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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - राम रतनु तब पाईऐ ्जउ पहिले तजहि सरीरु अर्थः हे भाई! मनुष्य असल சI मै तेरा परमात्मा केनाम की प्राप्ति है॰ H வ इसके लिए यह जरूरी है कि परमात्मा का भिखारी सिमरन किया जाए। परमात्मा ही सबसे बड़ा है संसार में सबसे बड़ा उसका नाम जिओ उसका है।हे भाई अगरतू पहले अपने शरीरके मोह भी त्याग तबही परमात्मा का पहाडा मिलता है। श्लोक में <61 ٦ रूप 7< নাল का उपयोग आत्म ्ज्ञान के लिए किया शब्द जिस तरह रत्न एक बहुत ही 8 गया बाबा वस्तु है॰ और इसी मूल्यवान और दुर्लभ आत्म ्ज्ञान भी एक बहुत ही मूल्यवान तरह वस्तु है। भाई मेरे आत्मन्ज्ञान और दुर्लभ ' हमें अपने शरीरके मोह fag ' की प्राप्ति के त्यागना होगा और अपने आप का को आत्मन्ज्ञान की ओर बढ़ाना होगा। राम रतनु तब पाईऐ ्जउ पहिले तजहि सरीरु अर्थः हे भाई! मनुष्य असल சI मै तेरा परमात्मा केनाम की प्राप्ति है॰ H வ इसके लिए यह जरूरी है कि परमात्मा का भिखारी सिमरन किया जाए। परमात्मा ही सबसे बड़ा है संसार में सबसे बड़ा उसका नाम जिओ उसका है।हे भाई अगरतू पहले अपने शरीरके मोह भी त्याग तबही परमात्मा का पहाडा मिलता है। श्लोक में <61 ٦ रूप 7< নাল का उपयोग आत्म ्ज्ञान के लिए किया शब्द जिस तरह रत्न एक बहुत ही 8 गया बाबा वस्तु है॰ और इसी मूल्यवान और दुर्लभ आत्म ्ज्ञान भी एक बहुत ही मूल्यवान तरह वस्तु है। भाई मेरे आत्मन्ज्ञान और दुर्लभ ' हमें अपने शरीरके मोह fag ' की प्राप्ति के त्यागना होगा और अपने आप का को आत्मन्ज्ञान की ओर बढ़ाना होगा। - ShareChat