैसा न आसर गुरूजैसा नमीत  गुरु कृपा से पाइए चचल मनपरजीत  की साकार अवतार   जपवावा स्वामी से निराकार तक की यात्रा ఏాపాాగాాగాగాగాాగాగా के संदेश की P आत्मा "নৈনতচন বদুবিলিন श्रृंखला है। 9-75Tர777 Munhai  प्रेम " आत्मा का मुल स्वभाव  ম্যা_দমবিিন্যমেল্যাI ೨೦ೂ5327455R47 होता हे निःस्वार्थ प्रेम सेकिसी  57/ भी आत्मा से जुड़ा " ஓர்சிஈனாசய் जासकता ीिय   0 61 बाबा स्वामी আামনিকমন  0 09ப -4  و CFTFLDUT  मका अहकार शरीर निर्मित हे। ಚCನನ वढ सामूरिकता के समुद मे जाए बिना समाप्त  नही ही सकता ६। -1 प्रूष्पशी िवकृपनद स्वामीण   Aaare মাল:  সামোনেক মন ` +r +71 9 आप खराव से खराव जगह भी हे॰ बुरे से बुरे लोगों के चीच मे भी हे तो भी आपका  चित्त अगर गुरु के ऊपर हे तो आपर्मे तो आयेगा, आपके आसपास में॰भी॰ 020 एक लाय्यात्मिल गागा बदताव आयेगा। Doa अनुष्ठान ादवस४२ /u गुठजैसा न आसर गुरूजैसा नमीत  गुरु कृपा से पाइए चचल मनपरजीत  की साकार अवतार   जपवावा स्वामी से निराकार तक की यात्रा ఏాపాాగాాగాగాగాాగాగా के संदेश की P आत्मा "নৈনতচন বদুবিলিন श्रृंखला है। 9-75Tர777 Munhai  प्रेम " आत्मा का मुल स्वभाव  ম্যা_দমবিিন্যমেল্যাI ೨೦ೂ5327455R47 होता हे निःस्वार्थ प्रेम सेकिसी  57/ भी आत्मा से जुड़ा " ஓர்சிஈனாசய் जासकता ीिय   0 61 बाबा स्वामी আামনিকমন - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - शरी हनुभान थादीसानी र्यना पाछणनी সনিsifমs sথil সল সলl HitJHথlleucluHrsi ్ -  [ { arx<lಭsu 00   م ل 0 {uyrii(hul 141  Vn 4 N4 W0WiWనulk JWIWi MAtIM 4( Mlal? शरी हनुभान थादीसानी र्यना पाछणनी সনিsifমs sথil সল সলl HitJHথlleucluHrsi ్ -  [ { arx<lಭsu 00   م ل 0 {uyrii(hul 141  Vn 4 N4 W0WiWనulk JWIWi MAtIM 4( Mlal? - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - फरवरी ?? भातिक संसार मे सदा प्रतिस्पर्धा का वातावरण वना रहता हे। कोई विद्यार्थी यदि किसी दसरे विद्यार्थी से अधिक पढाई कर ले तो उन विद्याथियों मे तुरन्त ईर्ष्या " उत्पन्न होने लगती है। কিল आध्यात्मिक जीवन ऐसा नही ह।  कदरन करले पर उपरवाला छीन ही लेता हर यदि कोई भक्त सोलह माला जप करता ह शी आरशख्स भीः মম आर वह किसी आर भक्त को चांसठ माला  जप करते हुए देख ले तो उसे ईष्या नही अपितु अत्यधिक आनन्द होता ह। भक्तों मे इस प्रकार  वक़्त का पासा कभी भी का कोई वैर होता ही नही।  पलट सकता है॰ इसलिए (थाशामद रपागाविन्द दाम गास्यर्म मदागन  वही सितम करजो नू शी सह सके। हर सुवह  ಎutitul lite ज़िंदगी हमें चुपके से याद दिलाती हे- कि सांसें चल रही हे तों उम्गीदें भी जिंदा हे! मैं उस भीड़ से दूर रहता हूं आज मुखुरा लेना  जहां लोग अपना होने का, शायद যর্মী মনয ব্যীনীন মা नाटक करते हैं. फरवरी ?? भातिक संसार मे सदा प्रतिस्पर्धा का वातावरण वना रहता हे। कोई विद्यार्थी यदि किसी दसरे विद्यार्थी से अधिक पढाई कर ले तो उन विद्याथियों मे तुरन्त ईर्ष्या " उत्पन्न होने लगती है। কিল आध्यात्मिक जीवन ऐसा नही ह।  कदरन करले पर उपरवाला छीन ही लेता हर यदि कोई भक्त सोलह माला जप करता ह शी आरशख्स भीः মম आर वह किसी आर भक्त को चांसठ माला  जप करते हुए देख ले तो उसे ईष्या नही अपितु अत्यधिक आनन्द होता ह। भक्तों मे इस प्रकार  वक़्त का पासा कभी भी का कोई वैर होता ही नही।  