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।। ॐ ।। योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना। श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः।। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 सम्पूर्ण निष्काम कर्मयोगियों में भी जो श्रद्धाविभोर होकर अन्तरात्मा से, अन्तर्चिन्तन से मुझे निरन्तर भजता है, वह योगी मुझे परमश्रेष्ठ मान्य है। भजन दिखावे या प्रदर्शन की वस्तु नहीं है। इससे समाज भले ही अनुकूल हो किन्तु प्रभु प्रतिकूल हो जाते हैं। भजन अत्यन्त गोपनीय है और वह अन्तःकरण से होता है। उसका उतार-चढ़ाव अन्तःकरण के ऊपर है।
यथार्थ गीता - भजन दिखावे या प्रदर्शन की Il 3 Il योगिनामपि सर्वेषां मद्नगतेनान्तरात्मना। वस्तु नहीं है। इससे समाज भले श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो ही अनुकूल हो किन्तु प्रभु मतः।| সনিক্রুল ক্ী আান ট1 পতন निष्काम कर्मयोगियों में भी जो সম্পুণ [ अत्यन्त गोपनीय है और वह श्रद्धाविभोर होकर अन्तरात्मा से, अन्तर्चिन्तन से मुझे निरन्तर भजता है, वह अन्तःकरण से होता है। योगी मुझे परमश्रेष्ठ मान्य है। भजन दिखावे या प्रदर्शन की वस्तु नहीं है। इससे समाज भले ही अनुकूल हो किन्तु प्रभु प्रतिकूल हो जाते हैं। भजन अत्यन्त गोपनीय है और वह अन्तःकरण से होता है। उसका उतार-चढ़ाव अन्तःकरण के 381 भजन दिखावे या प्रदर्शन की Il 3 Il योगिनामपि सर्वेषां मद्नगतेनान्तरात्मना। वस्तु नहीं है। इससे समाज भले श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो ही अनुकूल हो किन्तु प्रभु मतः।| সনিক্রুল ক্ী আান ট1 পতন निष्काम कर्मयोगियों में भी जो সম্পুণ [ अत्यन्त गोपनीय है और वह श्रद्धाविभोर होकर अन्तरात्मा से, अन्तर्चिन्तन से मुझे निरन्तर भजता है, वह अन्तःकरण से होता है। योगी मुझे परमश्रेष्ठ मान्य है। भजन दिखावे या प्रदर्शन की वस्तु नहीं है। इससे समाज भले ही अनुकूल हो किन्तु प्रभु प्रतिकूल हो जाते हैं। भजन अत्यन्त गोपनीय है और वह अन्तःकरण से होता है। उसका उतार-चढ़ाव अन्तःकरण के 381 - ShareChat