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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - हरि अम्रित भिंने लोइणा मनु प्रेमि रतंना राम राजे।।मनु रामि कसवटी ক্রবন্তু सोविंना Il लाइआ भाई! हम दुनिया को दोष, ईर्ष्या और लालच की नजर से মীঠা के प्रेम में भीग जाता देखते हैंl लेकिन जब मन परमात्मा में एक " है। यह नमी अहंकार तो आँखों  नमीं आ আনী सूख जाने का प्रतीक है। जैसे कठोर मिट्टी में बीज नहीं लगे उगता , वैसे ही कठोर और अहंकारी मन में भक्ति नहीं उपजती| जब आँखें " भिंने " भीगी हुई होती हैं, हर जीव में ईश्वर दिखने लगता है। तब इंसान को परमात्मा हमें मुसीबतों में डालकर यह देखता है कि क्या हम तेरा अभी भी उसी पर भरोसा करते हैं, या हम फिर से वास्तु ग्रह या दूसरों को दोष देते' शुद्धता परखने के लिए उसे कसौटी पर घिसा जैसे सोने जाता है, वैसे ही दुखों और कठिन समय  में जब भक्त का भाणा मन स्थिर रहता है॰ तो वह और भी निखर जाता है। जब इंसान दूसरों को दोष देना छोड़कर अपनी आदतों; क्रोध और लोभ को पहचान लेता है।तभी वह प्रभु की उस कसौटी पर है। यही वह क्षण है जब उसका पूरा जन्म धन्य खराउतरता हो जाता है। हरि अम्रित भिंने लोइणा मनु प्रेमि रतंना राम राजे।।मनु रामि कसवटी ক্রবন্তু सोविंना Il लाइआ भाई! हम दुनिया को दोष, ईर्ष्या और लालच की नजर से মীঠা के प्रेम में भीग जाता देखते हैंl लेकिन जब मन परमात्मा में एक " है। यह नमी अहंकार तो आँखों  नमीं आ আনী सूख जाने का प्रतीक है। जैसे कठोर मिट्टी में बीज नहीं लगे उगता , वैसे ही कठोर और अहंकारी मन में भक्ति नहीं उपजती| जब आँखें " भिंने " भीगी हुई होती हैं, हर जीव में ईश्वर दिखने लगता है। तब इंसान को परमात्मा हमें मुसीबतों में डालकर यह देखता है कि क्या हम तेरा अभी भी उसी पर भरोसा करते हैं, या हम फिर से वास्तु ग्रह या दूसरों को दोष देते' शुद्धता परखने के लिए उसे कसौटी पर घिसा जैसे सोने जाता है, वैसे ही दुखों और कठिन समय  में जब भक्त का भाणा मन स्थिर रहता है॰ तो वह और भी निखर जाता है। जब इंसान दूसरों को दोष देना छोड़कर अपनी आदतों; क्रोध और लोभ को पहचान लेता है।तभी वह प्रभु की उस कसौटी पर है। यही वह क्षण है जब उसका पूरा जन्म धन्य खराउतरता हो जाता है। - ShareChat