पलट सकता है॰ इसलिए (थाशामद रपागाविन्द दाम गास्यर्म मदागन  वही सितम करजो नू शी सह सके। हर सुवह  ಎutitul lite ज़िंदगी हमें चुपके से याद दिलाती हे- कि सांसें चल रही हे तों उम्गीदें भी जिंदा हे! मैं उस भीड़ से दूर रहता हूं आज मुखुरा लेना  जहां लोग अपना होने का, शायद যর্মী মনয ব্যীনীন মা नाटक करते हैं. - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - Guutalta समझते हैं कि एकाग्रता का संबंध ब्रेइन से आप यानी मस्तिष्क से है। नहीं इसका संबंध आपके पेट आपका पेट ही गड़बड़़ है॰ तो से होता है। जब आपका मस्तिष्क भी गड़बड़ होगा ही! पेट गड़बड़ से मेरा आशय आपका खान- पान ही ठीक नहीं है। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी स्रोतः नवयुग की ओर ग्रंथ  Guutalta समझते हैं कि एकाग्रता का संबंध ब्रेइन से आप यानी मस्तिष्क से है। नहीं इसका संबंध आपके पेट आपका पेट ही गड़बड़़ है॰ तो से होता है। जब आपका मस्तिष्क भी गड़बड़ होगा ही! पेट गड़बड़ से मेरा आशय आपका खान- पान ही ठीक नहीं है। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी स्रोतः नवयुग की ओर ग्रंथ - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - Cಣ ओर दुःख यह दीनों अवस्था के ऊपर सुख #মান ৮1 रश्ी शिवकृपानंद स्वामीणी  C-ಣ Medirarion s abovo is abovo both the states ol happiness and sorrow Shree Shivkrupanand Swamil Cಣ ओर दुःख यह दीनों अवस्था के ऊपर सुख #মান ৮1 रश्ी शिवकृपानंद स्वामीणी  C-ಣ Medirarion s abovo is abovo both the states ol happiness and sorrow Shree Shivkrupanand Swamil - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🧘सदगुरु जी🙏 - परम पूज्य श्री शिवकृपानंदस्वामी जी  हिमालयन समर्पण ध्यान योग 59 की मदद करके, वास्तव মনুষ্প {గ में, अपनी ही मदद करता रहता है, अपने लिए ही मार्ग बनाता रहता है हिमालयन समर्पण थ्यान योग अपने लिए ही रास्ता बनाता रहता है। मनुष्य ओर पशु पक्षी में आहार निद्रा  মথুন येःसबतो॰मारहीहे आत्मा भय पशुओं मे भी समान ही हे पक्षियो मे भी आत्मा तोहोती हीह केवल मनुष्य के शरीरकी सरचना इस प्रकारकी ह कि वह उपासना साथना भक्ति करके हिमालय का समर्पण योग भाग॰ २ अपने जीवन काल मेंही मोक्ष की स्थिति पा सकता ऐ। अगर मनुष्य जन्म में॰शी आत्मा उद्देश्य नहीं करती ह पूर्ण  तो उसका मनुष्य देह थारण करना व्यर्थ श्री शिवकृपानंदखवामी जी पूज्य ही हे। क्योकि मनुष्य ध्यान कर सकता परम ह और नियमित ध्यान साधना करके मोक्ष की स्थिति पासकता हे। हिमालय का समर्पण योग भाग  ४ परम पज्य श्री शिवकपानदसव परम पूज्य श्री शिवकृपानंदस्वामी जी  हिमालयन समर्पण ध्यान योग 59 की मदद करके, वास्तव মনুষ্প {గ में, अपनी ही मदद करता रहता है, अपने लिए ही मार्ग बनाता रहता है हिमालयन समर्पण थ्यान योग अपने लिए ही रास्ता बनाता रहता है। मनुष्य ओर पशु पक्षी में आहार निद्रा  মথুন येःसबतो॰मारहीहे आत्मा भय पशुओं मे भी समान ही हे पक्षियो मे भी आत्मा तोहोती हीह केवल मनुष्य के शरीरकी सरचना इस प्रकारकी ह कि वह उपासना साथना भक्ति करके हिमालय का समर्पण योग भाग॰ २ अपने जीवन काल मेंही मोक्ष की स्थिति पा सकता ऐ। अगर मनुष्य जन्म में॰शी आत्मा उद्देश्य नहीं करती ह पूर्ण  तो उसका मनुष्य देह थारण करना व्यर्थ श्री शिवकृपानंदखवामी जी पूज्य ही हे। क्योकि मनुष्य ध्यान कर सकता परम ह और नियमित ध्यान साधना करके मोक्ष की स्थिति पासकता हे। हिमालय का समर्पण योग भाग  ४ परम पज्य श्री शिवकपानदसव - ShareChat